मेरठ में नहीं है रेड लाइट एरिया, यूपी सरकार ने कोर्ट में दिया हलफनामा

सरकार की ओर से कहा गया कि जब भी हमें कोई सूचना मिलती है तो हम रेड लाइट एरिया में छापा डालकर महिलाओं को मुक्त कराते हैं ।

By: Akhilesh Tripathi

Published: 19 Jan 2019, 10:47 PM IST

प्रयागराज. इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दाखिल जनहित याचिका में सरकार की ओर से मेरठ रेड लाइट एरिया के प्रकरण में मेरठ जिले के एसएसपी ,जिलाधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी ,जिला उद्धार अधिकारी मेरठ ने अपना जवाब दाखिल किया। अपने जवाब में सरकार की ओर से कहा गया कि जब भी हमें कोई सूचना मिलती है तो हम रेड लाइट एरिया में छापा डालकर महिलाओं को मुक्त कराते हैं ।

जनवरी 2018 में 41 महिलाओं को इम्मोरल ट्रेफिक प्रीवेंशन एक्ट 1956 के तहत मेरठ रेड लाइट एरिया से मुक्त कराया है साथ ही 2010 में 21 सेक्स वर्करों को मेरठ कबाड़ी बाजार रेड लाइट एरिया से मुक्त करा कर उनको सिलाई कढ़ाई की ट्रेनिंग दिलाई गई थी। और उनको इस प्रकार पुनर्वास कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। अब मेरठ में रेडलाइट एरिया नही है। सरकार द्वारा हलफनामा दाखिल करते समय जिला क्षय रोग अधिकारी की रिपोर्ट को नजरअंदाज कर दिया गया । जिसमें मेरठ जिला क्षय रोग अधिकारी ने यह बताया था कि मेरठ जिले में 2009 से लगातार रेड लाइट एरिया चल रहा है। जहां लगभग 75 कोठे हैं और 400 सेक्स वर्करों को अप्रैल-मई जून 2018 में 20,000 से ज्यादा कंडोम का वितरण किया गया है ।


यह भी बताया है कि वर्तमान में 6 एड्स पीड़ित महिलाएं हैं। अभी तक 7 सेक्स वर्करों की मृत्यु हो चुकी है ,जिसमें एक सेक्स वर्कर की मृत्यु ग्राहक के द्वारा गोली मारने से,दूसरे सेक्स वर्कर की मृत्यु बारजे से कूदकर भागने से, तीसरे सेक्स वर्कर की मृत्यु एचआईवी पॉजिटिव होने से, चौथे सेक्स वर्कर की मृत्यु हार्ट अटैक होने से ,व अन्य कारणों से। सामाजिक कार्यकर्ता सुनील चौधरी की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर व न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह की खंडपीठ ने अगली सुनवाई की तिथि 25 जनवरी निश्चित की है।


अधिवक्ता व समाजसेवी सुनील चौधरी ने मांग की है कि कोठे बन्द कराये जाय। महिलाओं का पुनर्वास कराया जाय और उन्हे समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाए । याची ने उसे दलालों द्वारा याचिका वापस लेने की धमकी देने के आरोप में प्राथमिकी भी दर्ज कराई है और कोर्ट से सुरक्षा की मांग भी की है।

BY- Court Corrospondence

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