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ग्लेशियर टूटे या बाढ़ आए, अब पहले मिलेगी चेतावनी: हिमाचल में स्थापित हुआ देश का पहला अलर्ट सिस्टम

हिमाचल में देश का पहला अलर्ट सिस्टम स्थापित किया गया है। यह चेतावनी यंत्र ग्लेशियर टूटने या अचानक बाढ़ जैसी गतिविधियों का अलर्ट भेजेगा।
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Oct 17, 2026
GLOF Alert System
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर पिघलने और हिमनद झीलों के बढ़ते आकार से पैदा होने वाले बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में देश की पहली ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित की गई है।

किसने विकसित किया GLOF सिस्टम?

समुद्र तल से करीब 4100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित घेपन घाट हिमनद झील में लगाई गई यह प्रणाली संभावित बाढ़ के खतरे की निगरानी और समय रहते चेतावनी देने में मदद करेगी। इसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की पायलट परियोजना के तहत विकसित किया है।

कैसे काम करेगी GLOF तकनीक?

  • GLOF प्रणाली में बुआय आधारित झील निगरानी स्टेशन, स्वचालित मौसम केंद्र और ग्लेशियर विजन यूनिट शामिल है। इस तकनीक के माध्यम से झील के जलस्तर, मौसम और आसपास के पर्यावरणीय बदलावों पर नजर रखी जाएगी।
  • सेंसर से मिलने वाले आंकड़ों और दृश्य सूचनाओं का C-DAC के सुपरकंप्यूटर प्लेटफॉर्म पर विश्लेषण किया जाएगा।
  • इससे निर्धारित मानकों के आधार पर अलर्ट जारी करने, संभावित जीएलओएफ की परिस्थितियों का आकलन करने और बाढ़ के जोखिम को समझने में मदद मिलेगी।

घेपन घाट झील में खतरे का अलर्ट

घेपन घाट झील के बढ़ते आकार को देखते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने नवंबर 2023 में आगाह किया था। इसके बाद संभावित खतरे का आकलन, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर काम शुरू किया गया।

चंद्रा-चिनाब क्षेत्र में भी तैयारी

संभावित बाढ़ से निपटने के लिए चंद्रा-चिनाब (चंद्रभागा) नदी क्षेत्र में उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) के चिह्नांकन का काम भी पूरा कर लिया गया है। इससे बाढ़ प्रभावित हो सकने वाले क्षेत्रों की पहचान और राहत-बचाव की योजना बनाने में मदद मिलेगी। ऐसे में यह चेतावनी प्रणाली हिमालयी क्षेत्रों में आपदा से पहले तैयारी मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।

221 झीलें बेहद संवेदनशील

हिमाचल के बाद GLOF प्रणाली को आगे भारत के अन्य पर्वतीय राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में भी लगाया जाएगा। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में ग्लेशियर झीलों के फटने का गंभीर खतरा है। उत्तराखंड के वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान और अन्य वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार पूरे हिमालयी क्षेत्र में भारत के बेसिन क्षेत्रों में 2,485 से अधिक ग्लेशियर झीलों की पहचान की गई है। इनमें से 221 झीलों को बेहद संवेदनशील और उच्च खतरे की श्रेणी में रखा गया है।

Updated on:
17 Oct 2026 04:23 pm
Published on:
17 Oct 2026 04:23 pm