
दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों की नई शुरुआत ने राजधानी की परिवहन व्यवस्था और पर्यावरणीय दिशा दोनों में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में इस क्षेत्र में कई बड़े कदम उठाए हैं, जो दिल्लीवासियों के लिए स्वच्छ हवा और आधुनिक सुविधाओं का वादा करते हैं।
मार्च 2026 में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 300 नई इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिससे दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बसों की संख्या 6,100 हो गई। इन बसों में CCTV, पैनिक बटन, रीयल‑टाइम ट्रैकिंग और दिव्यांगों के लिए सुविधाएं मिल रही हैं। इसके साथ ही, नानक्सर से गाजियाबाद तक एक अंतरराज्यीय E‑बस सेवा भी शुरू की गई।
इसके बाद जुलाई 2026 में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संयुक्त रूप से 300 और इलेक्ट्रिक बसों का उद्घाटन किया। इस समय DTC की कुल बसों की संख्या लगभग 6,600 हो गई, जिसमें 4,845 इलेक्ट्रिक और 1,755 सीएनजी बसें शामिल थीं। इस नए बेड़े में 195 नौ‑मीटर DEVI बसें और 105 बारह‑मीटर आधुनिक इलेक्ट्रिक बसें शामिल थीं। इससे पहले, फरवरी 2026 में दिल्ली सरकार ने पहले वर्षगांठ के अवसर पर 500 EV बसों का उद्घाटन किया था। जिससे कुल इलेक्ट्रिक बसों की संख्या 4,000 हो गई थी। साथ ही, दिल्ली‑पानीपत अंतरराज्यीय सेवा की शुरुआत भी की गई थी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बार‑बार कहा है कि इन बसों का उद्देश्य दिल्ली की हवा को स्वच्छ बनाना और कार्बन उत्सर्जन को कम करना है। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली सरकार ने EV नीति 2026 लागू की है, जो नई बसों को इलेक्ट्रिक बनाना अनिवार्य करती है। EV नीति 2026 के तहत, सरकार ने चार वर्षों में लगभग ₹4,000 करोड़ का बजट आवंटित किया है। सरकार ने EV बैटरी निस्तारण केंद्र जैसे बुनियादी ढांचे की भी योजना बनाई है। इस नीति में 4 पहिया वाहनों के लिए रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में छूट, स्क्रैपिंग प्रोत्साहन और डीबीटी के माध्यम से सब्सिडी की व्यवस्था शामिल है।
राजधानी में हुई इन पहलों को दिल्ली सरकार के 'ग्रीन बजट' का हिस्सा माना जा सकता है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण के लिए भारी निवेश किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछली सरकारों द्वारा छोड़ी गई वित्तीय जिम्मेदारियों को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ पूरा किया जा रहा है।
परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बताया कि नई बसों के साथ चार नए इलेक्ट्रिक बस डिपो (नरेला सेक्टर A‑1, A‑4, रिठाला और कोहाट एन्क्लेव) का भी ई‑उद्घाटन किया गया है, जिनकी क्षमता क्रमशः 250, 90 और 30 बसों की है। साथ ही, नंद नगरी में एक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का भी उद्घाटन हुआ है, जो प्रतिवर्ष 52,000 भारी और हल्के वाहनों तथा 20,000 दोपहिया वाहनों का फिटनेस परीक्षण कर सकता है।
ई-वाहनों की तरफ सरकार द्वारा बढ़ाए गए कदमों से दिल्लीवासियों को स्वच्छ हवा, बेहतर सार्वजनिक परिवहन और आधुनिक सुविधाएं मिल रही हैं। इलेक्ट्रिक बसों के आने से ध्वनि प्रदूषण कम हुआ है। यात्रा अधिक आरामदायक हुई है और प्रदूषण में कमी की उम्मीद बढ़ी है। इसके अलावा, सब्सिडी पोर्टल और डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों को सीधे लाभ मिल रहा है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और लोगों का भरोसा मजबूत हुआ है।
दिल्ली सरकार का लक्ष्य 2028‑29 तक लगभग 14,000 इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा तैयार करना है। साथ ही, स्कूल बसों का 30% इलेक्ट्रिक करना, चार पहिया वाहनों के लिए रोड टैक्स में छूट और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार भी नीति में शामिल है। इन पहलों का असर दिल्ली की वायु गुणवत्ता, यातायात व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं पर गहरा होगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली में EV बसों की शुरुआत और नीति‑निर्माण ने राजधानी को स्वच्छ, आधुनिक और टिकाऊ परिवहन की दिशा में आगे बढ़ाया है। यह पहल केवल बसों का परिवर्तन नहीं, बल्कि दिल्लीवासियों के जीवन‑स्तर और पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार की कहानी है। आने वाले वर्षों में यह बदलाव दिल्ली को एक हरित, स्मार्ट और नागरिक‑केन्द्रित शहर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।