
नवदुर्गा माता विसर्जन जुलूस के दौरान 21 अक्टूबर रात 10.30 बजे से रात 2 बजे तक निर्धारित मानकों से अधिक क्षमता वाले पावरफुल स्पीकर साउंड सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। पुलिस के अनुसार, डीजे संचालक निक्की चोलकर निवासी धूले, महाराष्ट्र और कान्हा राजपूत निवासी नेकपूर जिला धार ने मानक क्षमता यानी दो बक्सों से अधिक बड़े-बड़े स्पीकर लगाकर तेज आवाज में संगीत बजाया। इस मामले में शुक्रवार को कोतवाली थाने में धारा 163, कोलाहल नियंत्रण अधिनियम की धारा 7/15 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 223(ए) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।
तेज आवाज से सेहत पर पड़ सकता है असर
तेज डीजे की आवाज केवल असुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हो सकती है। सीएमएचओ डॉ. ओपी जुगतावत ने बताया कि लगातार तेज ध्वनि से सुनने की क्षमता प्रभावित होने, सिरदर्द, तनाव, नींद में बाधा और रक्तचाप बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बुजुर्गों, छोटे बच्चों, बीमार लोगों और ध्वनि के प्रति संवेदनशील व्यक्तियों को इससे अधिक परेशानी होती है। अस्पतालों और रिहायशी क्षेत्रों में तेज आवाज का असर और गंभीर हो सकता है।
तेज डीजे के विरोध में आगे आए लोग
तेज आवाज में डीजे बजने पर नागरिक भी विरोध में आगे आए हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने पोस्ट कर डीजे पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग की है।लोगों का कहना है कि धार्मिक उत्सवों की गरिमा होती है। उसके अनुरूप ही त्योहार मनाए जाए। समाजसेवी सुनील जैन का कहना है कि डीजे की तेज आवास से ध्वनि प्रदूषण से बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर गहरा असर होता है। इस पर रोक लगनी चाहिए।
संगठन और जनप्रतिनिधि भी पहल करें
धार्मिक आयोजन समितियों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों को भी तेज डीजे के खिलाफ आगे आना होगा। जुलूसों में सीमित ध्वनि वाले साउंड सिस्टम, निर्धारित समय और प्रशासनिक नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए समितियां स्वयं आचार संहिता बनाएं। जनप्रतिनिधि जागरूकता अभियान चलाकर आयोजकों को प्रेरित कर सकते हैं कि उत्सव की पहचान तेज आवाज नहीं, बल्कि श्रद्धा, अनुशासन और सामाजिक सद्भाव हो।
- ध्वनि प्रदूषण करने पर दो डीजे संचालकों पर कार्रवाई की है। अभी ओर भी डीजे चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी। लोगों से अपील की है कि त्योहारों के दौरान शासन के निर्देशों का पालन करें और तेज आवाज में डीजे नहीं बजाएं। - अगम जैन, पुलिस अधीक्षक।