
पालनपुर. गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष शंकर चौधरी की अध्यक्षता में दांतीवाड़ा स्थित सरदार कृषिनगर दांतीवाड़ा कृषि यूनिवर्सिटी में ‘करंट एडवांसेस इन एनिमल इम्प्रूवमेंट’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी और एलुमनाई मीट का आयोजन किया गया।
कामधेनु विश्वविद्यालय के वेटरनरी कॉलेज के एनिमल जेनेटिक्स एंड ब्रीडिंग विभाग, वेट्स एलुमनाई एसोसिएशन सरदार कृषिनगर (वास) और बनास डेयरी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजन हुआ।
विधानसभा अध्यक्ष चौधरी ने कहा कि पशु चिकित्सा और कृषि विज्ञान का ज्ञान केवल पुस्तकों या अंग्रेजी भाषा तक सीमित नहीं रहना चाहिए। पशुपालन और पशु चिकित्सा विज्ञान का ज्ञान स्थानीय भाषा में पशुपालकों तक पहुंचाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि डेनमार्क, नीदरलैंड, इजराइल और चीन जैसे देशों ने अपनी मातृभाषा में विज्ञान का विकास कर उसे आम लोगों तक पहुंचाया है। भारत में भी पशु चिकित्सा विज्ञान की आधुनिक जानकारी स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराई जाए, तो पशुपालन के क्षेत्र में इसके परिणाम और अधिक प्रभावी हो सकते हैं।
पशुओं की संवेदनशीलता, गायों के आराम और देशी नस्लों के आनुवंशिक गुणों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए चौधरी ने ब्राजील यात्रा का एक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि दशकों पहले भारत से ब्राजील गईं कांकरेज नस्ल की गायें आज भी पारंपरिक ‘डचकारे’ की आवाज पहचानकर दौड़ी चली आती हैं। उनके अनुसार, यह देशी नस्लों के विशिष्ट गुणों और उनकी स्मरण क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि गायों को केवल दूध, फैट या मुनाफे के साधन के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि उनकी भावनाओं और मानसिक शांति का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पशुपालन से जुड़े वैज्ञानिक अनुसंधानों में पशुओं की संवेदनशीलता और आराम को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
बनास डेयरी के विस्तार और पशु चिकित्सा क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं पर चौधरी ने बताया कि डेयरी का कार्यक्षेत्र उत्तर प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, तेलंगाना और राजस्थान जैसे राज्यों तक फैल रहा है। उनके अनुसार, बनास डेयरी उत्तर प्रदेश के 27 हजार से अधिक गांवों तक पहुंच चुकी है, जहां भैंसों की आबादी 1.30 करोड़ से अधिक बताई गई है। उन्होंने कहा कि सहकारी व्यवस्था के माध्यम से दूरदराज के गांवों तक पशु स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए चालू वर्ष में 50 से अधिक नए पशु चिकित्सकों की आवश्यकता होगी। आने वाले समय में हर साल 100 से 200 नए वेटरनरी डॉक्टरों की जरूरत पड़ने की संभावना है।
चौधरी ने बताया कि बनास डेयरी जापान की ‘टोटल क्वालिटी मैनेजमेंट’ (टीक्यूएम) और ‘काइजन’ कार्यप्रणाली को भारतीय मानवीय मूल्यों के साथ जोड़कर अपनी कार्यसंस्कृति विकसित कर रही है।