
UP Police News:उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही से दरोगा बनने का सपना पूरा होने के बाद कुछ जवानों के सामने अब नई परेशानी खड़ी हो गई है। दरअसल, दरोगा भर्ती-2025 का परिणाम जारी होने के बाद चयनित उन सिपाहियों को अपने पुराने सेवा बॉन्ड की शर्तों का सामना करना पड़ रहा है, जिन्होंने अभी दो साल की परिवीक्षा अवधि पूरी नहीं की है। नौकरी छोड़कर दरोगा पद पर जाने से पहले उन्हें ट्रेनिंग पर हुए खर्च के साथ दो साल का वेतन भी जमा करना पड़ सकता है।
बागपत में तैनात 21 सिपाही ऐसे हैं, जिन्होंने दरोगा भर्ती परीक्षा पास की है। चयन की खुशी के बीच अब उनके सामने करीब आठ लाख रुपये की रकम जुटाने की चिंता है। इन सिपाहियों का कहना है कि वे पुलिस विभाग छोड़कर किसी दूसरी नौकरी में नहीं जा रहे, बल्कि इसी विभाग में पदोन्नत होकर दरोगा बनने जा रहे हैं। ऐसे में उन्हें राहत मिलने की उम्मीद है।
सिपाही पद पर भर्ती के समय अभ्यर्थियों से एक बॉन्ड भरवाया गया था। इसमें परिवीक्षा अवधि पूरी होने से पहले नौकरी छोड़ने की स्थिति में विभाग की ओर से तय शर्तों के अनुसार रकम जमा करने का प्रावधान बताया गया है। सिपाहियों को भर्ती के बाद करीब 10 महीने की ट्रेनिंग दी गई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रशिक्षण के दौरान एक सिपाही पर प्रतिदिन करीब 863 रुपये खर्च हुए। 10 महीने की ट्रेनिंग का हिसाब लगाया जाए तो यह रकम करीब 2.58 लाख रुपये बैठती है। अब दरोगा भर्ती में चयनित सिपाहियों के सामने इसी ट्रेनिंग खर्च की रकम लौटाने की शर्त आ गई है।
चयनित सिपाहियों की सबसे बड़ी परेशानी सिर्फ ट्रेनिंग का खर्च नहीं है। बॉन्ड की शर्त के मुताबिक परिवीक्षा अवधि पूरी होने से पहले सिपाही पद छोड़ने पर दो साल का वेतन भी जमा करने की बात सामने आ रही है। ट्रेनिंग खर्च और वेतन को मिलाने पर एक सिपाही के लिए यह रकम करीब आठ लाख रुपये तक पहुंच रही है। अचानक इतनी बड़ी रकम जमा करने की स्थिति ने चयनित जवानों की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ दरोगा बनने का मौका है, वहीं दूसरी ओर नौकरी बदलने की प्रक्रिया में लाखों रुपये जमा करने की चुनौती सामने आ गई है।
चयनित सिपाहियों का तर्क है कि उनकी स्थिति सामान्य तौर पर नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों जैसी नहीं है। वे किसी दूसरे विभाग या निजी संस्थान में जाने के लिए पुलिस की नौकरी नहीं छोड़ रहे, बल्कि इसी पुलिस विभाग में दरोगा पद पर नियुक्त होने जा रहे हैं।उनका कहना है कि उन्होंने सिपाही पद पर रहते हुए प्रशिक्षण लिया और अब विभाग में ही उच्च पद पर चयनित हुए हैं। ऐसे में उनसे पूरा दो साल का वेतन वापस मांगना आर्थिक रूप से मुश्किल है। सिपाही ट्रेनिंग पर हुआ खर्च लौटाने के लिए तैयार होने की बात कह रहे हैं, लेकिन दो साल की सैलरी जमा करने की शर्त में राहत चाहते हैं।
चयनित जवानों का कहना है कि ट्रेनिंग पर खर्च हुई रकम एकमुश्त जुटाना भी आसान नहीं है, लेकिन परिवार और रिश्तेदारों की मदद से इसे जमा किया जा सकता है। दूसरी तरफ, दो साल का वेतन वापस करना उनके लिए ज्यादा बड़ी चुनौती है, क्योंकि वेतन उन्हें हर महीने मिला और उसी दौरान घरेलू जरूरतों में खर्च भी होता रहा। ऐसे में उनका सवाल है कि अगर विभाग के भीतर ही एक पद से दूसरे बड़े पद पर चयन हुआ है तो बॉन्ड की शर्तों को उसी हिसाब से देखा जाना चाहिए।
यह समस्या सिर्फ बागपत के 21 सिपाहियों तक सीमित नहीं है। दरोगा भर्ती-2025 में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में तैनात बड़ी संख्या में सिपाहियों का चयन हुआ है। इनमें ऐसे जवान भी शामिल हैं, जिनकी दो साल की परिवीक्षा अवधि अभी पूरी नहीं हुई है।यानी अगर मौजूदा शर्तें लागू होती हैं तो कई चयनित सिपाहियों को दरोगा बनने से पहले इसी तरह की आर्थिक चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
चयनित जवानों की मांग है कि विभाग इस मामले में कोई व्यावहारिक रास्ता निकाले। उनका कहना है कि वे पुलिस विभाग से अलग नहीं हो रहे, बल्कि इसी विभाग में जिम्मेदारी और पद के स्तर पर आगे बढ़ रहे हैं। अब उनकी नजर विभागीय स्तर पर होने वाले फैसले पर है। यदि दो साल की सैलरी वापस करने की शर्त में राहत मिलती है तो चयनित सिपाहियों के लिए दरोगा बनने का रास्ता काफी आसान हो सकता है। फिलहाल दरोगा भर्ती में चयन की खुशी और लाखों रुपये के बॉन्ड की चिंता दोनों साथ-साथ चल रही हैं।