
Lucknow Buffalo Auction:लखनऊ में अवैध डेयरियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई अब राजनीतिक विवाद में बदलती नजर आ रही है। पारा इलाके से पकड़ी गईं 243 भैंसों की प्रस्तावित नीलामी के विरोध में सोमवार को समाजवादी पार्टी और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने नगर निगम मुख्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। नीलामी रोकने की मांग को लेकर जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने अधिकारियों के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
प्रदर्शन के दौरान नगर निगम परिसर में काफी देर तक नारेबाजी होती रही। सपा विधायक अरमान खान, पार्षद सैयद यावर हुसैन रेशू, शफीकुर रहमान चचा समेत कई जनप्रतिनिधि नीलामी स्थल तक पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से बातचीत कर प्रक्रिया रोकने की मांग की। विधायक की ओर से नीलामी स्थगित करने के लिए लिखित पत्र भी सौंपा गया।
सपा और आजाद समाज पार्टी के नेताओं का कहना था कि इन पशुओं पर कई परिवारों की रोजी-रोटी निर्भर है। ऐसे में भैंसों की नीलामी से पहले पशुपालकों की स्थिति और उनकी समस्याओं को सुना जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मानवीय आधार पर समाधान निकालने की मांग की। उनका आरोप था कि नगर निगम की कार्रवाई में प्रभावित पशुपालकों को अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त मौका नहीं मिला। इसी वजह से नीलामी का विरोध किया जा रहा है।
नगर निगम मुख्यालय के बाहर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जमा हो गए और मेयर तथा नगर आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के चलते कुछ समय के लिए नीलामी प्रक्रिया रोकनी पड़ी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पहले पशुपालकों और प्रशासन के बीच बातचीत होनी चाहिए, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए। हालांकि नगर निगम की ओर से अवैध डेयरियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की पृष्ठभूमि भी इस पूरे विवाद में अहम है।
दरअसल, पिछले सप्ताह पारा क्षेत्र में अवैध डेयरियों के खिलाफ नगर निगम ने अभियान चलाया था। कार्रवाई के दौरान टीम और कुछ पशुपालकों के बीच विवाद हो गया था। आरोप है कि विरोध कर रहे लोगों ने नगर निगम कर्मचारियों पर हमला कर दिया। इस घटना में कई कर्मचारी घायल हुए थे। पारा चौकी प्रभारी को भी चोट लगी थी और उनके सिर पर गंभीर चोट बताई गई थी। इसके बाद प्रशासन ने अभियान को और तेज कर दिया। अतिरिक्त पुलिस बल के साथ इलाके में कार्रवाई की गई और 50 से अधिक अवैध डेयरियों को हटाया गया। इसी अभियान के दौरान 243 भैंसों को नगर निगम ने कब्जे में लिया।
नगर निगम के कब्जे में लिए गए पशुओं को फिलहाल काजी हाउस और गौशाला में रखा गया है। नगर निगम की ओर से इन्हीं 243 भैंसों की नीलामी की प्रक्रिया प्रस्तावित थी। लेकिन नीलामी शुरू होने से पहले ही सपा और आजाद समाज पार्टी के प्रदर्शन ने पूरे मामले को राजनीतिक रंग दे दिया। अब इस विवाद में एक तरफ अवैध डेयरियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई और कर्मचारियों पर हुए हमले का मामला है, तो दूसरी तरफ पशुपालकों की आजीविका और जब्त पशुओं की नीलामी का सवाल खड़ा हो गया है। ऐसे में आगे प्रशासन किस रास्ते से इस विवाद का समाधान निकालता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।