धर्म-कर्म

पैसों की दिक्कत दूर कर सकता है श्रेष्ठ मुहुर्त, रात को छोटी सी पूजा से प्रसन्न हो सकती हैं मां लक्ष्मी

Sawan Purnima : पूर्णिमा का दिन धन लाभ के लिए श्रेष्ठ मुहुर्त, विधि विधान से पूजन से माता लक्ष्मी होती हैं प्रसन्न
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Aug 24, 2026
पूर्णिमा पर पूजन से लक्ष्मी होती हैं प्रसन्न
पूर्णिमा पर पूजन से लक्ष्मी होती हैं प्रसन्न : फोटो सोर्स : AI@Grok

Purnima : सावन माह समाप्ति की ओर है। 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा है। कुछ पंचांगों में 27 अगस्त को भी सावन पूर्णिमा तिथि दर्शाई गई है। पूर्णिमा का दिन धन की देवी लक्ष्मी की पूजा करने के लिए श्रेष्ठ मुहुर्त माना जाता है। इस दिन विधि विधान से पूजन से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं जिससे धन संबंधी सभी दिक्कतें दूर होने लगती हैं। ज्योतिर्विद पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि पूर्णिमा तिथि की रात को कौडिय़ां, गोमती चक्र और शंख की पूजा करें और लक्ष्मी मंदिर में जाकर माथा टेकें। इससे धन संपत्ति में वृद्धि होने लगती है।

पूर्णिमा के दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व उठें। पानी में गंगाजल या नर्मदाजल मिलाकर स्नान करें, फिर सूर्य को जल चढ़ाएं। घर के पूजास्थल पर आसन पर बैठकर दीप प्रज्वलित करें और संकल्प लेकर विधि-विधान से लक्ष्मी माता की पूजा करें। इससे भाग्य खुल जाता है तथा आय संबंधी कामों में आ रही परेशानियां खत्म हो सकती हैं।

श्रीसूक्त और पुरुषसूक्त का पाठ करें

ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण बुचके के अनुसार जिस किसी को भी धन की दिक्कत हमेशा बनी रहती है उसके लिए सावन पूर्णिमा का दिन बड़ा अहम है। ऐसे लोग पूर्णिमा पर लक्ष्मीनारायण की पूजा करें। देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की यह पूजा रात में करें। इसके साथ ही श्रीसूक्त और पुरुषसूक्त का पाठ करें। संभव हो तो सत्यनारायण भगवान की कथा का पाठ करें।

पूर्णिमा पर लक्ष्मीजी को गुलाब का फूल चढ़ाएं, गुलाब का इत्र भी लगाएं

सावन पूर्णिमा पर लक्ष्मीजी को गुलाब का फूल चढ़ाएं, गुलाब का इत्र भी लगाएं। कौडिय़ां, गोमती चक्र और शंख की भी पूजा करें। पूजा संपन्न होने पर इन तीनों चीजों को एक साथ नए लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रख दें। पूर्णिमा की रात में मंदिर जाकर माता लक्ष्मी का दर्शन करें। उनसे धन की दिक्कत दूर करने की प्रार्थना करें।

सावन पूर्णिमा पर रक्षाबंधन

सावन पूर्णिमा पर भाई बहन के स्नेह का पर्व रक्षाबंधन भी मनाया जाता है। सनातन धर्म में इसे बहुत ही पवित्र और प्रमुख त्योहार माना जाता है। श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि के दिन बहनें अपनी भाई को तिलक लगाती हैं और उनकी आरती उतारती हैं। इसके बाद भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती है। प्राय: रेशम से बनी राखी बांधी जाती है जो भाई-बहन के अटूट स्नेह, विश्वास और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। भाई अपनी बहन के पैर छूकर उससे आशीर्वाद लेता है और रक्षा करने का वचन देता है।

Updated on:
24 Aug 2026 02:00 pm
Published on:
24 Aug 2026 01:58 pm