अलवर में मरीजों ने खोली सरकारी अस्पताल की पोल, चिकित्सकों के व्यवहार को लेकर सामने आई यह बात

Prem Pathak

Publish: Apr, 17 2018 11:49:31 AM (IST)

Alwar, Rajasthan, India
अलवर में मरीजों ने खोली सरकारी अस्पताल की पोल, चिकित्सकों के व्यवहार को लेकर सामने आई यह बात

अलवर के सामान्य चिकित्सालय में मरीजों ने चिकित्सकों की पोल खोल दी है। मरीजों का कहना है कि चिकित्सकों का उनके प्रति व्यवहार ठीक नहीं है।

सामान्य, जनाना व शिशु अस्पताल का स्टाफ बर्ताव मरीजों का मर्ज घटाने के स्थान पर बढ़ा रहा है। ये खुलासा चिकित्सा विभाग की ओर से मोबाइल के माध्यम से लिए फीडबैक से हुआ है। इसमें मरीज या उनके परिजनों ने कहा कि चिकित्सकों का व्यवहार अशोभनीय बताया है। जबकि कुछ मरीज सफाई व अन्य परेशानियों से असंतुष्ट हैं।
मरीजों का फीडबैक लेने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एक नया सॉफ्टवेयर शुरू किया गया है। मरीज जैसे ही अस्पताल में इलाज के लिए पर्ची बनवाते समय अपने मोबाइन नम्बर बताता है, उसका नम्बर अपने आप उस सॉफ्टवेयर से जुड़ जाता है। पर्ची बनवाने के 24 घंटे के अंदर मरीज के पास फीडबैक के लिए फोन आता है।

यह कहते हैं आकड़ें

एक अप्रेल 2017 से 31 मार्च 2018 तक राजीव गांधी सामान्य अस्पताल, जनाना अस्पताल व गीतानंद शिशु अस्पताल में सात लाख 35 हजार 932 इलाज के लिए पहुंचे। इनमें से पांच लाख तीन हजार 704 मरीजों ने अपना मोबाइल नम्बर दर्ज कराया। केवल 15 हजार 424 मरीजों ने फोन पर बात की। इनमें से 71 प्रतिशत मरीजों ने कहा कि वो अस्पताल की सेवाओं से संतुष्ट हैं। जबकि 3 हजार 721 मरीजों ने कहा कि वो अस्पताल की सेवाओं से संतुष्ट नहीं हैं। 1657 मरीजों ने कहा कि वो कर्मचारियों के व्यवहार से संतुष्ट नहीं हैं। इसमें 743 ने डॉक्टरों के व्यवहार खराब होने, 353 ने नर्सिंग कर्मी व 180 मरीजों ने लैब कर्मियों का व्यवहार ठीक नहीं बताया। 570 मरीजों ने अस्पताल गंदा होने, 997 ने वेटिंग क्षेत्र के हालात खराब होने की बात कहीं।

लोगों को लेना चाहिए सर्वे में हिस्सा

मरीज व उनके परिजनों को इस सर्वे में हिस्सा लेना चाहिए। पर्ची बनवाते समय अपना मोबाइल नम्बर जरूरी बताए व स्वास्थ्य विभाग के फोन आने पर उसका जवाब दें। इस फीडबैक के आधार पर अस्पताल की सेवाओं में सुधार किया जाएगा।

किए जाएंगे सुधार

वैसे तो समय समय पर स्टाफ को मरीजों के साथ बेहतर व्यवहार करने सहित अन्य जरूरी जानकारी दी जाती है। लेकिन कई बार काम के तनाव के चलते थोड़ी परेशानी होती है। उसका सुधारने के भी प्रयास किए जाएंगे।
डॉ. भगवान सहाय, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, अलवर

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