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पाइप्ड गैस में ग्रीन हाइड्रोजन की बढ़ती हिस्सेदारी, CGD नेटवर्क में तेज़ हो रहे पायलट प्रोजेक्ट

Green Hydrogen की मदद से सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को कम-कार्बन बनाने की कोशिश तेज़ हो रही है। 5 से 10% तक हाइड्रोजन ब्लेंडिंग वाले पायलट प्रोजेक्ट भविष्य की स्वच्छ गैस व्यवस्था का रास्ता दिखा रहे हैं।
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Aug 18, 2026
Green Hydrogen News
पाइप्ड गैस में ग्रीन हाइड्रोजन की नई शुरुआत, 5 से 10% ब्लेंडिंग पर जोर। ( फोटो: AI)

भारत स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ते कदमों के बीच प्राकृतिक गैस नेटवर्क में ग्रीन हाइड्रोजन की ब्लेंडिंग को लेकर प्रयोग तेज़ कर रहा है। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क में हाइड्रोजन मिलाने का उद्देश्य प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना और मौजूदा गैस ढांचे को भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा के लिए तैयार करना है। हालांकि, अलग-अलग पाइपलाइन, दबाव, उपकरण और अंतिम उपयोग के आधार पर हाइड्रोजन की सुरक्षित ब्लेंडिंग सीमा अलग हो सकती है। इसलिए फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट और तकनीकी अध्ययन इस क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

क्या है ग्रीन हाइड्रोजन ब्लेंडिंग?

ग्रीन हाइड्रोजन वह हाइड्रोजन है, जिसे नवीकरणीय ऊर्जा से पैदा हुई बिजली का इस्तेमाल करके पानी के इलेक्ट्रोलिसिस के जरिए बनाया जाता है। इसमें प्राकृतिक गैस की तरह सीधे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता नहीं होती। जब इस हाइड्रोजन को प्राकृतिक गैस में एक निश्चित अनुपात में मिलाकर पाइपलाइन के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाता है, तो इसे हाइड्रोजन ब्लेंडिंग कहा जाता है।

इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके लिए हर जगह बिल्कुल नया गैस नेटवर्क तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ सकती। मौजूदा नेटवर्क की तकनीकी क्षमता के अनुरूप सीमित मात्रा में हाइड्रोजन मिलाकर धीरे-धीरे स्वच्छ ईंधन की हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता तैयार किया जा सकता है।

भारत में शुरुआत कैसे हुई?

भारत में सिटी गैस नेटवर्क में हाइड्रोजन ब्लेंडिंग की दिशा में शुरुआती महत्वपूर्ण कदम GAIL ने उठाया। फरवरी 2022 में GAIL ने मध्य प्रदेश के इंदौर में प्राकृतिक गैस प्रणाली में हाइड्रोजन मिलाने की पायलट परियोजना शुरू की थी। इस परियोजना के तहत हाइड्रोजन मिश्रित प्राकृतिक गैस की आपूर्ति Avantika Gas Limited के नेटवर्क में की गई। शुरुआती चरण में ग्रे हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया गया था, जिसे बाद में ग्रीन हाइड्रोजन से बदलने की योजना थी।

सरकार के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य हाइड्रोजन को CGD नेटवर्क में मिलाने की तकनीकी और व्यावसायिक व्यवहार्यता को समझना तथा भविष्य के लिए जरूरी मानक और नियामकीय ढांचा विकसित करना था।

दिसंबर 2023 में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने बताया था कि इंदौर में PNG नेटवर्क में 5 वॉल्यूम प्रतिशत तक हाइड्रोजन ब्लेंडिंग की जा रही थी, जबकि CNG नेटवर्क में 2 प्रतिशत हाइड्रोजन ब्लेंडिंग का उल्लेख किया गया था।

5 से 10 प्रतिशत ब्लेंडिंग क्यों महत्वपूर्ण?

CGD नेटवर्क में 5 से 10 प्रतिशत तक हाइड्रोजन मिलाने की चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे मौजूदा गैस प्रणाली में स्वच्छ ईंधन की हिस्सेदारी बढ़ाने की संभावना बनती है। हालांकि, इसे पूरे देश के लिए एक समान और तत्काल लागू होने वाली सीमा नहीं माना जा सकता।

पाइपलाइन की सामग्री, गैस का दबाव, वाल्व, मीटर, रेगुलेटर और उपभोक्ता उपकरण हाइड्रोजन ब्लेंडिंग की क्षमता को प्रभावित करते हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग नेटवर्क और उपकरणों के लिए सहनशीलता अलग हो सकती है। रिपोर्ट में कुछ MDPE आधारित पायलट नेटवर्क में 5 प्रतिशत तक ब्लेंडिंग और एक परियोजना में इसे 8 प्रतिशत तक बढ़ाए जाने का उल्लेख है।

यानी 5 से 10 प्रतिशत की ब्लेंडिंग को व्यापक लक्ष्य या संभावित स्तर के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन वास्तविक सीमा नेटवर्क की तकनीकी जांच और नियामकीय मंजूरी के बाद ही तय होगी।

अहमदाबाद में भी शुरू हुआ पायलट

ग्रीन हाइड्रोजन ब्लेंडिंग की दिशा में गुजरात में भी महत्वपूर्ण प्रयोग हुआ है। Adani Total Gas Limited ने नवंबर 2023 में अहमदाबाद में ग्रीन हाइड्रोजन ब्लेंडिंग पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की घोषणा की थी। परियोजना में 4,000 से अधिक घरेलू और व्यावसायिक PNG उपभोक्ताओं को शामिल करने की योजना थी।

पानी के इलेक्ट्रोलिसिस से ग्रीन हाइड्रोजन तैयार किया जाना था

कंपनी के अनुसार, इस परियोजना में नवीकरणीय ऊर्जा से बनी बिजली के जरिए पानी के इलेक्ट्रोलिसिस से ग्रीन हाइड्रोजन तैयार किया जाना था। ब्लेंडिंग का अनुपात चरणबद्ध तरीके से बढ़ा कर 8 प्रतिशत या उससे अधिक करने की संभावना बताई गई थी, हालांकि इसके लिए नियामकीय मंजूरी जरूरी थी। कंपनी ने अनुमान लगाया था कि 8 प्रतिशत तक हाइड्रोजन ब्लेंडिंग से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 4 प्रतिशत तक कमी हो सकती है।

NTPC ने भी दिखाई थी रुचि

भारत में CGD नेटवर्क के डीकार्बोनाइजेशन के लिए NTPC ने भी पायलट प्रोजेक्ट की पहल की थी। अगस्त 2021 में NTPC ने प्राकृतिक गैस के साथ हाइड्रोजन ब्लेंडिंग के पायलट प्रोजेक्ट के लिए वैश्विक Expression of Interest जारी किया था। इसका उद्देश्य भारत के प्राकृतिक गैस ग्रिड को कम कार्बन वाला बनाने की संभावनाओं का अध्ययन करना था।

इस तरह GAIL, NTPC और अन्य गैस कंपनियों के प्रयासों से यह क्षेत्र धीरे-धीरे प्रयोगात्मक स्तर से तकनीकी मूल्यांकन और मानक तैयार करने की दिशा में बढ़ रहा है।

सबसे बड़ी चुनौती है सुरक्षा

हाइड्रोजन बहुत हल्की गैस है और इसके भौतिक गुण प्राकृतिक गैस से अलग हैं। इसलिए पाइपलाइन और उपकरणों पर इसका प्रभाव समझना जरूरी है। हर पाइपलाइन में एक समान मात्रा में हाइड्रोजन मिलाना संभव नहीं माना जा सकता।

PNGRB की तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार, पाइपलाइन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और अंतिम उपयोग के उपकरण हाइड्रोजन ब्लेंडिंग की सीमा तय करने में महत्वपूर्ण हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारतीय CGD नेटवर्क में ब्लेंडिंग की भविष्य की सीमा तय करने के लिए तकनीकी अध्ययन और पायलट परियोजनाओं के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे।

इसके अलावा गैस के दहन व्यवहार, मीटरिंग, रेगुलेटर, सील, पाइपलाइन सामग्री और उपभोक्ता उपकरणों की अनुकूलता की जांच भी जरूरी होगी।

उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?

आम घरेलू PNG उपभोक्ता के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि हाइड्रोजन मिश्रित गैस से खाना पकाने या अन्य घरेलू इस्तेमाल पर क्या असर पड़ेगा। इसका जवाब ब्लेंडिंग के अनुपात और इस्तेमाल किए जा रहे उपकरणों पर निर्भर करेगा।

हाइड्रोजन का ऊर्जा घनत्व प्राकृतिक गैस की तुलना में अलग होता है। इसलिए समान मात्रा में गैस मिश्रण से मिलने वाली ऊर्जा में बदलाव हो सकता है। इसी कारण पायलट परियोजनाओं में सिर्फ पाइपलाइन ही नहीं, बल्कि अंतिम उपयोग के उपकरणों और दहन प्रक्रिया की भी निगरानी की जाती है।

यदि भविष्य में बड़े पैमाने पर ब्लेंडिंग की अनुमति मिलती है, तो गैस नेटवर्क और घरेलू उपकरणों के लिए स्पष्ट तकनीकी मानक तैयार करना जरूरी होगा।

कार्बन उत्सर्जन घटाने की संभावना

ग्रीन हाइड्रोजन ब्लेंडिंग का मुख्य उद्देश्य गैस नेटवर्क को पूरी तरह बदलना नहीं, बल्कि उसमें धीरे-धीरे कम-कार्बन ईंधन की हिस्सेदारी बढ़ाना है। प्राकृतिक गैस में कुछ मात्रा में ग्रीन हाइड्रोजन मिलाने से मिश्रण में जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी घट सकती है।

हालांकि, वास्तविक पर्यावरणीय लाभ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि इस्तेमाल किया गया हाइड्रोजन वास्तव में कितनी स्वच्छ ऊर्जा से तैयार हुआ है। यदि हाइड्रोजन उत्पादन में नवीकरणीय बिजली का इस्तेमाल किया जाता है, तो इसका जलवायु लाभ अधिक हो सकता है।

अब आगे क्या होगा?

भारत में हाइड्रोजन ब्लेंडिंग अभी विकास और परीक्षण के चरण में है। PNGRB की रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग पाइपलाइन सामग्री और अंतिम उपयोग के लिए सुरक्षित ब्लेंडिंग सीमा निर्धारित करने पर तकनीकी अध्ययन जारी हैं। पायलट परियोजनाओं के परिणाम भविष्य की नीति और मानकों के निर्माण में महत्वपूर्ण होंगे।

ब्लेंडिंग की संभावनाओं पर चर्चा बढ़ सकती है

आने वाले समय में 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत या उससे अधिक ब्लेंडिंग की संभावनाओं पर चर्चा बढ़ सकती है, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करना होगा। पहले नेटवर्क की सुरक्षा, उपकरणों की अनुकूलता, गैस की गुणवत्ता, उपभोक्ता सुरक्षा और लागत का आकलन जरूरी होगा।

ग्रीन हाइड्रोजन की ब्लेंडिंग: भारत के ऊर्जा संक्रमण का एक संभावित रास्ता

बहरहाल, पाइप्ड गैस में ग्रीन हाइड्रोजन की ब्लेंडिंग भारत के ऊर्जा संक्रमण का एक संभावित रास्ता है। यदि पायलट परियोजनाओं से तकनीकी और आर्थिक रूप से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं, तो मौजूदा CGD नेटवर्क को स्वच्छ ऊर्जा के साथ जोड़ने का दायरा आने वाले वर्षों में बढ़ सकता है।

Updated on:
19 Aug 2026 02:41 pm
Published on:
18 Aug 2026 06:41 pm