सीएम शिवराज ने की 5115 की घोषणाएं, इनमें से सिर्फ 1838 हो पाईं पूरी, कमलनाथ के क्षेत्र में ज्यादा घोषणा, सिंधिया, अजय, अरुण के यहां कम
भोपाल@रिपोर्ट - आलोक पण्ड्या.
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पिछले पांच साल की घोषणाओं में सियासी जमावट नजर आती है। उन्होंने 5115 घोषणाएं की। इनमें से 1838 पूरी हुईं। उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के क्षेत्र में मुट्ठी भींचकर काम चलाया। सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के जिले गुना में चार घोषणा की। पूरी एक भी नहीं की। फिर उपचुनाव आने के कारण शिवपुरी में 77 और अशोकनगर में 68 घोषणाएं की गईं।
अरुण यादव के गृह जिले खरगौन में महज नौ घोषणा की। अजय सिंह के जिले सीधी में 27 घोषणाएं की। मुकेश नायक के जिले पन्ना में 19 घोषणाएं की गईं। कांगे्रस अध्यक्ष कमलनाथ के जिले छिंदवाड़ा में 139 घोषणाएं की और 81 फीसदी पूरी होने को हैं। मुख्यमंत्री ने अपने गृह जिले सीहोर में 585 घोषणा की, इनमें से 133 पूरी की हैं।
उपचुनाव में खुला पिटारा
पांच साल में 16 जिलों में उपचुनाव हुए हैं। इनमें मुख्यमंत्री ने 1866 घोषणाएं की, जो पूरे प्रदेश में की गई घोषणाओं की 37 प्रतिशत हैं। मंदसौर में गरोठ उपचुनाव और गोलीकांड का असर था तो वहां 58 घोषणा की, लेकिन उससे सटे नीमच जिले में सिर्फ तीन घोषणा की। इसमें से भी एक ही पूरी हो पाई है। इसी तरह सतना में दो उपचुनाव पड़े तो सीएम ने 223 घोषणाएं की, लेकिन विंध्य के दूसरे जिले रीवा में 74 और सीधी में 27 घोषणा की।
इछावर में एक भी नहीं
शिवराज ने अपने गृह जिले सीहोर की इछावर विधानसभा में एक भी घोषणा नहीं की। यहां के कांग्रेस विधायक शैलेंद्र पटेल कहते हैं कि मुख्यमंत्री पांच साल में एक भी बार इछावर नहीं आए। सिवनी जिले की चार में से सिर्फ एक सीट भाजपा के खाते में आई थी। दो पर कांगे्रस और एक पर निर्दलीय जीते थे। इस जिले में सीएम ने सात घोषणा की। हरदा जिले में 13 घोषणा की, लेकिन कांग्रेस के रामकिशोर दोगने के क्षेत्र में एक भी नहीं थी।
मुख्यमंत्री को अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करना चाहिए था। सरकार में रहते हुए तेरा-मेरा नहीं करना चाहिए, लेकिन शिवराज ने अपने पूरे कार्यकाल में यही किया है। - अजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष
विधानसभा उपचुनाव
सीट - घोषणाएं - पूरी
विदिशा - 203 - 146
विजयराघवगढ़ - 205 - 55
एवं बहोरीबंद
आगर - 24 - 05
गरोठ - 58 - 12
देवास - 55 - 22
मैहर एवं चित्रकूट - 223 - 66
घोड़ाडोंगरी - 88 - 27
नेपानगर - 40 - 15
अटेर - 36 - 05
कोलारस - 77 - 15
मुंगावली - 68 - 07
(नोट: भाजपा चित्रकूट, अटेर, कोलारस और मुंगावली में हारी थी।)
प्रदेश के विकास कार्य में भेदभाव नहीं होना चाहिए, लेकिन मुख्यमंत्री यह करते रहे हैं। वे घोषणावीर हैं। अधिकांश घोषणाएं कागजों पर ही रहीं।
- अरुण यादव, पूर्व केन्द्रीय मंत्री
कांग्रेस नेता सीएम से अपनी मांगों को लेकर मिलने से परहेज करते हैं, इसलिए उपेक्षा होती है। सीएम ने भेदभाव नहीं किया।
- डॉ. नरोत्तम मिश्रा, प्रवक्ता, मप्र शासन