
चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद कई बार ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) और वीवीपैट (वोटर वेरीफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो जाती है। पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में मतगणना के दौरान विभिन्न राजनीतिक दल तकनीकी प्रक्रियाओं, ईवीएम के डेटा मिलान और वीवीपैट पर्चियों की गिनती को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में यह समझना ज़रूरी है कि मतदान समाप्त होने के बाद चुनाव आयोग ईवीएम और वीवीपैट की सुरक्षा व मतगणना के लिए कौन-सी व्यवस्था अपनाता है।
मतदान समाप्त होने के बाद प्रत्येक मतदान केंद्र की कंट्रोल यूनिट (Control Unit), बैलेट यूनिट (Ballot Unit) और वीवीपैट मशीन को चुनाव अधिकारियों की मौजूदगी में सील किया जाता है। इसके बाद इन्हें निर्धारित स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखा जाता है।
स्ट्रॉन्ग रूम पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की चौबीसों घंटे निगरानी रहती है। वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जाते हैं और सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधियों को निगरानी रखने की अनुमति भी दी जाती है। स्ट्रॉन्ग रूम तभी खोला जाता है, जब मतगणना शुरू होने वाली होती है।
मतगणना के दिन सबसे पहले सीलबंद स्ट्रॉन्ग रूम राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में खोला जाता है। इसके बाद संबंधित विधानसभा क्षेत्र के अनुसार मशीनों को काउंटिंग हॉल तक पहुंचाया जाता है।
प्रत्येक काउंटिंग टेबल पर निर्धारित मतदान केंद्रों की मशीनें लाई जाती हैं। अधिकारियों की ओर से मशीनों के सीरियल नंबर और सील की जांच की जाती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वही मशीनें लाई गई हैं, जिनका उपयोग मतदान में हुआ था।
मतगणना के दौरान चुनाव आयोग कई स्तरों पर डेटा का मिलान करता है।
पहला स्तर: दस्तावेज़ और सील का सत्यापन
मशीनों के सीरियल नंबर, सील और मतदान केंद्र के रिकॉर्ड का मिलान किया जाता है।
कंट्रोल यूनिट में दर्ज कुल वोटों की संख्या का मतदान दिवस के रिकॉर्ड, विशेष रूप से फ़ॉर्म 17सी, से मिलान किया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के कम-से-कम पांच यादृच्छिक रूप से चुने गए मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों की हाथ से गिनती की जाती है और उसका मिलान ईवीएम के परिणाम से किया जाता है।
वीवीपैट ऐसी व्यवस्था है, जिसमें मतदाता द्वारा वोट डालने के बाद कुछ सेकंड के लिए एक पर्ची दिखाई देती है। इसमें उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिह्न दिखाई देता है, जिससे मतदाता पुष्टि कर सकता है कि उसका वोट सही उम्मीदवार के पक्ष में दर्ज हुआ है।
यह पर्ची मशीन के भीतर सुरक्षित रहती है और आवश्यकता पड़ने पर इसकी गिनती की जा सकती है।
कई बार राजनीतिक दल मतगणना के दौरान कुछ मशीनों के डेटा, सील या प्रक्रिया को लेकर आपत्ति दर्ज करवाते हैं। कुछ मामलों में पुनर्गणना की मांग भी की जाती है। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि हर आपत्ति को निर्धारित नियमों के अनुसार दर्ज किया जाता है और संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर आवश्यक जांच के बाद निर्णय लेते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार अधिकतर विवाद प्रक्रिया की पारदर्शिता और भरोसे से जुड़े होते हैं, जबकि चुनाव आयोग का दावा है कि बहु-स्तरीय सुरक्षा और सत्यापन व्यवस्था के कारण मतदान और मतगणना की प्रक्रिया सुरक्षित रहती है।
सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर वीवीपैट सत्यापन को लेकर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई की है। अदालत ने चुनाव आयोग की व्यवस्था को बरकरार रखते हुए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के पांच मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों के मिलान की मौजूदा व्यवस्था जारी रखी है। अदालत ने यह भी कहा है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता के विश्वास को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
मतगणना की प्रमुख प्रक्रियाएं
चरण
क्या होता है?
स्ट्रॉन्ग रूम
सीलबंद ईवीएम सुरक्षित रखी जाती है
सील सत्यापन
अधिकारियों और एजेंटों की मौजूदगी में जांच
डेटा मिलान
फ़ॉर्म 17सी और ईवीएम रिकॉर्ड का मिलान
वीवीपैट जांच
पांच यादृच्छिक बूथों की पर्चियों की गिनती
परिणाम घोषणा
कुल मिला कर भारत में ईवीएम और वीवीपैट आधारित चुनाव प्रणाली कई सुरक्षा परतों के साथ संचालित होती है। स्ट्रॉन्ग रूम सुरक्षा, दस्तावेज़ों का मिलान, मशीनों का सत्यापन और वीवीपैट जांच जैसी प्रक्रियाओं का उद्देश्य चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है। वहीं राजनीतिक दलों द्वारा उठाए जाने वाले सवाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, जिनका समाधान निर्धारित चुनावी नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाता है।