
UP Politics: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्टके आदेश के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। अदालत ने 3 महीने के भीतर ग्राम पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर निशाना साधा है। सपा नेता फखरुल हसन चांद ने आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर पंचायत चुनाव टालने की कोशिश कर रही थी, जबकि उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा नेता फखरुल हसन चांद ने BJP पर पंचायत चुनाव नहीं कराने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा महीनों से लगातार प्रयास कर रही थी कि किसी तरह उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव ना हों।
फखरुल हसन चांद के मुताबिक, भाजपा को आशंका है कि विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव हुए तो पार्टी को प्रदेश में हार का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि पंचायत चुनाव में भाजपा की हार का असर आगामी विधानसभा चुनाव पर भी पड़ेगा। सपा नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर लोकतंत्र का गला घोंट रही थी। उन्होंने कहा कि अब हाईकोर्ट का फैसला आ चुका है और यह देखना होगा कि भाजपा सरकार न्यायालय के आदेश का सम्मान करती है या नहीं।
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने को लेकर कांग्रेस ने भी भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने हाईकोर्ट के तीन महीने के भीतर चुनाव कराने के निर्देश का स्वागत किया और इसे लोकतंत्र की जीत करार दिया।
आराधना मिश्रा ने सवाल किया कि राज्य सरकार ने समय रहते पंचायत चुनाव कराने का निर्णय क्यों नहीं लिया। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव निर्धारित समय पर करा लिए गए होते, तो पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधि अपने पदों पर बने रहते और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को आगे बढ़ा सकते थे।
उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदेश सरकार अदालत के निर्देशों का पालन करेगी और निर्धारित तीन महीने की अवधि के भीतर पंचायत चुनाव संपन्न कराएगी।
ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन महीने के भीतर ग्राम पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने की। अदालत ने सुनवाई के बाद पंचायत चुनाव तीन महीने के भीतर कराने का आदेश दिया। साथ ही निवर्तमान ग्राम प्रधानों के प्रशासक के रूप में बने रहने की बात भी कही।
करीब तीन घंटे तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने पहले अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद फैसला सुनाए जाने पर कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की जीत बताया।
हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि पंचायतें ग्रामीण समाज की रीढ़ हैं। पंचायतों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलती है और ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि समय पर पंचायत चुनाव होने से निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपना कार्यकाल पूरा करने और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता। कांग्रेस ने उम्मीद जताई है कि उत्तर प्रदेश सरकार हाईकोर्ट के निर्देश का सम्मान करेगी और तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराएगी।