Ahmedabad. डिजिटल अरेस्ट ठग गिरोह के फर्जी सीबीआइ, कस्टम व पुलिस अधिकारी उनके चंगुल में फंसने वाले व्यक्ति में इतना खौफ भर देते हैं कि असली पुलिस को भी व्यक्ति को उससे उबारने में घंटों लग जाते हैं। ऐसा ही एक मामला अहमदाबाद के कृष्णनगर थाना क्षेत्र में सामने आया है। जहां 31 वर्षीय विवाहिता […]
Ahmedabad. डिजिटल अरेस्ट ठग गिरोह के फर्जी सीबीआइ, कस्टम व पुलिस अधिकारी उनके चंगुल में फंसने वाले व्यक्ति में इतना खौफ भर देते हैं कि असली पुलिस को भी व्यक्ति को उससे उबारने में घंटों लग जाते हैं।
ऐसा ही एक मामला अहमदाबाद के कृष्णनगर थाना क्षेत्र में सामने आया है। जहां 31 वर्षीय विवाहिता (महिला) डिजिटल अरेस्ट गिरोह के चंगुल में फंसी थी। उनकी धमकी से इतनी घबरा और डर गई थी कि आत्महत्या करने की बात कर रही थी। असली पुलिस ने स्थिति को भांपते हुए महिला की घंटों काउंसिलिंग की और उसकी जान बचाई।
कृष्णनगर थाने के प्रभारी पुलिस निरीक्षक एस.ए.कोटडिया ने बताया कि यह घटना छह फरवरी को दोपहर करीब तीन बजे की होगी। एक 31 वर्षीय महिला बदहवास हालत में फोन लेकर कृष्णनगर पुलिस चौकी पहुंचती है। वहां मौजूद पीएसआइ एन.के.चारण से कहती है कि साहब यह मुझे परेशान कर रहा है। पैसे मांग रहा है। मेरे पास पैसे नहीं हैं। मेरी परिवार, समाज में बदनामी हो जाएगी। मुझे आत्महत्या करनी पड़ेगी। उस समय डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड गिरोह का फोन चालू था। पीएसआइ चारण फोन पर बातचीत करते हैं तो ठग को अहसास होता है कि असली पुलिस है। जिससे वह फोन काट देता है और फिर ना वीडियो कॉल और ना फोन उठाता है।
महिला इतनी घबराई होती है कि आत्महत्या करने की बात कहती रहती है। चारण ने प्रभारी पीआइ कोटडिया को फोन कर स्थिति से अवगत कराया। इस पर कोटडिया ने थाने की शी टीम पीएसआई एस.एम.ठाकोर और वुमन कांस्टेबल गीताबेन को चौकी पर भेजा जाता है। वह भी महिला को समझाते हैं, लेकिन वह इतनी घबराई होती है कि समझने को तैयार नहीं होती है।
ऐसे में टीम इस महिला को लेकर कृष्णनगर थाने पहुंचती है, जहां पीआई कोटडिया भी महिला को समझाते हैं। उसके पति को बुलाया जाता है। पति की उपस्थिति में उसे समझाया जाता है, डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड गिरोह कैसे ठगी करते हैं, उसकी विस्तार से जानकारी दी जाती है। वीडियो दिखाए जाते हैं। तब जाकर घंटे भर से ज्यादा की उनकी समझाइश के बाद वह शांत होती है। वह कह रही थी कि फिर से फोन आएगा, पैसों की मांग की जाएगी तो वह क्या करेगी। बदनामी होगी। पीआई ने समझाया कि कोई पुलिस फोन पर पैसे नहीं मांगती ना ही गिरफ्तार करती है। ऐसा कोई फोन वह रिसीव ना करें। कोटडिया बताते हैं कि उन्होंने देखा कि वाकई में यह गिरोह कितना खौफ व्यक्ति में भर देते हैं।
कोटडिया ने बताया कि महिला को 6 फरवरी को फोन आता है। सामने वाला व्यक्ति कहता है कि वह एयरपोर्ट से कस्टम डिपार्टमेंट से बोल रहा है। महिला का कोई मित्र विदेश से आया है। उसके पास काफी कैश मिला है। उसे पकड़ा है। उसने महिला का नाम दिया है। ऐसे में महिला को भी पकड़ना होगा। ऐसा कहते हुए वह धमकाता है और तीन लाख की मांग करता है। अलग-अलग नंबर से फोन आने लगते हैं। एक व्यक्ति सीबीआइ अधिकारी बनकर फोन करता है। फोन नंबरों की जानकारी जुटाने को महिला घर के पास के एक साइबर कैफे भी गई। वहां जानकारी जुटाने की स्थिति में साइबर कैफे संचालक को शंका हुई, जिससे उसने महिला को नजदीकी पुलिस चौकी में जाने को कहा। गनीमत रही कि महिला चौकी में गई और पुलिस ने सतर्कता दिखाते हुए कार्रवाई की, जिससे उसकी जान बच गई।