हुबली

सुरेश अग्रवाल : चार पीढ़ियों से कर्नाटक से जुड़ा रिश्ता, डीडवाना से हुब्बल्ली तक सेवा और कारोबार का सफर

राजस्थान के डीडवाना से निकले सुरेश अग्रवाल के परिवार का कर्नाटक से रिश्ता करीब 140 साल पुराना है। उनके दादा सवाई राम राजस्थान से कर्नाटक के विजयपुर जिले के तालिकोटि पहुंचे और यहां किराणे का कारोबार शुरू किया। इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए सुरेश अग्रवाल वर्ष 1990-91 में हुब्बल्ली आए। खाद, बीज और कीटनाशक के कारोबार से शुरुआत करने वाले अग्रवाल आज थोक व्यापार के साथ सरकारी आपूर्ति के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। कारोबार के साथ समाजसेवा, धार्मिक गतिविधियों और सामाजिक संस्थाओं में उनकी सक्रिय भागीदारी ने उन्हें अलग पहचान दी है।
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राजस्थान के डीडवाना से कर्नाटक के हुब्बल्ली तक कारोबार और समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय सुरेश अग्रवाल।
राजस्थान के डीडवाना से कर्नाटक के हुब्बल्ली तक कारोबार और समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय सुरेश अग्रवाल।

140 साल पहले तालिकोटि पहुंचा परिवार

सुरेश अग्रवाल के दादा सवाई राम करीब 140 वर्ष पहले राजस्थान से विजयपुर जिले के तालिकोटि पहुंचे थे। यहां उन्होंने किराणे का व्यापार शुरू किया। परिवार धीरे-धीरे कर्नाटक के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ता गया। सवाई राम का वर्ष 1973 में करीब 93 वर्ष की उम्र में निधन हुआ। उनके चार भाइयों में से दो बाद में बसवनबागेवाड़ी चले गए। इसके बाद सुरेश अग्रवाल के पिता पन्नालाल ने पारिवारिक किराणे के कारोबार को आगे बढ़ाया। वर्ष 1990-91 में सुरेश अग्रवाल हुब्बल्ली आए। यहां उन्होंने खाद, बीज और कीटनाशक का कारोबार शुरू किया। समय के साथ कारोबार का विस्तार हुआ और वर्तमान में वे मुख्य रूप से थोक व्यापार तथा सरकारी आपूर्ति से जुड़े हैं। कृषि विभाग सहित विभिन्न सरकारी कार्यालयों में उनकी फर्म की आपूर्ति होती है।

कारोबार के साथ संस्थाओं में भी सक्रिय भूमिका

व्यापार के साथ सामाजिक और व्यावसायिक संस्थाओं में नेतृत्व की जिम्मेदारी निभाना भी उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है। वे हुब्बल्ली-धारवाड़ फर्टिलाइजर एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष रहे। उनके कार्यकाल में कारगिल युद्ध के दौरान सहायता कार्यों में भी संस्था की ओर से योगदान दिया गया। तालिकोटि से जुड़ाव भी लगातार बना हुआ है। वे लायंस क्लब ऑफ तालिकोटि के संस्थापक अध्यक्ष और तालिकोटि किराणा मर्चेन्ट्स एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष रहे हैं। हुब्बल्ली में महाराजा अग्रसेन को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी के संस्थापक उपाध्यक्ष रहे। वर्ष 2015 से 2018 तक उन्होंने सोसायटी के अध्यक्ष का दायित्व संभाला। वर्तमान में वे इसके निदेशक हैं। यह संस्था वर्ष 2010 में स्थापित हुई थी।

जन्मभूमि से जुड़ाव, कुलदेवी मंदिर का कराया जीर्णोद्धार

हुब्बल्ली को कर्मभूमि बनाने के बावजूद सुरेश अग्रवाल का अपनी जन्मभूमि डीडवाना से रिश्ता लगातार कायम है। वे हर वर्ष अपने गांव जाते हैं और वहां के सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों में भाग लेते हैं। उन्होंने डीडवाना स्थित परिवार की कुलदेवी मल्लावतों की सती मंदिर (शक्ति दादी मंदिर) के जीर्णोद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2010 में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया। मंदिर में चांदी की प्रतिमा स्थापित है। हर वर्ष भाद्रपद की चतुर्दशी को यहां विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होता है। सुरेश अग्रवाल श्री मल्लावत (शक्ति दादी मंदिर) न्यास के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी हैं।

सनातन सेवा को बनाया सामाजिक सरोकार

हुब्बल्ली में धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सुरेश अग्रवाल सनातन सेवा संगठन चैरिटेबल ट्रस्ट, हुब्बल्ली के अध्यक्ष के रूप में सक्रिय हैं। पिछले करीब डेढ़ वर्ष से संगठन सनातन परंपराओं, धार्मिक आयोजनों और सामाजिक गतिविधियों के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। परिवार की ओर से भी धार्मिक आयोजनों और सेवा कार्यों में योगदान दिया जाता रहा है। पिछले वर्ष दिसंबर में परिवार की ओर से श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कराया गया था। इसमें कथावाचक आशीष व्यास ने कथा वाचन किया। तालिकोटि में भी परिवार समय-समय पर विभिन्न सेवा कार्यों में सहयोग करता रहा है।

सम्मान मिले, लेकिन सेवा का सिलसिला जारी

समाजसेवा और संस्थागत गतिविधियों में योगदान के लिए सुरेश अग्रवाल को विभिन्न सामाजिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें सहकार रत्न से भी नवाजा गया है। बेंगलूरु सहित विभिन्न स्थानों पर भी उनके सामाजिक योगदान का सम्मान हुआ है।

Updated on:
07 Oct 2026 07:46 pm
Published on:
07 Oct 2026 05:30 pm