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Paddy : ओपन कैप में सड़ा दिया धान, अब कर रहा नीलामी, पांच साल से उठाव नहीं

Paddy : जबलपुर जिले में छह वर्षों के 6 लाख 51 हजार क्विंटल धान को गोदाम और कैप से बाहर करने के लिए टेंडर जारी किया गया है। दरअसल पहले धान को ओपन कैप में लंबे समय तक रखकर सड़ा दिया गया और अब उसकी नीलामी की जा रही है। आइए पढ़ते हैं ज्ञानी रजक की विशेष रिपोर्ट।
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Oct 19, 2026
Spoiled Paddy
खुले कैंप में धान रखने से बर्बादी बहुत ज्यादा हो जाती है। (Photo: Rajasthan Patrika)

Paddy : किसानों से खरीदे गए अनाज की बर्बादी में संस्थाएं पीछे नहीं हैं। जबलपुर जिले में मध्य प्रदेश सिविल सप्लाई कारपोरेशन 6 लाख 51 हजार क्विंटल धान की नीलामी कर रहा है। इसके लिए टेंडर निकाले जा चुके हैं। इसमें वर्ष 2021 से लेकर 2025 में खरीदा गया धन भी शामिल है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इस प्रक्रिया में वर्ष 2021-22 में खरीदकर ओपन कैप में भंडारित धान भी शामिल है। जबकि नियम यह है कि किसी भी ओपन कैप में तीन महीने से ज्यादा अनाज को नहीं रखा जा सकता। अब वह उपयोग के लायक नहीं है। वह सड़कर काला पड़ चुका है। इसी प्रकार गोदामों में रखे धान की हालत भी बहुत अच्छी नहीं है।

जिले में हर साल 3 से 4 लाख मीट्रिक टन गेहूं और धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाती है। इसका भंडारण तो जैसे-तैसे कर दिया जाता है। लेकिन समय पर निकासी करने में संस्थाएं पीछे हो जाती है। ऐसे में लंबे समय तक वह ओपन कैप या गोदाम रखे जाने के कारण खराब हो जाती है। हर बार खरीदी एजेंसी अलग होती है, लेकिन एफसीआई को देने का काम मध्य प्रदेश सिविल सप्लाई कारपोरेशन करता है। इसमें वह पीछे रहती है। यही कारण है कि पांच-पांच साल तक अनाज भंडारित रहता है। आखिरी में इसकी नीलामी की जाती है। अनाज को लेने वाले इसे औने-पौने दामों में खरीदने के लिए शासन को मजबूर करते हैं।

पहले खेत फिर गोदामों में जहर

आज कोई भी उपज उर्वरक और कीटनाशकों के बिना नहीं होती। इनकी मात्रा का कोई ठिकाना नहीं है। कई किसान इनका अंधाधुंध उपयोग करते हैं। इनके उपयोग से पैदावार तो खूब हो जाती है लेकिन रसायनों का अंश इनमें रह जाता है। इसके बाद उसे भंडारित करने के लिए जो दवाएं इस्तेमाल की जाती हैं वह कम जहरीली नहीं होती। यानि गेहूं हो या धान उस पर रसायनों का डबल डोज पड़ता है। इसका उपयोग हम सभी करते हैं। यह कही न कहीं हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

अधिक मात्रा बड़खेड़ा कैप में

यदि हम अकेले ओपन कैप की बात करें तो मध्य प्रदेश वेयर हाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कारपोरेशन के बड़खेड़ा ओपन कैप में सबसे ज्यादा मात्रा है। यहां 1987 मीट्रिक टन धान रखकर सड़ चुका है। इसमें शायद ही 50 से 60 क्विंटल धान हो जो साबूत बचा हो। इसके बाद दर्शनी ओपन कैप में 1167 मीट्रिक टन धान रखा है। बंदरकोला में 287 मीट्रिक टन का भंडारण है। इसी प्रकार अन्य कैंप में भंडारित धान की बात करें तो उसकी कुल मात्रा 35 हजार 210 क्विंटल गेहूं है। यह धान वर्ष 2021-22 में खरीदा गया था उस समय समर्थन मूल्य 1940 रुपए प्रति क्विंटल था। इस हिसाब से अकेले इसकी कीमत ही 6 करोड़ 83 लाख रुपए की है। इसमें समितियों का भुगतान, रखरखाव और अन्य खर्चों को मिला दिया जाए तो यह 7 करोड़ से ज्यादा की हो जाती है।

अब मुर्गियों का दाना और बनेगी शराब

इस धान का मानव तो नही कर सकता मुर्गी दाना और शराब के निर्माण में हो सकता है। इसमें सीधे तौर पर उस समय खरीदी एजेंसी मार्कफेड और फिर उसका भंडारण करने वेयर हाउसिंग और सप्लाई करने वाली सिविल सप्लाई कारपोरेशन शामिल है। अब होना तो यह चाहिए कि संबंधित अधिकारियों से इसकी वसूली होनी चाहिए। इसकी जांच होनी चाहिए।

पहले भी सामने आ चुकी है गड़बडी

जबलपुर के बीजापुरी क्षेत्र में ओपन कैप में रखा 500 क्विंटल गेहूं खराब हो चुका है। इसे वर्ष 2019 में खरीदा गया था। सात वर्षों तक इसकी निकासी नहीं हो सकी। इसी प्रकार 2021 में वेयरहाउस में रखे 21 हजार मीट्रिक टन गेहूं में कीडे़ लग थे। जिले में वर्ष 2018-19 और 2018-20 में भंडारित 21 हजार मीट्रिक टन गेहूं में कीड़े लग चुके हैं। इसमें सबसे ज्यादा मात्रा तिलसानी ओपन कैप की थी। वह काला पत्थर बन गया था। उसकी नीलामी कर दी गई।

किस वर्ष का कितना रिजर्व प्राइम

खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 की धान की रिजर्व प्राईज रू. 1400 प्रति ​क्विंटल रहेगी। वर्ष 2022-23 का रिजर्व प्राईज 1550, वर्ष 2023-24 के लिए 1750, वर्ष 2024-25 के लिए 2100 और खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की धान का रिजर्व प्राईज जबलपुर एवं कटनी के लिए 2100- प्रति क्विंटल एवं शेष जिलों के लिए 2200 प्रति क्विंटल तय की गई है।

Updated on:
19 Oct 2026 04:41 pm
Published on:
19 Oct 2026 04:41 pm