
नागौर. सड़क पर आप कार चला रहे हों या बाइक, पीछे से मौत बनकर आता डम्पर कब जिंदगी छीन ले, कोई भरोसा नहीं। बजरी, रेत, कंकरी और पत्थरों से लदे भारी वाहन सडक़ों पर बेखौफ दौड़ रहे हैं। कई वाहनों पर नम्बर प्लेट तक नहीं, मानो कानून का कोई डर ही नहीं। टक्कर मारकर किसी की जान चली जाए तो पहचान करना मुश्किल, पुलिस पीछा करे तो चालक सडक़ पर बजरी बिखेरकर भाग निकलते हैं। सवाल यह है कि आखिर सडक़ों पर मौत बांट रहे इन वाहनों पर लगाम कौन लगाएगा?
नागौर से लेकर प्रदेश के दूसरे जिलों तक डम्परों से हुए जानलेवा हादसे इस खतरे की गवाही दे रहे हैं। जिले के खींवसर-माडपुरा मार्ग पर चार लोगों की मौत हो या नावां क्षेत्र में एक ही परिवार के तीन सदस्यों सहित चार लोगों की जान जाना, हर हादसे के पीछे डम्पर वाहनों की रफ्तार और लापरवाही पर सवाल उठते हैं। इसके बावजूद बिना नम्बर या पहचान छिपाकर दौड़ते डम्परों पर प्रभावी नियंत्रण नजर नहीं आ रहा है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान कुछ चालक पुलिस कार्रवाई व अवैध खनन सामग्री पर लगने वाले 10 गुना जुर्माने से बचने के लिए वाहन रोकने के बजाय भागने का रास्ता चुनते हैं। सडक़ पर बजरी खाली कर देना न केवल कार्रवाई में बाधा पैदा करता है, बल्कि दूसरे वाहन चालकों के लिए भी दुर्घटना का खतरा खड़ा करता है। ऐसे में सवाल सिर्फ यातायात नियमों का नहीं, बल्कि सडक़ पर चल रहे आम आदमी की जिंदगी का भी है।
हादसों की फेहरिस्त लंबी, हर बार उजड़ रहे परिवार
- प्रदेश में डम्परों से हुए हादसे इस खतरे की गंभीरता बयां करते हैं। बारां जिले के शाहबाद उपखंड क्षेत्र के मटियाखारा गांव में शुक्रवार, 16 अक्टूबर को तेज रफ्तार डम्पर ने बाइक सवार भाई-बहन को कुचल दिया, जिससे दोनों की मौके पर मौत हो गई।
- डीडवाना-कुचामन जिले के नावां शहर इलाके में 16 सितम्बर 2026 को सुबह करीब 5 बजे एक तेज रफ्तार डम्पम्ने कार को टक्कर मार दी, जिससे कार में सवार एक ही परिवार के 3 लोगों समेत कुल 4 लोगों की मौत हो गई।
- नागौर जिले के खींवसर-माडपुरा मार्ग पर 24 अगस्त 2026 को गलत दिशा आ रहे एक तेज रफ्तार डम्पर ने कार को टक्कर मार दी, जिससे कार सवार तीन लोगों की मौत हो गई। एक गंभीर घायल की उपचार के दौरान मौत हो गई।
- जयपुर के हरमाड़ा इलाके में 3 नवम्बर 2025 को एक डम्पर चालक ने नशे में धुत होकर 19 लोगों को मौत के घाट उतार दिया।
- जयपुर के ट्रांसपोर्ट नगर टनल (घाट की गोणी) के पास 23 नवम्बर 2025 को एक तेज रफ्तार डम्पर ने बाइक को टक्कर मार दी, जिससे दो दोस्तों की मौके पर ही मौत हो गई।
- बूंदी में 15 सितम्बर 2024 को जयपुर-कोटा नेशनल हाईवे के पास डम्पर की टक्कर से कार सवार 6 जनों की मौत व 3 जने घायल हो गए।
ये तो कुछ उदाहरण मात्र हैं, बिना नम्बरी डम्पर चालकों की ओर से आए दिन जगह-जगह हादसे किए जाते हैं। नियमों को ताक पर रखकर सडक़ पर बेखौफ दौडऩे वाले डम्पर चालक कारों और मोटरसाइकिलों को कीड़े-मकौड़े की तरह समझते हैं और जब चाहे रौंद देते हैं।
पीछा किया तो सड़क पर बिखेर दी बजरी
अवैध खनन और परिवहन से जुड़े मामलों में कार्रवाई के दौरान पुलिस के सामने भी चुनौती खड़ी होती है। पुलिस टीम पीछा करती है तो कुछ डम्पर चालक रास्ते में बजरी खाली कर भागने का प्रयास करते हैं। सडक़ पर फैली बजरी से दूसरे वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है और यातायात भी प्रभावित होता है। ऐसी घटनाएं केवल यातायात नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं हैं। ये पुलिस की कार्रवाई, अवैध खनिज परिवहन पर नियंत्रण और सडक़ सुरक्षा व्यवस्था के सामने भी गंभीर चुनौती पेश करती हैं। सवाल यह है कि बिना नम्बर प्लेट या पहचान छिपाकर दौड़ रहे वाहनों पर नियमित निगरानी क्यों नहीं हो पा रही और ऐसे वाहनों के मालिकों व चालकों की जिम्मेदारी कैसे तय की जा रही है?
नागौर में दो घंटे तक दौड़ता रहा डम्पर
नागौर में मई 2026 में एक डम्पर चालक की खतरनाक ड्राइविंग का मामला सामने आया था। चालक ने बीकानेर रोड पर गलत दिशा में डम्पर दौड़ाया और इस दौरान स्कूटी तथा एम्बुलेंस को टक्कर मारी। इसके बाद वह तेज रफ्तार में करीब दो घंटे तक नागौर से जोधपुर जिले के धनारी गांव की ओर भागता रहा। इस दौरान जान बचाने की कोशिश में एक युवक करीब 15 किलोमीटर तक डम्पर के बाहर लटका रहा। आरोपी को पकडऩे के लिए चार थानों की पुलिस जुटी रही। आखिरकार जोधपुर के धनारी क्षेत्र में बैरिकेड लगाकर डम्पर को रोका गया और चालक को गिरफ्तार किया गया।
कार्रवाई के साथ निगरानी भी जरूरी
यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि सडक़ सुरक्षा के लिए जरूरी है कि पुलिस और परिवहन विभाग संयुक्त अभियान चलाकर बिना नम्बर प्लेट, अस्पष्ट पंजीकरण और नियमों का उल्लंघन करने वाले भारी वाहनों की जांच करें। वाहनों के पंजीकरण, फिटनेस, परमिट और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच के साथ अवैध खनिज परिवहन पर भी प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरों, हाईवे निगरानी और उपलब्ध तकनीकी संसाधनों के जरिए संदिग्ध वाहनों की पहचान सुनिश्चित करने की जरूरत है। नियम तोडकऱ भागने वाले चालकों के साथ वाहन मालिकों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।