
पिछले 12 वर्षों में पहले वसुंधरा सरकार, फिर गहलोत और अब भजनलाल सरकार... राज्य में सरकारें तो बदलीं, लेकिन वित्तीय अनुशासन लगातार बेपटरी है। सरकारों ने घाटे को लगातार तय सीमा के भीतर बनाए रखने के लिए लक्ष्य तय कर उन्हें हासिल करने के प्रयासों के दावे तो किए, लेकिन हकीकत इसके विपरीत ही रही। 12 वर्षों में एक भी साल ऐसा नहीं रहा, जब राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमा के भीतर सिमटा हो। केंद्रीय वित्त आयोग ने भी जो लक्ष्य तय किए, राज्य का घाटा बजट अनुमान और वास्तविक स्थिति दोनों ही मामलों में उससे ऊपर रहा।
नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की ताजा रिपोर्ट में स्थिति पर चिंता जाहिर करते खुलासा किया है कि वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2024-25 तक एक वर्ष ही ऐसा रहा, जब राजकोषीय घाटा 3.04 प्रतिशत रहा। एक वर्ष तो यह उछलकर 9 प्रतिशत के पार तक जा पहुंचा। उसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं आ रहा। सीएजी ने इस स्थिति को लेकर राजकोषीय अनुशासन के संबंध में सरकार की नीतियों और दावों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सीएजी-सरकार के आंकड़े: घाटा लगातार लक्ष्य से ज्यादा रहा, 12 साल पहले पहुंचा 9.25% के रिकॉर्ड स्तर पर
राजस्व अधिशेष बनाए रखने का लक्ष्य था, लेकिन राजकोषीय लक्ष्य प्राप्त नहीं होने से राजस्व घाटा बना रहा। राजस्व व्यय पूरा करने के लिए लगातार उधारी पर निर्भरता रही। पिछले वर्षों में राजकोषीय घाटा 3.04 से 9.25 प्रतिशत के बीच रहा।
राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंध (संशोधन) अधिनियम, 2011 में तय किया कि राजस्व घाटा शून्य पर लाकर राजस्व अधिशेष की स्थिति लाई जाएगी। राजकोषीय घाटा वर्ष 2011-12 तक सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 3% या उससे नीचे लाने का निर्णय किया गया। इसके बाद राज्य में केवल वर्ष 2011-12 व 2012-13 में राजस्व अधिशेष रहा। उसके बाद लगातार घाटे की स्थिति रही।
| वर्ष | राजकोषीय घाटा |
|---|---|
| ■ 2015-16 | 9.25 |
| ■ 2016-17 | 6.09 |
| ■ 2017-18 | 3.04 |
| ■ 2018-19 | 3.78 |
| ■ 2019-20 | 3.77 |
| ■ 2020-21 | 5.83 |
| ■ 2021-22 | 4.03 |
| ■ 2022-23 | 3.76 |
| ■ 2023-24 | 4.31 |
| ■ 2024-25 | 4.25 |
| ■ 2025-26 | 3.89 (संशोधित अनुमान) |
| ■ 2026-27 | 3.69 (बजट अनुमान) |
(राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंध रिपोर्ट के अनुसार)