
Swatantra Bhardwaj statement; कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के दौरान एक दलित व्यक्ति के साथ कथित मारपीट के मामले में जेल जा चुके यूट्यूबर स्वतंत्र भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर वापसी करते ही नया विवाद खड़ा कर दिया है। 15 सितंबर को जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम का जिक्र किया। उनकी पोस्ट में दोनों की रिहाई की मांग करने वालों को लेकर तीखी टिप्पणी की गई है। स्वतंत्र भारद्वाज खुद को हिंदूवादी एक्टिविस्ट बताते हैं। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने लंबे समय तक सोशल मीडिया पर कोई सक्रियता नहीं दिखाई थी। अब उनकी नई पोस्ट को लेकर राजनीतिक और सोशल मीडिया हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।
लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को एक्स पर किए गए पोस्ट में स्वतंत्र भारद्वाज ने उन लोगों पर टिप्पणी की, जो उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई की मांग कर रहे हैं। उन्होंने लिखा कि लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह जेल से बाहर हैं और उन्होंने दोनों के संदर्भ में धमकी भरे अंदाज में बयान दिया। पोस्ट में उन्होंने ‘लव डोज’ शब्द का भी इस्तेमाल किया। एक अन्य पोस्ट में भारद्वाज ने अपने समर्थकों और सनातनी समुदाय के लोगों का आभार जताया। उन्होंने संदेश के अंत में ‘जय श्री राम’ और ‘जय हिंदू राष्ट्र’ के नारे भी लिखे।
मामला उस समय चर्चा में आया था, जब सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर स्वतंत्र भारद्वाज और एक यूट्यूबर के पिता के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद भारद्वाज का एक वीडियो सामने आया, जिसमें कथित तौर पर उनकी गिरफ्तारी न होने के पीछे राजनीतिक प्रभाव होने की बात कही गई थी। इस वीडियो के बाद दिल्ली में सीजेपी और विपक्षी दलों से जुड़े लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद पुलिस ने भारद्वाज के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
मामले में अपर सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर की अदालत ने स्वतंत्र भारद्वाज को 6 अक्टूबर को नियमित जमानत दे दी थी। इससे पहले 15 सितंबर को उन्हें तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत मिली थी। उस दौरान पुलिस को उनकी गतिविधियों और व्यवहार पर नजर रखने के निर्देश दिए गए थे।
अदालत की अंतरिम जमानत संबंधी शर्तों के मुताबिक, भारद्वाज को मामले, अपने बचाव या शिकायतकर्ता के परिवार के बारे में सोशल मीडिया अथवा किसी अन्य मंच पर टिप्पणी करने से रोका गया था। उन्हें शिकायतकर्ता, उनकी बेटी और गवाहों से संपर्क नहीं करने तथा सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करने का निर्देश भी दिया गया था।
अदालत ने जमानत को न्यायिक भरोसे से जुड़ा फैसला बताते हुए स्पष्ट किया था कि इसे किसी उपलब्धि या दिखावे की वस्तु की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। भारद्वाज की हालिया पोस्ट और जमानत की शर्तों के बीच किसी संभावित कानूनी पहलू पर स्थिति संबंधित अदालत के आदेश और आगे की कार्रवाई से ही स्पष्ट होगी।