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सरकार का बड़ा फैसला; लद्दाख के किसानों की चमकेगी किस्मत, सिंधु और सुरु नदी पर बनेंगे 36 चेक डैम

केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन लेह और कारगिल में 36 चेक डैम (छोटे बांध) बनाने की योजना पर काम कर रहा है। सरकार की इस योजना से लद्दाख के कुछ हिस्सों में किसानों को जल्द ही सिंचाई के लिए बेहतर और भरोसेमंद पानी मिल सकेगा।
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Sep 05, 2026
plan to build check dams in ladakh
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

लद्दाख के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने लेह और कारगिल में कुल 36 चेक डैम (छोटे बांध) बनाने का प्रस्ताव केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को भेजा है, ताकि नदियों और ग्लेशियरों से पिघलने वाले पानी को बेकार बहने से रोक कर उसका सही इस्तेमाल किया जा सके। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के निर्देश पर तैयार यह प्रस्ताव फिलहाल मंत्रालय के विचाराधीन है। अभी इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है।

किसानों के लिए प्रस्ताव में क्या है खास?

केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को भेजे गए प्रस्ताव के मुताबिक, लेह क्षेत्र के लिए 7 हिमालयन रॉक चेक डैम और कारगिल के लिए 29 रीइन्फोर्स्ड सीमेंट कंक्रीट (RCC) चेक डैम या वियर बनाए जाने हैं। इन सभी परियोजनाओं पर 56 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने का अनुमान है। इन्हें प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत शामिल करने का प्रस्ताव है।

लद्दाख प्रशासन द्वारा मंत्रालय को सौंपी गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के अनुसार, इन 36 चेक डैम से 18,600 एकड़ से अधिक जमीन को सिंचाई का लाभ मिलने की उम्मीद है। परियोजनाएं सिंधु नदी (लेह) और सुरु नदी (कारगिल) के पानी को रोकने व मौजूदा सिंचाई नेटवर्क को मजबूत करने पर केंद्रित होंगी। प्रशासन का यह भी कहना है कि लद्दाख में हर साल गिरने वाली बर्फ और ग्लेशियरों से मिलने वाले पानी का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा फिलहाल इस्तेमाल हो पाता है, जो जल-प्रबंधन में सुधार की बड़ी गुंजाइश दिखाता है।

सिंधु नदी का बना प्रोजेक्ट बना आधार

जल शक्ति मंत्रालय को भेजा गया प्रस्ताव सिंधु नदी पर पहले ही हो चुके एक सफल प्रयोग के बाद तैयार किया गया है। लद्दाख प्रशासन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 27 मई 2026 को उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लेह से करीब 44 किलोमीटर दूर, 11,400 फीट की ऊंचाई पर स्थित उपशी में देश का पहला रॉक चेक डैम सिंधु नदी पर बनवाकर उसका उद्घाटन किया।

इसे उन्होंने "सिंधु जल समृद्धि अभियान (SJSA)" नाम दिया है। खास बात यह है कि नदी के किनारे व आसपास से जुटाए गए बड़े प्राकृतिक पत्थरों से बने इस ढांचे में सीमेंट का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं हुआ। इससे सिंधु नदी का जलस्तर करीब 10 फीट तक बढ़ गया और करीब 4 करोड़ लीटर (40 मिलियन लीटर) पानी का भंडार तैयार हो गया, जिसे इगू-फे सिंचाई नहर के जरिए आसपास के सूखा-प्रभावित गांवों के खेतों तक पहुंचाया जा रहा है। उपराज्यपाल ने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग को एक महीने के भीतर प्रायोगिक तौर पर तीन और ऐसे चेक डैम बनाने के निर्देश भी दिए थे।

दरअसल, लद्दाख में कई जगह सिंधु नदी इतनी उथली हो जाती है कि सामान्य पंप व मोटर से पानी को ऊंचाई पर स्थित खेतों तक नहीं पहुंचाया जा सकता। ऐसे में चेक डैम से बना बड़ा जलाशय क्षेत्र बुआई के मुख्य मौसम में पानी की कमी की समस्या को काफी हद तक दूर कर सकता है।

केंद्र सरकार से मिल रहा सहयोग

बीते मई महीने में ही उपराज्यपाल सक्सेना ने नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से मुलाकात कर लद्दाख की जल परियोजनाओं पर चर्चा की थी, जिसमें उन्होंने "प्रोजेक्ट हिम सरोवर" की जानकारी भी दी। यह बर्फ और ग्लेशियर के पिघले पानी को संरक्षित करने के लिए गांवों में जल-भंडारण तालाब बनाने की एक अलग पहल है, जिसके पहले चरण में 50 तालाब बनाए जा रहे हैं। केंद्र ने लद्दाख की विभिन्न जल परियोजनाओं के लिए पहले ही 8.75 करोड़ रुपये की सहायता भी मंजूर की है।

सिंधु जल संधि से जुड़ा रणनीतिक पहलू

कई मीडिया रिपोर्टों में इस परियोजना को सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को भारत द्वारा स्थगित रखे जाने के व्यापक संदर्भ में भी देखा जा रहा है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि को स्थगित कर दिया था। कुछ रिपोर्टों का कहना है कि सीमा पार जाने से पहले सिंधु और उसकी सहायक नदियों के पानी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में यह परियोजना भी एक कदम मानी जा रही है, हालांकि लद्दाख प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर इसे मुख्य रूप से किसानों की सिंचाई जरूरतों से जुड़ी योजना बताया है।

क्यों जरूरी है यह पहल?

लद्दाख का भूगोल अपने आप में एक चुनौती है। ऊंचाई पर बसा यह ठंडा रेगिस्तान बर्फ और ग्लेशियरों से घिरा तो है, लेकिन बारिश यहां न के बराबर होती है। खेती पूरी तरह ग्लेशियर के पिघले पानी पर निर्भर है। वसंत में बुआई के वक्त ही अक्सर नदियों का जलस्तर सबसे कम होता है, जब किसानों को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

पारंपरिक पंप और मोटरें गहरी घाटियों से पानी खींचने में नाकाम रहती हैं। इसलिए स्थानीय स्तर पर पानी रोककर उसका जलस्तर बढ़ाने वाले चेक डैम जैसी तकनीक को व्यावहारिक समाधान माना जा रहा है। प्रस्ताव को PMKSY के तहत शामिल कराने की कोशिश इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे केंद्रीय वित्तीय सहायता मिलने का रास्ता खुलता है, जो लद्दाख जैसे कम आबादी और सीमित संसाधनों वाले केंद्र शासित प्रदेश के लिए बड़ी परियोजनाओं को अमल में लाने के लिए जरूरी है।

Updated on:
05 Sept 2026 04:48 pm
Published on:
05 Sept 2026 04:48 pm