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बारिश में खिल उठता है राजस्थान, फैमली के साथ करें इन ऑफबीट झरनों की सैर

क्या आपने कभी सोचा है कि बारिश के बाद राजस्थान की खूबसूरती में कितनी जादुई तब्दीली आ जाती है? आइए, यहां के छिपे हुए झरनों के बारे में जानते हैं, जो सिर्फ मानसून में ही अपनी असली चमक दिखाते हैं।
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Aug 26, 2026
Rajasthan Waterfalls
सांकेतिक इमेजः एआई

बारिश के मौसम में राजस्थान का चेहरा एकदम बदल जाता है, जहां गर्मी और सूखे की छवि आम है, वहीं अरावली की पहाड़ियों पर अचानक से झरने जाग उठते हैं। ये अनदेखे वाटरफॉल्स ठंडक देने के साथ ही एक अलग, हरी-भरी राजस्थान की झलक भी दिखाते हैं। आइए, इन छिपे हुए झरनों के बारे में जानते हैं।

हाथनी कुंड: जयपुर के पास शांत प्राकृतिक आश्रय

जयपुर से लगभग 17 किलोमीटर दूर अरावली की पहाड़ियों में स्थित हाथनी कुंड एक ऐसा स्थान है जो ज्यादातर पर्यटकों की नजरों से बच जाता है। मानसून के दौरान यह जगह एक खूबसूरत झरने और हाथी के तालाब जैसी आकृति के साथ एक शांतिपूर्ण अनुभव देती है।

अलेवा झरना: अलवर का अविकसित मोनसून रत्न

अलवर जिले के राजगढ़ के पास स्थित अलेवा झरना (जिसे अलेवा धाम झरना भी कहते हैं) एक लंबी घाटी में बहता है, जहां कई स्तरों में पानी गिरता है। यह जगह पूरी तरह से प्राकृतिक और भीड़-भाड़ से दूर है। यह पर्यटकों के लिए एक सच्चा ऑफबीट अनुभव है।

भीमलट जलप्रपात: बुंदी की महाभारत कथा

बुंदी और चित्तौड़गढ़ के बीच मेज नदी से बनने वाला भीमलट झरना लगभग 60 मीटर (150 फीट) ऊंचाई से गिरता है। यह एक प्राकृतिक कैन्यन में स्थित है और पास ही आठवीं सदी का भीमलट महादेव मंदिर है। मानसून में यह सफेद पानी की चादर की तरह गिरता है, जो दृश्य को और भी प्रभावशाली बना देता है।

मेनाल झरना: इतिहास और प्रकृति का संगम

चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित मेनाल झरना मेनाल नदी से बनता है और लगभग 50–150 फीट ऊंचाई से गिरता है। यह जगह अपने आसपास के 9वीं–11वीं सदी के शिव मंदिरों के कारण भी खास है, जहां प्रकृति और इतिहास एक साथ मिलते हैं।

भील बेरी झरना: देवगढ़ का मानसूनी रहस्य

देवगढ़ के पास, कामली घाट के पास स्थित भील बेरी झरना मानसून में 182 फीट ऊंचाई से गिरता है। यह जंगलों से घिरी जगह एक शांत और फोटोजेनिक अनुभव देती है, खासकर उन यात्रियों के लिए जो भीड़ से दूर कुछ अलग खोज रहे हैं।

हाथी भाटा झरना: जयपुर के पास छोटा प्राकृतिक आश्चर्य

दौसा जिले के हाथी भाटा गांव के पास स्थित यह झरना जयपुर से लगभग 85 किलोमीटर दूर है। यहां का नाम पास की हाथी जैसी चट्टान संरचना से पड़ा है। मानसून में यह छोटे-छोटे झरनों के रूप में गिरता है और आसपास की ग्रेनाइट चट्टानों के साथ एक आकर्षक दृश्य बनाता है।

पदझर महादेव झरना: चित्तौड़गढ़ के पास शांतिपूर्ण मानसून स्थल

चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा के पास स्थित यह झरना मानसून में ही जीवंत होता है। एक छोटे शिव मंदिर के पास यह झरना गिरता है और आमतौर पर शांत रहता है। स्थानीय परिवारों और छोटे समूहों के लिए यह एक पसंदीदा पिकनिक स्थल बन सकता है।

टोडगढ़–राओली वन्यजीव अभयारण्य का झरना

टोडगढ़–राओली वन्यजीव अभयारण्य के भीतर एक 55 मीटर ऊंचा झरना है, जो अभयारण्य के भगोरा वन ब्लॉक में स्थित है। यह एक प्राकृतिक और वन्यजीवों से घिरी जगह है, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए खास आकर्षण है।

झरनों की खासियत

झरने का नामस्थान/जिलाऊंचाई (लगभग)विशेषता
हाथनी कुंडजयपुर70 से 80 फीटशहर के पास, शांत प्राकृतिक स्थल
अलेवा झरनाअलवर (राजगढ़)ऑफबीट, कई स्तरों में गिरता
भीमलट जलप्रपातबुंदी60 मीटर (150 फीट)कैन्यन, मंदिर, महाभारत कथा
मेनाल झरनाचित्तौड़गढ़50–150 फीटमंदिरों के बीच प्राकृतिक दृश्य
भील बेरी झरनादेवगढ़182 फीटजंगल, फोटोजेनिक, शांतिपूर्ण
हाथी भाटा झरनादौसाचट्टानों के बीच, छोटा लेकिन सुंदर
पदझर महादेव झरनाचित्तौड़गढ़ (रावतभाटा)लगभग 115 फीटमंदिर के पास, शांतिपूर्ण
टोडगढ़–राओली झरनाटोडगढ़–राओली अभयारण्य55 मीटरवन्यजीवों से घिरा, प्राकृतिक

इन झरनों की यात्रा का सबसे सही समय मानसून (जुलाई–सितंबर) है, जब अरावली की पहाड़ियां हरी हो उठती हैं और झरने पूरी ताकत से बहते हैं। यात्रा से पहले स्थानीय मौसम और सड़क स्थिति की जानकारी लेना जरूरी है, क्योंकि मानसून में रास्ते खस्ताहाल हो सकते हैं। इन छिपे हुए झरनों की खोज आपको राजस्थान का एक नया रूप दिखाती है और एक शांत, प्राकृतिक और कम भीड़-भाड़ वाला अनुभव भी देती है।

Updated on:
26 Aug 2026 06:34 pm
Published on:
26 Aug 2026 06:34 pm