
सुबह की पहली चुस्की अब सिर्फ नींद खोलने का काम नहीं करती, यह आपके शरीर और दिमाग को बेहतर बनाने का एक प्रयोग बन गई है। भारत में कॉफी अब सिर्फ स्वाद या आराम का के लिए नहीं पी जा रही है, अब यह बायोहैकिंग यानी अपनी बॉडी को स्मार्ट तरीके से ऑप्टिमाइज करने का एक नया जरिया बन गई है।
शहरों में कॉफी अब एक परफॉर्मेंस बूस्टर बन चुकी है। इसमें एडाप्टोजेन (तनाव कम करने वाले तत्व), नूट्रोपिक्स (दिमागी फोकस बढ़ाने वाले), MCT ऑयल (ऊर्जा के लिए), कोलेजन (सुंदरता के लिए), प्रोबायोटिक्स (पाचन के लिए) और मशरूम ब्लेंड जैसी चीजें शामिल हो रही हैं। यानी, कॉफी अब जगाने के साथ आपको बेहतर बनाने का दावा भी करती है।
भारत में यह ट्रेंड केवल शहरी कैफे तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया पर “प्रॉफी” यानी प्रोटीन-प्लस-कॉफी का चलन तेजी से बढ़ा है। यह फिटनेस प्रेमियों और व्यस्त पेशेवरों के बीच लोकप्रिय हो रहा है, क्योंकि यह एक ही कप में ऊर्जा और पोषण दोनों देता है। इसी तरह, स्टारबक्स ने जनवरी 2026 में भारत को पहला ऐसा देश बनाया, जहां उसने प्रोटीन कोल्ड फोम्स पेश किए। यह नॉन-डेयरी विकल्प के रूप में दुनिया में सबसे पहले भारत में उपलब्ध हुए।
कॉफी अब एक वैज्ञानिक प्रयोग का हिस्सा बन रही है। बेंगलुरु की Iom Bioworks नामक कंपनी कॉफी के भूसे (husk) से पेक्टिक ओलिगोसैकराइड्स (POS) नामक प्रीबायोटिक फाइबर बना रही है, जो गट-ब्रेन कनेक्शन को मजबूत करने में मदद कर सकता है। यह शोध-आधारित पहल है, और कंपनी ने जून 2025 में ₹4 करोड़ की सीड फंडिंग भी हासिल की है। कंपनी की टीम में सोनी एआई के सीटीओ डॉ. हिरोआकी किटानो जैसे नाम शामिल हैं और इसे 2025 में C‑CAMP की राष्ट्रीय बायो एंटरप्रेन्योरशिप प्रतियोगिता में पुरस्कार भी मिला है।
भारत में बायोहैकिंग अब केवल तकनीकी या महंगे प्रयोगों तक सीमित नहीं है। ब्लू‑लाइट ग्लासेस से लेकर ग्लूकोज मॉनिटर तक, लोग अपनी रोजमर्रा की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव कर रहे हैं। गूगल ट्रेंड्ज में “biohacking”, “cold plunge” और “intermittent fasting” जैसे शब्दों की खोज 2024–25 में लगातार बढ़ी है। यह दर्शाता है कि युवा वर्ग में यह ट्रेंड धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहा है।
Mint की रिपोर्ट बताती है कि बायोहैकिंग अब डेटा-ड्रिवन और पर्सनलाइज्ड हेल्थ के लिए एक संस्कृति बन रही है। इसमें स्टार्टअप्स, न्यूट्रास्यूटिकल कंपनियां, फंक्शनल मेडिसिन प्रैक्टिशनर, डायग्नोस्टिक सेंटर, न्यूट्रिशनिस्ट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शामिल हैं। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी भी दे रहे हैं कि सेलिब्रिटी-प्रेरित डाइट या सप्लीमेंट्स को बिना सावधानी के अपनाना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
भारत में कॉफी का स्वाद अब केवल पारंपरिक फिल्टर कॉफी तक सीमित नहीं रहा। स्पेशल्टी कॉफी, मैन्युअल ब्रूइंग, हल्के रोस्ट, फलों और मसालों के फ्लेवर, और माइक्रोलॉट्स जैसे विकल्प अब लोकप्रिय हो रहे हैं। साथ ही, कॉफी बोर्ड की रिपोर्ट बताती है कि 67% लोग मानते हैं कि भारत में कॉफी की खपत बढ़ रही है और 75% लोग कभी-ना-कभी कॉफी पीते हैं। घर पर कॉफी बनाना भी बढ़ा है, खासकर लॉकडाउन के बाद से, जब लोग कैफे से घर की ओर लौटे हैं।
यह ट्रेंड केवल दिखावा नहीं है। यह एक व्यवहारिक बदलाव है। लोग अपनी सेहत को नियंत्रित करना चाहते हैं और कॉफी इस बदलाव का एक आसान और स्वादिष्ट माध्यम बन गई है।
लेकिन सावधानी भी जरूरी है। विशेषज्ञ कहते हैं कि बायोहैकिंग तभी सुरक्षित है जब यह एक स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ हो, न कि उनके स्थान पर।