लखनऊ

सपा की PDA पॉलिटिक्स: अखिलेश यादव के फॉर्मूले में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक कहां?

SP PDA Politics: PDA फॉर्मूला अखिलेश यादव की कोशिश है कि सपा सिर्फ यादव-मुस्लिम पार्टी न रहकर व्यापक सामाजिक गठजोड़ बने। 2024 के नतीजों ने इसे ताकत दी, लेकिन 2027 में इसकी असली परीक्षा होगी। पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक इस फॉर्मूले में कागजों पर शामिल हैं।
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Oct 19, 2026
SP chief Akhilesh Yadav
सपा प्रमुख अखिलेश यादव फोटो-ANI

Akhilesh Yadav PDA Formula: समाजवादी पार्टी (सपा) की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से ‘PDA’ शब्द सबसे ज्यादा चर्चा में है। अखिलेश यादव ने इसे पार्टी की मुख्य रणनीति बनाया है। PDA का मतलब है-पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक। सवाल ये है कि इस फॉर्मूले में ये तीनों वर्ग वास्तव में कितना जगह पा रहे हैं और यह रणनीति चुनावी नतीजों में कितनी असरदार साबित हुई है।

PDA की शुरुआत और मकसद

2022 के विधानसभा चुनाव में सपा को 111 सीटें मिली थीं और वोट शेयर करीब 32 प्रतिशत रहा। भाजपा गठबंधन काफी आगे था। इसके बाद अखिलेश यादव ने पारंपरिक मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण से आगे बढ़ने की कोशिश की। 2023 में उन्होंने PDA फॉर्मूला पेश किया। मकसद था गैर-यादव पिछड़ी जातियों (कुर्मी, निषाद, राजभर, मौर्य, पाल आदि), दलितों और अल्पसंख्यकों (खासकर मुसलमानों) को एक मंच पर लाना। अखिलेश का दावा रहा कि PDA ही NDA को हराएगा।

पार्टी दस्तावेजों और अखिलेश के बयानों में बार-बार कहा गया कि ये सामाजिक न्याय का आंदोलन है। समय के साथ PDA की परिभाषा भी विस्तारित होती रही। कभी इसमें आदिवासी, आधी आबादी (महिलाएं) और यहां तक कि पंडित (ब्राह्मण) को भी शामिल किया गया। अखिलेश ने कहा कि ‘P’ का मतलब पंडित भी हो सकता है और ‘पीड़ित’ भी।

पिछले चुनावों के आंकड़े क्या कहते हैं?

2024 लोकसभा चुनाव में इस रणनीति का असर दिखा। सपा ने उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से 37 सीटें जीतीं। यह हाल के वर्षों में पार्टी का सबसे अच्छा प्रदर्शन था। टिकट वितरण में भी बदलाव दिखे। यादव उम्मीदवारों की संख्या सीमित रखी गई और गैर-यादव ओबीसी तथा दलित उम्मीदवारों को ज्यादा मौका दिया गया। कई सीटों पर पिछड़ी जातियों और दलित चेहरों ने जीत दर्ज की। पार्टी का दावा है कि PDA की बदौलत गैर-यादव वोटों में सेंध लगी।

हालांकि आलोचक कहते हैं कि कोर वोटबैंक अभी भी मुस्लिम-यादव ही है। संगठन के स्तर पर जिलाध्यक्ष जैसे पदों पर यादव और मुस्लिम नेताओं की संख्या काफी अधिक बताई जाती है। इससे सवाल उठता है कि PDA सिर्फ चुनावी नारा है या वास्तविक सत्ता साझेदारी भी।

रणनीति की चुनौतियां और विस्तार

अखिलेश यादव PDA को लगातार केंद्र में रखे हुए हैं। 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर PDA रथ यात्रा निकाली जा रही है। 26 नवंबर 2026 को पार्टी अपना घोषणापत्र जारी करेगी, जिसे अखिलेश ने ‘PDA का प्रणपत्र’ कहा है। वे MY वोट को सुरक्षित रखते हुए PDA और युवा (Gen Z) को जोड़ने की बात कर रहे हैं।

भाजपा इस फॉर्मूले पर हमला करती रही है। योगी आदित्यनाथ और अन्य नेता इसे जातिवादी बताते हैं। कुछ मौकों पर PDA सम्मेलनों में कम भीड़ जुटने से भी पार्टी के अंदर सवाल उठे हैं।

Updated on:
19 Oct 2026 06:41 pm
Published on:
19 Oct 2026 06:41 pm