
Uttar Pradesh Politics: उत्तर प्रदेश में संविधान, आपातकाल और विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। अयोध्या में यूपी सरकार के मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि संविधान का सबसे ज्यादा उल्लंघन करने वाले यही लोग हैं। उन्होंने साल 1975 में इंदिरा गांधी की ओर से लगाए गए आपातकाल का जिक्र किया और आरोप लगाया कि उस दौरान प्रदर्शनकारियों को जेल में डाला गया था। वहीं, बीजेपी प्रवक्ता आरपी सिंह ने सपा के चुनावी वादों पर सवाल उठाए।
अयोध्या में मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि संविधान को सबसे ज्यादा तोड़ने वाले संविधान को सबसे ज्यादा समाप्त करने वाले यही लोग हैं। भूपेंद्र चौधरी ने आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि ये वे लोग हैं जिन्होंने संविधान का सबसे अधिक उल्लंघन और हनन किया है। साल 1975 में, इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाकर संविधान को कमजोर करने का प्रयास किया था। उस समय लोगों ने इसकी रक्षा के लिए संघर्ष किया था। कांग्रेस ने उस दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को जेल में डाल दिया था।
भूपेंद्र चौधरी ने उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में 11 विधान परिषद की सीटों पर चुनाव होने हैं। सभी शिक्षक और हमारे स्नातक भाई-बहन मतदान के द्वारा अपने प्रतिनिधि चुनेंगे। भारतीय जनता पार्टी ने सभी 11 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। मुझे विश्वास है कि हमारी सरकार ने पिछले दस सालों में शिक्षा जगत के लिए जो काम किए हैं उसके आधार पर मैं निश्चित कह सकता हूं कि भारतीय जनता पार्टी सभी सीटें जीतेगी। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में सरकार के कामकाज को बीजेपी की जीत की उम्मीद का आधार बताया।
दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने अखिलेश यादव की ओर से साल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए घोषणापत्र जारी किए जाने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता पार्टी के पिछले वादे देख चुकी है और राज्य में कथित गुंडा राज और माफिया राज की गवाह रही है। उत्तर प्रदेश की जनता ऐसे वादे या गुंडों और माफियाओं द्वारा चलाई जाने वाली सरकार नहीं चाहती।
अयोध्या में समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने पार्टी के घोषणापत्र को लेकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि हमारे लिए चुनाव घोषणापत्र एक पवित्र दस्तावेज के समान है। हम इसे उसी श्रद्धा और सम्मान के साथ देखते हैं, जिस श्रद्धा से हम धार्मिक ग्रंथों का सम्मान करते हैं, उनके सामने नतमस्तक होते हैं और अपने आचरण में उनकी शिक्षाओं का पालन करते हैं। हम इसी विश्वास के साथ काम करते हैं और चुनाव से पहले जो भी वादे करते हैं, सरकार बनने के बाद अगले पांच सालों में हर हाल में उन वादों को पूरा करते हैं। हमारे लिए घोषणापत्र एक पवित्र दस्तावेज है।