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खेती में AI और रोबोटिक्स का जादू: जानें कैसे बदल रहा है आपका फसल उगाने का तरीका!

Robotics: AI और रोबोटिक्स अब भारतीय खेती में तेज़ी से जगह बना रहे हैं। ड्रोन, स्मार्ट रोबोट और धान रोपाई मशीन जैसी तकनीकें लागत घटाने, पानी बचाने और खेती को अधिक सटीक बनाने में मदद कर रही हैं।
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Aug 29, 2026
Robotics In Agriculture News.
ड्रोन, स्मार्ट रोबोट और AI तकनीक खेती को बना रहे हैं तेज़, सटीक और किफ़ायती। (फोटो: AI)

भारतीय खेती में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स केवल भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि ज़मीन पर उतरते समाधान बन चुके हैं। धान रोपाई करने वाले रोबोट, फसल पर सटीक दवा छिड़कने वाले ड्रोन और खरपतवार पहचानने वाली AI मशीनें किसानों की मेहनत कम करने के साथ खेती को अधिक किफ़ायती बना रही हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) और कई स्टार्टअप इस बदलाव को गति दे रहे हैं।

IARI की AI लैब से मिली नई दिशा

नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) ने फरवरी 2026 में रोबोटिक्स और AI प्रयोगशाला शुरू की। इसका उद्देश्य स्मार्ट मशीनीकरण और डिजिटल कृषि को बढ़ावा देना है।

इसी प्रयोगशाला में विकसित रोबोटिक धान रोपाई यंत्र को पूसा कृषि मेला 2026 में प्रदर्शित किया गया। यह बैटरी से 3–4 घंटे तक काम कर सकता है और लगभग 0.3 से 1.2 हेक्टेयर प्रति घंटे की क्षमता से रोपाई करने में सक्षम है। इसकी खासियत यह है कि किसान को लगातार पानी भरे खेत में उतरकर काम नहीं करना पड़ता।

Drone से सटीक खेती

ICAR की Precision Agriculture पहल के तहत ड्रोन आधारित स्प्रे, AI-सक्षम प्लांटर और IoT आधारित निगरानी प्रणाली पर काम हो रहा है।

SMAM योजना के तहत ICAR, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में 21 केंद्रों पर 32 ड्रोन उपलब्ध कराए गए। वर्ष 2024–25 में इनसे 2,112 प्रदर्शन किए गए, जिनमें 14,683 किसान शामिल हुए और लगभग 1,895 हेक्टेयर क्षेत्र में तकनीक का प्रदर्शन हुआ।

ड्रोन के जरिए दवा और उर्वरक का छिड़काव तेज़, समान और सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है।

AI रोबोट कर रहे नये प्रयोग

महाराष्ट्र के स्टार्टअप 12AM Robotics ने अंगूर की बेलों की छंटाई के लिए AI आधारित स्वचालित रोबोट विकसित किया है। कंपनी के अनुसार, इसका व्यावसायिक उपयोग 2026 से शुरू होने की तैयारी में है और इससे मौसमी मज़दूरी की लागत में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

वहीं Terra Nova Robotics ने AI विज़न और लेज़र तकनीक वाला रोवर तैयार किया है, जो खेत में खरपतवार की पहचान कर उसे हटाता है। 2026 के फील्ड ट्रायल में इसने 94.7% सटीकता से खरपतवार की पहचान की और रासायनिक उपयोग में लगभग 95% तक कमी दर्ज की गई।

ग्रीनहाउस में भी AI का कमाल

ग्रीनहाउस खेती के लिए विकसित Sow & Forget प्रणाली भी चर्चा में है। इसमें स्वचालित रोवर टमाटर की खेती से जुड़े कई काम करता है।

पायलट परीक्षणों में इस तकनीक ने प्रति पौधे अधिक उत्पादन, लगभग 70% कम पानी और 80% तक कम कीटनाशक उपयोग के परिणाम दिखाए हैं। हालांकि यह तकनीक अभी व्यापक व्यावसायिक स्तर पर लागू नहीं हुई है।

छोटे किसानों के लिए क्यों अहम है बदलाव?

इन तकनीकों का सबसे बड़ा असर छोटे और मध्यम किसानों पर पड़ सकता है। धान रोपाई मशीन शारीरिक मेहनत घटा सकती है, ड्रोन समय बचा सकते हैं और AI आधारित निगरानी फसल की समस्याओं का समय रहते पता लगाने में मदद कर सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पंचायतों, कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य कृषि विभागों के माध्यम से इन तकनीकों के प्रदर्शन और प्रशिक्षण बढ़ाए जाएँ, तो ग्रामीण इलाकों में इनका उपयोग तेज़ी से बढ़ सकता है।

अब आगे क्या होगा?

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल तकनीक विकसित करना पर्याप्त नहीं होगा। किसानों तक आसान वित्त, प्रशिक्षण, किराये पर मशीनें उपलब्ध कराने की व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर डेमो कार्यक्रम ज़रूरी हैं। इससे AI और रोबोटिक्स आधारित खेती बड़े किसानों तक सीमित रहने के बजाय गाँव-गाँव तक पहुँच सकेगी।

Updated on:
29 Aug 2026 12:08 pm
Published on:
29 Aug 2026 12:08 pm