अजमेर

आरक्षण ने बदली चुनावी बिसात, अब ‘वार्ड तलाश’ में जुटे दावेदार

Aug 19, 2026
Rajasthan

गंगापुरसिटी. नगरपरिषद के 60 वार्डों में आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही चुनावी तैयारियों में जुटे दावेदारों के समीकरण अचानक बदल गए हैं। जिस वार्ड को लेकर महीनों से तैयारी चल रही थी, आरक्षण बदलते ही कई उम्मीदवारों को अब नए वार्ड की तलाश करनी पड़ रही है। वहीं जिन वार्डों पर दावेदारों की नजर है, वहां पहले से ही पार्टी के पदाधिकारी, पूर्व पार्षद और नए चेहरे तैयारी में जुटे हैं। ऐसे में टिकट की दौड़ के साथ-साथ पार्टियों के सामने भीतरघात और विरोध के स्वर उभरने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।
आरक्षण की घोषणा के बाद सबसे ज्यादा हलचल उन वार्डों में दिखाई दे रही है, जो सामान्य या अन्य श्रेणी से बदलकर महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो गए हैं। कई बड़े पदाधिकारी और पूर्व पार्षद ऐसे वार्डों से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अब उनके सामने पत्नी या परिवार के किसी सदस्य को मैदान में उतारने का विकल्प ही बचा है। कुछ दावेदार पार्टी के निर्देश पर दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। इसी प्रकार निवर्तमान उप सभापति वीरेन्द्र शर्मा का वार्ड भी ओबीसी हो गया है।
भाजपा में भी आरक्षण के बाद नए सिरे से रणनीति बनाने की कवायद शुरू हो गई है। निवर्तमान सभापति शिवरतन अग्रवाल का वर्तमान वार्ड 21 अनारक्षित है, लेकिन पार्टी स्तर पर उन्हें किसी दूसरे वार्ड से चुनाव मैदान में उतारने पर भी विचार किया जा रहा है। ऐसे में सभापति की दावेदारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं वार्ड 54 से पार्षद रहीं सीता देवी का वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित होने से उनके सामने भी चुनावी राह मुश्किल हो गई है। इसी तरह भाजपा जिला उपाध्यक्ष दीपक सिंघल का वार्ड अनारक्षित महिला होने से उनके चुनावी समीकरण बदल गए हैं। अब उनके सामने पत्नी को चुनाव लड़ाने अथवा पार्टी के निर्देश पर किसी अन्य वार्ड से मैदान में उतरने के विकल्प पर मंथन चल रहा है।
एक वार्ड, कई दावेदार...टिकट की राह आसान नहीं
सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक दलों के सामने उन वार्डों को लेकर है, जहां आरक्षण के बाद अचानक दावेदारों की संख्या बढ़ गई है। एक ही वार्ड में पूर्व पार्षद, पार्टी पदाधिकारी और नए चेहरे टिकट की दौड़ में हैं। ऐसे में जिसे टिकट नहीं मिलेगा, उसके नाराज होकर निर्दलीय मैदान में उतरने या भीतर से विरोध करने की आशंका भी जताई जा रही है।
अब पार्टियों के सामने केवल जिताऊ उम्मीदवार तलाशने की चुनौती नहीं है, बल्कि टिकट वितरण के बाद असंतोष को संभालना भी बड़ी परीक्षा होगी। आरक्षण ने कई दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है तो कई नए चेहरों के लिए राजनीतिक मैदान खोल दिया है। आने वाले दिनों में वार्ड बदलने से लेकर टिकट के लिए जोड़-तोड़ तक सियासी हलचल और तेज होने के आसार हैं।

Updated on:
19 Aug 2026 06:00 am
Published on:
19 Aug 2026 06:00 am