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ऑनलाइन गेम बिगाड़ रहे बच्चों का मूड, शिक्षक दिलाएंगे मोबाइल स्क्रीन से छुटकारा

ऑनलाइन गेम का बच्चों पर खुमार चढ़ा हुआ है। इस गेम से होने वाली हानि से बच्चे अनभिज्ञ हैं, जिसकी वजह से कई बच्चे परिजनों के हजारों रुपए गंवा चुके हैं। इसे देखते हुए माध्यमिक शिक्षा राजस्थान ने ऑनलाइन गेमिंग के लिए नियमों को नोटिफाई कर दिया है।

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अलवर

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Umesh Sharma

Jun 08, 2024

अलवर।

ऑनलाइन गेम का बच्चों पर खुमार चढ़ा हुआ है। इस गेम से होने वाली हानि से बच्चे अनभिज्ञ हैं, जिसकी वजह से कई बच्चे परिजनों के हजारों रुपए गंवा चुके हैं। इसे देखते हुए माध्यमिक शिक्षा राजस्थान ने ऑनलाइन गेमिंग के लिए नियमों को नोटिफाई कर दिया है। स्कूल शिक्षा के सभी संयुक्त निदेशकों को भी आदेश जारी किए गए हैं। उन्हें कहा गया है कि वे विद्यालयों एवं अभिभावकों को बच्चों को इसके दुष्प्रभावों से बचाने के लिए सावधानी बरतने के लिए प्रोत्साहित करें।

आदेश में कहा गया है कि ऑनलाइन मोबाइल एप गेम लुभाने वाले होते हैं और रातोंरात करोड़पति बनाने के सपने भी दिखाते हैं। छात्र-छात्राएं लालच में आकर ऑनलाइन गेम्स का अधिक से अधिक उपयोग करते हैं और दांव पर लगाई गई राशि को गंवा बैठते हैं, जिसकी वजह से कई बार गलत कदम उठा लेते हैं।

संस्था प्रधान और शिक्षकाें का दायित्व

-स्कूल में मोबाइल का उपयोग केवल अध्ययन कार्य के लिए किया जाए
-संस्था प्रधान की ओर से प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को सचेत किया जाए
-छात्र-छात्राओं के व्यवहार में अचानक होने वाले बदलाव पर अध्यापक निगाहें रखें और माता-पिता को तुरंत जानकारी दें
-ऑनलाइन गेम खेलने वाले विद्यार्थियों पर विशेष नजर रखने के साथ ही सामूहिक एवं व्यक्तिगत काउंसलिंग भी की जाए
-साइबर कानून के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी
-स्कूलों में खेलकूद का नियमित रूप से आयोजन हो ताकि विद्यार्थी ऑनलाइन गेमों से दूरी बनाएं

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अभिभावकों का दायित्व

-अभिभावकों की ओर दिए जाने वाले गैजेट्स का बालक कहीं उल्लंघन तो नहीं कर रहा। इनके फोन, गैजेट्स में चाइल्ड लॉक लगाया जाए अन्यथा ऐसे एप को उपयोग किया जाए, जिससे प्रतिबंधित कार्यक्रम, साइट्स का उपयोग नहीं किया जाए
-विद्यार्थियों की मोबाइल की समय पर जांच करें
-विद्यार्थी के चिडचिड़ा, बात-बात पर उत्तेजित और मानसिक व्यवहार का परीक्षण करना चाहिए
-स्कूल में आना-जाना, लौटना, मित्रों से अनायास बातें कम करना, अध्ययन में रूचि नहीं लेना, नियमित दिनचर्या में बदलाव आदि लक्षण को परखें
-अगर ऐसे लक्षण दिखाई दें तो अभिभावक सचेत हो जाएं, स्कूल में सम्पर्क करें।