
राजस्थान की राजनीति के पुरोधा और जन-जन के चहेते 'बाबोसा' के रूप में ख्याति प्राप्त करने वाले प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत की 23 अक्टूबर 2026 को 103वीं जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर उन्हें पूरे प्रदेश में आदर के साथ याद किया जा रहा है। उनकी जयंती के पावन मौके पर उनके दोहिते अभिमन्यु सिंह राजवी ने सोशल मीडिया पर एक बहुत ही भावुक और दिलचस्प संस्मरण साझा किया है। उन्होंने अपने 'नानोसा' के साथ बिताए बचपन के दिनों की एक मजेदार घटना का जिक्र किया है। इस पोस्ट में उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने और उनके भाई-बहनों ने मुख्यमंत्री आवास के भीतर यानी सीधे नानोसा के बेडरूम में ही 'धरना' प्रदर्शन शुरू कर दिया था और उनकी मांग सिर्फ एक फ्रूटी हुआ करती थी।
अभिमन्यु सिंह राजवी द्वारा शेयर किए गए इस संस्मरण में राजस्थान की पुरानी राजनीतिक हलचलों, सिविल लाइन्स स्थित मुख्यमंत्री आवास के माहौल और भैरों सिंह शेखावत के एक सख्त राजनेता के साथ-साथ एक बेहद संवेदनशील और स्नेही नाना होने के रूप को बहुत ही खूबसूरती से दर्शाया गया है।
अपनी सोशल मीडिया पोस्ट की शुरुआत करते हुए अभिमन्यु सिंह राजवी ने लिखा कि उनका बचपन मुख्यमंत्री निवास में ही बीता था। उस दौर के हालात का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जब वे बहुत छोटे थे, तब राजेंद्र मिर्धा अपहरणकांड और उसके बाद जयपुर में आतंकवादियों के एनकाउंटर जैसी घटनाओं के चलते सुरक्षा कारणों से उनका अधिकांश बचपन सुरक्षा गार्ड्स और आरएसी के कमांडोज के घेरे में घर के भीतर ही बीता था।
सिविल लाइन्स स्थित आठ नंबर बंगला ही उस समय उनकी पूरी दुनिया हुआ करती थी। सुरक्षाकर्मी और सीएमओ का स्टाफ ही उनके दोस्त थे। उन्हीं के साथ क्रिकेट खेलना और सीएम हाउस में यहां-वहां घूमना उनकी दिनचर्या थी। उस दौरान उन्हें सबसे ज्यादा मजा तब आता था जब सीएम हाउस के बाहर कोई धरना-प्रदर्शन होता था। वे संतरी की चौकी में जाते और कोई उन्हें गोद में उठा लेता ताकि वे बाहर चल रही नारेबाजी और प्रदर्शन को साफ-साफ देख सकें।
अपने संस्मरण को आगे बढ़ाते हुए अभिमन्यु सिंह राजवी ने एक बेहद मजेदार किस्सा साझा किया। उन्होंने लिखा कि उस समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता- परसराम मदेरणा, नवल किशोर शर्मा, शिवचरण माथुर और युवा अध्यक्ष के रूप में अशोक गहलोत अक्सर सीएम हाउस के बाहर धरने पर बैठते या नारेबाजी करते थे। नानोसा की परछाईं की तरह रहने वाले सुरक्षा अधिकारी भोपाल सिंह उन्हें अक्सर वह सब दिखाने ले जाते थे।
बच्चों ने जब पूछा कि ये लोग यहां क्यों चिल्ला रहे हैं और 'मांगे पूरी करो' के नारे क्यों लगा रहे हैं, तो भोपाल जी ने मजाक में कह दिया, "आने साहब हुकुम सूं कोई चीज चावे है, इन वास्ते हाका कर रिया है।" इसका मतलब यह था कि अगर 'नानोसा' से कुछ चाहिए, तो ऐसी ही नारेबाजी करनी पड़ेगी। बस फिर क्या था, किसी के द्वारा दिए गए इस 'ज्ञान' को मानकर वे सीधे नानोसा के बेडरूम में जाकर बैठ गए।
कुछ देर बाद जब दिनभर की राजनीतिक व्यस्तता और अथक मेहनत के बाद मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत अपने बेडरूम में आए, तो बच्चों को वहां नारे लगाते देख वे जोर से हंस पड़े और बोले, "आज आ काईं शैतानी कर रिया हो?" बच्चों ने तपाक से जवाब दिया, "हमे पता है, आपसे जो चाहिए वो ऐसे करने पर ही मिलेगा।"
यह देखकर भैरों सिंह शेखावत ने नानीसा और मामा को बुलाया और हंसते हुए कहा, "देखो भाई, बाहर वाला धरना तो मैं उठवा दूंगा, पर ओ धरनों तो थे ही उठवाओ।"
नानीसा ने हमेशा की तरह बच्चों का पक्ष लेते हुए कहा, "सगळ्यां कीं मांगा मानो हो, तो आंकी भी मानो।" इस पर नानोसा ने बच्चों की तरफ देखकर पूछा, "बताइए, क्या मांगें हैं आपकी? कोई ज्ञापन लाए हो?"
बच्चों को ज्ञापन या बड़ी मांगों का तो क्या पता था, वे समझ नहीं पाए और सिर्फ नानोसा को देखकर हंसने लगे। तभी मां ने बीच में आकर कहा, "पापा, इन्हें एक-एक फ्रूटी दे दो, इनकी तो इतनी सी ही मांगें हैं।" उस समय के बच्चों के लिए फ्रूटी से बढ़कर कुछ नहीं था। तुरंत फ्रूटी मंगवाई गई और जैसे ही तीनों के हाथ में फ्रूटी आई, सीएम हाउस के बेडरूम का वह 'धरना' तुरंत समाप्त हो गया।
अभिमन्यु सिंह राजवी ने आगे लिखा कि कुछ दिनों बाद जब फिर से फ्रूटी पीने का मन होता, तो सीएम साहब के बेडरूम में दोबारा धरना शुरू हो जाता था। एक बार जब बाहर सचमुच कांग्रेस नेताओं ने धरना देकर अपनी गिरफ्तारी दी, तो अगले दिन अखबार में गिरफ्तार होते नेताओं की फोटो छपी। वह अखबार की कॉपी मां को देते हुए नानोसा ने हंसते हुए कहा था, "टाबरा ने दिखा दीजिए, बार-बार धरणों देवे तो जेल भी जानो पड़े...।" लेकिन बच्चों का धरना एक-एक फ्रूटी के लिए फिर भी जारी रहता था।
करोड़ों राजस्थानवासियों के दिलों में 'बाबोसा' के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले और व्यस्तताओं के बावजूद अपने परिवार और बच्चों के लिए हर दिन कुछ पल जरूर निकाल लेने वाले भैरों सिंह शेखावत की इस याद को पढ़कर आज भी लोग उनके सरल और आत्मीय स्वभाव को याद कर रहे हैं।