बिना प्लानिंग के चल रहा NCR में शामिल अलवर शहर का विकास, विभाग में ना स्टाफ, ना समन्वय

अलवर शहर के विकास के लिए काम करने वाले नगर परिषद् व यूआईटी के ना समन्वय है ना ही पर्याप्त स्टाफ, ऐसे में अलवर का विकास अटक गया है।

By: Lubhavan

Published: 22 Nov 2020, 10:07 PM IST

अलवर. एनसीआर में शामिल अलवर शहर का विकास बिना प्लानिंग के हो रहा है। नगर परिषद और यूआईटी की आपसी विवाद के चलते बिना अनुमति लिए ही कॉम्प्लेक्स तक बनाए जा रहे हैं। हालात यह है कि नगर परिषद में तो नगर नियोजक शाखा में स्टॉफ ही नहीं है। यहां नियोजन का काम निर्माण शाखा के अभियंताओं को दे रखा है।

नगर परिषद के पास शहर का अधिकतर भाग आ गया है ,लेकिन यहां तो नगर नियोजन की कोई तैयारी नहीं है। यहां सहायक अभियंता के पास ही अधीक्षण अभियंता तक का चार्ज है। यहां उप नगर नियोजक की एक पोस्ट है लेकिन यहां कई दशकों से उस पोस्ट पर किसी को लगाया तक नहीं है। ऐसे में भवन बॉयलाज की पूर्ति करवानी हो तो यह काम अभियंताओं के जिम्मे हैं जिन्हें इसकी प्रभावी जानकारी तक नहीं होती है।

बिना नियोजन के शहर को बना दिया बदसूरत-

बिना नगर नियोजन यह हाल है कि वातानुकूलित सुलभ काम्प्लेक्स काली मोरी रेलवे फाटक के आगे सार्वजनिक निर्माण विभाग के जमीन पर बनाया जा रहा था, जिसका काम मध्य में ही रोकना पड़ा। एक ऐसा ही लाखों की लागत का सुलभ शौचालय घोड़ा फेर के चौराहे पर बना दिया गया जिसका आउटलेट तक नहीं है, यह वर्षों से काम ही नहीं आ रहा है। शहर में जहां मर्जी आए कूड़े दान बना दिए जाते हैं तो अवैध कॉलोनियों में राजकोष से सडक़ें बना दी गई। यूआईटी के क्षेत्र में कटी घाटी के क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग की जा रही है।

नई कॉलोनियों में प्लाटों की संख्या इतनी कम है कि आम आदमी को लेना कठिन है। यानि वर्षों से बड़ी आवासीय योजना ही नहीं आई। शहर का विकास सुनियोजित तरीके से नहीं हो रहा है। अलवर शहर में रातों-रात अवैध निर्माण हो रहे हैं। कई बड़े काम्प्लेक्स तब बिना अनुमति के बना दिए गए हैं। भवन बनाते समय पार्र्किंग कितनी होगी या साइड में कितनी जगह छोडऩी होगी, यह नगर परिषद में बताने वाला कोई नहीं है।

Lubhavan Desk
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