scriptWhy couldn't the Municipal Corporation build these roads | नगर निगम क्यों नहीं बना पाया ये सड़कें | Patrika News

नगर निगम क्यों नहीं बना पाया ये सड़कें

locationअलवरPublished: Dec 09, 2023 11:33:13 am

Submitted by:

susheel kumar

नगर निगम की ओर से करीब 5 माह पहले 16 वार्डों में सड़कें बनाने के लिए टेंडर किए गए थे लेकिन ये काम शुरू नहीं हो पाए। इसको लेकर पार्षदों में आक्रोश है। हालांकि नगर निगम का तर्क ये है कि विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई। इसके अलावा स्मॉग बढ़ने से ग्रेप की बाध्यता रही।

नगर निगम क्यों नहीं बना पाया ये सड़कें
नगर निगम क्यों नहीं बना पाया ये सड़कें
16 वार्डों में काम मंजूर हुए, पर सड़कें अब तक नहीं बन पाईं
- नगर निगम ने आचार संहिता से पहले किए थे टेंडर, ग्रेप के कारण भी रुका रहा काम
- पार्षदों के आरोप, एक ही ठेकेदार के पास कई सड़कों का काम, इसलिए भी देरी
नगर निगम की ओर से करीब 5 माह पहले 16 वार्डों में सड़कें बनाने के लिए टेंडर किए गए थे लेकिन ये काम शुरू नहीं हो पाए। इसको लेकर पार्षदों में आक्रोश है। हालांकि नगर निगम का तर्क ये है कि विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई। इसके अलावा स्मॉग बढ़ने से ग्रेप की बाध्यता रही।
चुनाव से पहले बनती सड़कें तो स्मॉग का स्तर नहीं बढ़ता
नगर निगम की ओर से वार्ड नंबर 4, 14 से 16 तक, 23, 27, 29, 32, 34, 35, 36, 38 के अलावा वार्ड 43, 48, 55 व 64 में सड़कें बनाने के लिए टेंडर किए गए थे। किसी कार्य की अवधि डेढ़ माह की थी तो किसी की दो माह की। यानी कम समय में ही ये सड़कें बनाई जानी थीं लेकिन काम अब तक अटका हुआ है। पार्षदों का कहना है कि काफी प्रयास के बाद सड़कों के प्रस्ताव पास करवाए गए थे। यदि ये चुनाव से पहले बनती तो जनता को फायदा होगा। टूटी सड़कों से उड़ने वाली धूल के कारण स्मॉग आदि में बढ़ोत्तरी नहीं होती।
एक ही ठेकेदार को काम देने से बचा जाए
एक पार्षद का कहना है कि एक ही ठेकेदार को कई सड़कों के ठेके मिले हैं। वह समय पर नहीं कर पाया। उस ठेकेदार की फर्म पर मार्च में भी कार्रवाई हुई थी लेकिन उसी ठेकेदार को आगे बढ़ाया जा रहा है। पार्षदों का कहना है कि नगर निगम को ऐसे ठेकेदारों को पूरी तरह काली सूची में डालना चाहिए। साथ ही फर्म बदलकर नए ठेके लेने की प्रथा में चलने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए। मालूम हो कि प्रदेश सरकार ने बजट घोषणा के तहत पीडब्ल्यूडी को जिन सड़कों का जिम्मा दिया था वह लगभग काम पूरे हो गए। उसी गति से ये काम हों तो जनता को अधिक लाभ मिले। परेशानियों से छुटकारा मिल सकेगा।

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