
दुनिया में शायद ही ऐसा कोई स्थान होगा, जहां भारतीय न हों। इसका अंदाजा विदेश मंत्रालय और विभिन्न वैश्विक रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। आंकड़ों के अनुसार, 207 देशों में 3.43 करोड़ भारतीय प्रोफेशनल्स रह रहे हैं। कोई भारतीय दूसरे देशों की कंपनी में नौकरी कर रहा है तो कुछ उस देश की राजनीति के बड़े नेता हैं। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, कुल भारतीय प्रवासियों में से 72.5% सिर्फ 10 देश में हैं। वहीं, शीर्ष 5 देशों में 52% भारतीय मूल के लोग रहते हैं।
भारतीय लोग दूसरे देशों में सदियों से कामकाज के सिलसिले में जाते रहे हैं। UN माइग्रेशन रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दुनिया में सबसे ज्यादा इंटरनेशनल माइग्रेंट्स का केंद्र है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय प्रवासी दुनिया के लगभग 207 देशों में रह रहे हैं। दुनिया भर में रहने वाले प्रवासी भारतीयों (NRIs) और भारतीय मूल के लोगों (PIOs) की कुल आबादी 3.43 करोड़ से अधिक है, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा डायस्पोरा यानी प्रवासी समुदाय बनाती है।
207 देशों में रह रहे कुल 3.43 करोड़ भारतीय प्रवासियों में से 72.5% सिर्फ 10 देश में हैं, जबकि शीर्ष 5 देशों में 52% भारतीय मूल के लोग रहते हैं। इनमें अमेरिका में सबसे ज्यादा 60.8 लाख भारतीय रहते हैं। इनमें 37,67,737 लोग भारतीय मूल (PIOs) के हैं और 23,11,484 प्रवासी भारतीय (NRIs) हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि भारतीय मूल के लोगों के लिए भारत के बाहर अमेरिका सबसे बड़ा घर है। 2012 से अमेरिका में यह संख्या 2.7 गुना बढ़ी है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, संयुक्त अरब अमिरात (UAE) भारतीयों का दूसरा सबसे बड़ा प्रवासी केंद्र है। UAE में 43.4 लाख भारतीय रहते हैं। इनमें 17,760 PIOs और 43,26,248 NRIs हैं। यूएई कुल जनसंख्या (1.10 करोड़ से 1.15 करोड़) में भारतीयों की हिस्सेदारी 35% से 38% है। इनमें से अधिकांश लोग निर्माण, सेवा क्षेत्र, शिक्षा, चिकित्सा और व्यापार से जुड़े काम में लगे हुए हैं। 2012 में UAE में यह संख्या 17.5 लाख थी जो अब बढ़कर 43.4 लाख हो गई है।
भारत और कनाडा के राजनीतिक रिश्ते भले ही आज बिगड़े हुए हैं। लेकिन, विदेश में भारतीयों के लिए कनाडा तीसरा सबसे बड़ा घर है। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, कनाडा में कुल 32.47 लाख प्रवासी भारतीय रहते हैं। इनमें भारतीय मूल के लोग (PIOs) 18,59,680 और प्रवासी भारतीय (NRIs) 13,88,300 हैं। कनाडा में रहने वाले भारतीय वहां की कुल आबादी में प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं।
भारतीय प्रवासी और छात्र कनाडा की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यहां ज्यादातर भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर, क्लाउड आर्किटेक्ट, डेटा साइंटिस्ट और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ के रूप में काम कर रहे हैं। इसके अलावा कनाडा में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी के कारण मेडिकल सेक्टर में भारतीय डॉक्टरों, रजिस्टर्ड नर्सों और लैब टेक्नीशियन की संख्या ज्यादा है।