
आंखों में धुंधलापन, अचानक रोशनी की चमक दिखाई देना, नजरों के सामने काले धब्बे तैरना या आंख की पुतली के आकार में बदलाव होना सामान्य समस्याओं जैसे लग सकते हैं। लेकिन कुछ मामलों में ये आंखों के कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के संकेत भी हो सकते हैं। हालांकि, हर ऐसा लक्षण कैंसर का संकेत नहीं होता।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आंखों में लगातार या अचानक होने वाले बदलावों की समय पर जांच बेहद जरूरी है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी (ACS) के अनुसार, आंखों के कुछ कैंसर शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाते। कई बार नियमित नेत्र परीक्षण के दौरान ही इनका पता चलता है। बीमारी की समय पर पहचान आंख और दृष्टि बचाने की संभावनाओं को बेहतर बना सकती है।
अमेरिकन कैंसर सोसायटी ने अनुमान लगाया है कि वर्ष 2026 में अमेरिका में आंख और नेत्रगुहा (Eye Orbit) के प्राथमिक कैंसर के लगभग 3,200 नए मामले सामने आ सकते हैं। इनमें 1,720 पुरुष और 1,480 महिलाएं शामिल हैं। इस बीमारी से लगभग 530 मौतों का भी अनुमान है। वयस्कों में आंख के भीतर होने वाले प्राथमिक कैंसर का सबसे सामान्य प्रकार इंट्राऑक्युलर मेलानोमा है। यह आंख की मध्य परत के ऊतकों में विकसित होता है। बच्चों में रेटिनोब्लास्टोमा जैसे अलग प्रकार के कैंसर पाए जा सकते हैं।
अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, आंख की रंगीन परत यानी आइरिस पर काले धब्बे का बढ़ना, पुतली के आकार में परिवर्तन, धुंधली या विकृत दृष्टि और देखने के क्षेत्र का कुछ हिस्सा गायब होना संभावित चेतावनी संकेत हैं।
इसके अलावा आंखों के सामने तैरते धब्बे (Floaters), अचानक चमकती रोशनी (Flashes), आंख का असामान्य रूप से उभरना या उसकी स्थिति में बदलाव भी जांच कराने के कारण हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि आंखों का मेलानोमा कई बार बिना दर्द के विकसित होता है। इसलिए दर्द न होने का मतलब यह नहीं कि आंख में कोई गंभीर समस्या नहीं है।
आंखों के संक्रमण, मोतियाबिंद, उम्र संबंधी बदलाव और रेटिना की समस्याओं में भी धुंधली दृष्टि या अन्य परेशानी हो सकती है। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर कैंसर की पहचान करना संभव नहीं है। अमेरिका के नेशनल आई इंस्टीट्यूट (NEI) के मुताबिक, अचानक बहुत सारे नए फ्लोटर्स दिखाई देना, रोशनी चमकना या नजर के सामने पर्दे जैसी छाया आना रेटिना डिटैचमेंट का संकेत भी हो सकता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है और इसमें तत्काल उपचार जरूरी है।
अमेरिकी नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) के मुताबिक, संदिग्ध मामलों में नेत्र विशेषज्ञ आंख की पुतली को दवा की मदद से फैलाकर रेटिना और आंतरिक संरचनाओं की जांच करते हैं। आवश्यकतानुसार स्लिट-लैंप परीक्षण, अल्ट्रासाउंड, ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (OCT) और अन्य इमेजिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनसे संदिग्ध ट्यूमर की स्थिति, आकार और मोटाई का आकलन किया जाता है। हर मामले में बायोप्सी जरूरी नहीं होती। अनुभवी विशेषज्ञ कई बार विस्तृत नेत्र परीक्षण और इमेजिंग के आधार पर ही बीमारी की पहचान कर सकते हैं।
आंखों के कैंसर का उपचार उसके प्रकार, आकार, स्थान और फैलाव पर निर्भर करता है। कुछ मरीजों में रेडिएशन थेरेपी, सर्जरी या विशेष परिस्थितियों में अन्य स्थानीय उपचार किए जा सकते हैं। चिकित्सकों का लक्ष्य कैंसर को नियंत्रित करना, जीवन की रक्षा करना और जहां संभव हो, आंख तथा दृष्टि को सुरक्षित रखना होता है। कुछ कैंसर शरीर के दूसरे अंगों तक फैल सकते हैं। वहीं स्तन और फेफड़ों के कैंसर भी कभी-कभी आंख तक पहुंच सकते हैं।
यदि आंख में काला धब्बा बढ़ रहा हो, दृष्टि लगातार बदल रही हो या पुतली का आकार असामान्य दिखाई दे, तो नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराएं। अचानक दृष्टि कम होना, तेज चमक, बड़ी संख्या में नए फ्लोटर्स या पर्दे जैसी छाया दिखना तत्काल चिकित्सा सहायता लेने का संकेत है। विशेषज्ञों की सलाह है कि आंखों के असामान्य बदलावों को केवल उम्र, थकान या मोबाइल स्क्रीन के इस्तेमाल का असर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर सही जांच गंभीर बीमारी की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
(डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत होने पर डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)