अमेठी में दर्जनों मुसलिम परिवार ने प्रधानमंत्री आवास योजना लेने से किया मना, ये है बड़ी वजह

अमेठी में दर्जनों मुसलिम परिवार ने प्रधानमंत्री आवास योजना लेने से किया मना, ये है बड़ी वजह

Mahendra Pratap Singh | Publish: Sep, 05 2018 06:48:56 PM (IST) | Updated: Sep, 05 2018 07:45:28 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

दर्जनों मुस्लिम परिवार ने जतायी इस बात से नाराजगी

अमेठी. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी के जायस नगर पालिका एरिये के दर्जनों मुस्लिम परिवार के लोगों ने प्रधानमंत्री आवास योजना लेने से इंकार कर दिया है। इन परिवार वालों ने प्रधानमंत्री को लेटर लिखकर योजना का फुल पेमेंट करने की डिमांड की है। दरअसल ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि पूर्व में शौचालय निर्माण के बाद इन परिवार के लाभार्थियों को साल बीतने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया। सैदाना के सभासद का कहना है कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि शौचालय निर्माण कराने वाले लाभार्थी मुसलमान हैं, इस कारण बीजेपी के नगर पालिका के चेयरमैन ने भुगतान नहीं होने दिया।

मलिक मोहम्मद जायसी की जन्मस्थली है जायस

अमेठी के जायस की सरजमी सूफी संत एवं विख्यात कवि मलिक मोहम्मद जायसी की जन्मस्थली है। यहां के कई वार्डों में हजारों की आबादी बस्ती है। मुख्य रूप से मुसलमान और सोनकर कास्ट के लोगों की पापुलेशन ज़्यादा है। करीब 70% मुसलमान आबादी में अधिकतर परिवार आज भी बदहाल हैं। हाल ही में केंद्र की शौचालय निर्माण योजना आई तो लोगों ने आवेदन किया और निर्माण शुरू कर दिया। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद साल बीत गया लेकिन भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू किया गया और पात्रों की पहली किस्त जारी हुई तो पहले के सभी भुक्तभोगियों ने पैसा लेने से इंकार कर दिया। भुक्तभोगियों ने किस्त की पूरी रकम दिए जाने के बाद आवास बनवाने की बात कही।

प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

इस बात की पड़ताल करते हुए जब लाभार्थी मोजिज मेंहदी से बात किया तो उन्होंंने कहा कि हम आवास लेना चाहते हैं। लेकिन 50 हजार रुपए हम उसमें लगाएंगे या बच्चों को भूखा मारेंगे। हमने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है कि या तो हमें डेढ़ लाख रुपए दिया जाएं या हमसे पूरा पैसा वापस ले लिया जाए। मोजिज मेहंदी ने बताया कि हमें 50 हजार रुपए मिला है, लेकिन उसको हम खर्च नहीं कर सकते हैं। अगर हम उसमें से 10 हजार रुपए भी खर्च कर देंगे तो हमारे बच्चे भूखे मर जाएंगे। वो कहते हैं कि हमें डेढ़ लाख रुपए मिल जाएं तो हम कल कमरा बनवा दें, बस पूरी किश्त एक साथ मिले। उन्होंंने ये भी बताया कि हमने साल भर पहले शौचालय बनवाया लेकिन आजतक उसका भुगतान नहीं हुआ। वहीं एक अन्य लाभार्थी खुशनुमा नकवी ने बताया कि हमारे पास कोई आमदनी नहीं है इसलिए हम आवास नहीं बना पा रहें हैं। हमारे यहां एक दीवार और एक कमरे की जरूरत है। अगर बन जाएगा तो ठीक है नहीं तो कोई बात नहीं है। हमें कोई उधार पैसे देगा भी नहीं और हम किससे उधार लेंगे? हम उधार से घबराते हैं, कर्जदार घर आकर घेरेंगे तो हम कैसे रुपए ले लें? वह कहती हैं कि हमारे पति ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और डीएम को पत्र लिखा है ताकि हमें पैसा एक साथ मिल जाए।

मुसलमान होने की वजह से नहीं करते भुगतान

वहीं सभासद सैयद सादिक मेंहदी से जब बात किया गया, तो उन्होंंने कहा कि ये बात तो फार्म में ही दर्ज है। 20% की पहली किस्त 50 हजार की मिलेगी, फाउंडेशन तैयार होने के बाद दूसरी किस्त डेढ़ लाख की मिलेगी। फिर स्लेप के लिए तीसरी किस्त का 50 हजार रूपए दिया जाना तय है। शौचालय निर्माण का आज तक भुगतान न होने के संदर्भ में उन्होंंने कहा कि साल भर हो गए हैं भुगतान नही हुआ। इसकी वजह ये है के लाभार्थी मुस्लिम हैं और चेयरमैन केवल सोनकर समाज का ही भुगतान करेगें।

समझाने के बाद भी एक मुश्त रकम मांग रहे लाभार्थी: चेयरमैन

इस बाबत जायस नगर पालिका के चेयरमैन महेश सोनकर ने कहा कि हमें जानकारी हुई तो हम लाभार्थी के घर गए उन्हें समझाया। लेकिन वो सभी एक मुश्त ढाई लाख रूपए मिलने के बाद ही निर्माण की बात कह रहे। जबकि हम इन लोगों के पास दो बार गए। शौचालय निर्माण में आज तक भुगतान नही होने की बात को उन्होंंने नकार दिया है।

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