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अटल जी के वो 10 फैसले, जिन्होंने बदल दी भारतीय राजनीति की दिशा

आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि है। उन्हें याद करते हुए जानते हैं, उनके जीवन के 10 बड़े फैसले, जिन्होंने भारतीय राजनीति को नई दिशा दी।
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Aug 16, 2026
Atal Ji Decisions
अटल जी के बड़े फैसले। (फोटोः एआई)

16 अगस्त 2018 को भारत ने अपने सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली नेताओं में से एक अटल बिहारी वाजपेयी को खो दिया था। आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए उस दौर को समझते हैं, जब भारत 21वीं सदी में प्रवेश कर रहा था। वाजपेयी ने करीब 6 साल प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व किया। इस दौरान सुरक्षा, सड़क, गांव, टेलीकॉम, विदेश नीति और गठबंधन राजनीति से जुड़े कई ऐसे फैसले हुए, जिनका असर आने वाले वर्षों में भी दिखाई दिया।

उनकी पुण्यतिथि पर उनके राजनीतिक फैसलों को देखें तो यह समझ आता है कि उन्हें सिर्फ एक कुशल वक्ता या लोकप्रिय प्रधानमंत्री कहना उनके योगदान को सीमित कर देना होगा। उनके कई फैसलों ने भारत की रणनीतिक सोच और विकास की दिशा को लंबे समय के लिए प्रभावित किया।

1. पोखरण परमाणु परीक्षण: दुनिया के सामने भारत की रणनीतिक ताकत

मई 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने पोखरण में परमाणु परीक्षण कर भारत की रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया। 11 और 13 मई को हुए परीक्षणों के बाद भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और प्रतिबंधों का दौर आया, लेकिन सरकार अपने फैसले पर कायम रही।

इस फैसले का महत्व केवल परमाणु परीक्षण तक सीमित नहीं था। इसने भारत की सुरक्षा नीति और वैश्विक पहचान को भी प्रभावित किया। वाजपेयी ने परमाणु क्षमता को जिम्मेदारी और संयम के साथ पेश करने की कोशिश की।

2. लाहौर बस यात्रा: परमाणु शक्ति के साथ शांति का संदेश

परमाणु परीक्षण के कुछ ही महीनों बाद वाजपेयी ने पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने की पहल की। 20 फरवरी 1999 को उन्होंने दिल्ली से लाहौर जाने वाली बस सेवा के उद्घाटन में खुद यात्रा की। अगले दिन भारत और पाकिस्तान ने लाहौर घोषणा पर हस्ताक्षर किए।

यह कदम इसलिए अहम था, क्योंकि परमाणु परीक्षण के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका थी। वाजपेयी का संदेश था कि मजबूत सुरक्षा नीति के साथ शांति की कोशिश भी जारी रह सकती है। संयुक्त राष्ट्र ने भी उस समय दिल्ली-लाहौर बस सेवा की शुरुआत का स्वागत किया था।

3. कारगिल युद्ध: शांति की कोशिश के बाद कठोर फैसला

लाहौर यात्रा के कुछ ही समय बाद कारगिल में पाकिस्तान की घुसपैठ सामने आई। वाजपेयी सरकार के सामने बड़ी चुनौती थी कि परमाणु शक्ति वाले दो देशों के बीच युद्ध को कैसे सीमित रखा जाए।

वाजपेयी ने सेना को कार्रवाई की पूरी छूट दी, लेकिन नियंत्रण रेखा पार नहीं करने की नीति पर जोर दिया। इससे भारत ने सैन्य कार्रवाई के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक समर्थन भी हासिल किया। उनके तत्कालीन राष्ट्र के नाम संबोधन में उन्होंने साफ कहा था कि पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय क्षेत्र पर कब्जा करने की कोशिश की है और घुसपैठियों को हटाना सरकार का दायित्व है।

4. गोल्डन क्वाड्रिलेटरल: सड़कों का विकास

वाजपेयी सरकार ने देश के चार बड़े महानगरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिए गोल्डन क्वाड्रिलेटरल परियोजना को आगे बढ़ाया।

इसका उद्देश्य माल ढुलाई, व्यापार, यात्रा और आर्थिक गतिविधियों को तेज करना था। बाद की सरकारों ने भी इस नेटवर्क को आगे बढ़ाया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी कई मौकों पर गोल्डन क्वाड्रिलेटरल को वाजपेयी के बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रमुख योगदान के रूप में याद किया है।

5. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना: गांवों तक पहुंची पक्की सड़क

25 दिसंबर 2000 को शुरू हुई प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों को हर मौसम में चलने वाली सड़कों से जोड़ना था। इसका असर सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ा। सड़क का मतलब सिर्फ यात्रा आसान होना नहीं है। इससे गांवों की बाजार, स्कूल, अस्पताल और रोजगार तक पहुंच भी बेहतर होती है। सरकारी रिकॉर्ड में भी PMGSY को वाजपेयी सरकार की कनेक्टिविटी क्रांति की प्रमुख योजनाओं में गिना जाता है।

6. नई दूरसंचार नीति 1999: मोबाइल क्रांति की शुरुआत

आज मोबाइल और इंटरनेट हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं, लेकिन इसके पीछे कई नीतिगत बदलावों की लंबी कहानी है। वाजपेयी सरकार के समय नई दूरसंचार नीति 1999 लाई गई।

TRAI (भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण) के दस्तावेज के अनुसार इस नीति का उद्देश्य देश में बेहतर और सुलभ दूरसंचार ढांचा तैयार करना था। इसमें टेलीकॉम सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता हित जैसे विषयों पर जोर दिया गया।

एक नजर में अटल जी के 10 बड़े फैसले

फैसलाबड़ा असर
पोखरण परमाणु परीक्षणभारत की रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन
लाहौर बस यात्रापाकिस्तान से शांति की पहल
कारगिल युद्ध में नेतृत्वसुरक्षा और कूटनीति का संतुलन
गोल्डन क्वाड्रिलेटरलराष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनागांवों की कनेक्टिविटी
नई दूरसंचार नीति 1999टेलीकॉम क्षेत्र के विस्तार की नींव
गठबंधन सरकारकई दलों को साथ लेकर स्थिर सरकार
अमेरिका से नए रिश्तेरणनीतिक साझेदारी की दिशा
बुनियादी ढांचे पर जोरविकास को कनेक्टिविटी से जोड़ना
आर्थिक और राजकोषीय सुधारसरकार की वित्तीय व्यवस्था में बदलाव

7. गठबंधन सरकार: अलग-अलग दलों को साथ लेकर चलने की कला

वाजपेयी की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धियों में एक स्थिर गठबंधन सरकार चलाना भी था। 1999 में उन्होंने NDA सरकार का नेतृत्व किया और अलग-अलग विचारधाराओं वाले कई दलों को साथ लेकर सरकार चलाई।

उस समय गठबंधन राजनीति आसान नहीं थी। लेकिन वाजपेयी संवाद, सहमति और राजनीतिक संतुलन के लिए जाने जाते थे। 2018 में उनके निधन पर तत्कालीन उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने भी कहा था कि वाजपेयी ने 23 दलों के गठबंधन को सफलतापूर्वक चलाया।

8. अमेरिका के साथ रिश्तों को नई दिशा

1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद भारत और अमेरिका के संबंधों में तनाव आया, लेकिन वाजपेयी सरकार ने संवाद का रास्ता बंद नहीं किया।

2000 में वाजपेयी और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के दौर में दोनों देशों ने 21वीं सदी के लिए संबंधों को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की। विदेश मंत्रालय के दस्तावेज में दोनों देशों के नेताओं की ओर से संबंधों को अधिक निकट और नई दिशा देने की बात दर्ज है।

बाद के वर्षों में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। इस लिहाज से वाजपेयी काल को दोनों देशों के रिश्तों में बदलाव के महत्वपूर्ण दौर के रूप में देखा जा सकता है।

9. इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास की रीढ़ बनाया

वाजपेयी के कार्यकाल में सड़क के साथ रेल, बिजली, दूरसंचार और अन्य बुनियादी ढांचे पर भी जोर दिया गया। सरकार ने विकास को सिर्फ सरकारी योजनाओं तक सीमित रखने के बजाय कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ने की कोशिश की।

PIB के अनुसार उनके कार्यकाल की प्रमुख पहलों में गोल्डन क्वाड्रिलेटरल, PMGSY, बिजली सुधार और टेलीकॉम कनेक्टिविटी शामिल रहे।

इसका सबसे बड़ा असर यह हुआ कि सड़क और कनेक्टिविटी को आर्थिक विकास की बुनियादी जरूरत के रूप में देखने की सोच मजबूत हुई।

10. आर्थिक और राजकोषीय सुधार: सरकार के खर्च पर भी नजर

वाजपेयी सरकार के दौरान आर्थिक सुधारों पर भी जोर दिया गया। सरकार ने विनिवेश के लिए अलग मंत्रालय बनाया और राजकोषीय अनुशासन से जुड़े Fiscal Responsibility and Budget Management यानी FRBM Act को आगे बढ़ाया।

PIB के एक आधिकारिक दस्तावेज में वाजपेयी सरकार की आर्थिक नीतियों, FRBM Act, विनिवेश और बुनियादी ढांचे को उनके शासन की प्रमुख पहलों में शामिल किया गया है।

Updated on:
16 Aug 2026 05:01 pm
Published on:
16 Aug 2026 05:01 pm