
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को लेकर लगातार उठते सवालों के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में बड़े पैमाने पर ढांचागत बदलाव का ऐलान किया है। शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए प्रश्नपत्रों की जांच 4-स्तरीय व्यवस्था के तहत कराने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही परीक्षा टीम में भारी फेरबदल किया गया है। अब परीक्षा एजेंसी के कार्यालयों की सुरक्षा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के हवाले की जा रही है। सरकार का दावा है कि इन कदमों से परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और फूल-प्रूफ बनाया जा सकेगा।
केंद्र सरकार ने परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। सरकार ने यह फैसला अचानक नहीं लिया। सरकार के निर्णय के पीछे NEET पेपर लीक जैसे मुद्दे शामिल हैं। सरकार, मेडिकल स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए होने वाली नीट-यूजी 2026 परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के आरोपों से घिरी रही। इसके बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा और प्रह्लाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री बनाया गया।
इसके बाद जून 2026 में हुई UGC-नेट परीक्षा में भी गंभीर खामियां सामने आईं। अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र विषयों के प्रश्नपत्रों को लेकर अभ्यर्थियों और विशेषज्ञों की भारी शिकायतें मिलने पर NTA ने एक जांच समिति गठित की। NTA की जांच समिति ने पाया कि इन तीनों पेपरों में व्यापक त्रुटियां थीं। नतीजतन 22 से 30 जून के बीच हुई ये परीक्षाएं रद्द कर दोबारा कराने का फैसला लिया गया। इस पूरे प्रकरण को लेकर विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने सरकार व एजेंसी की तीखी आलोचना की थी।
लगातार बढ़ते दबाव के बीच शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की अध्यक्षता में बीते सोमवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने एजेंसी द्वारा अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी मंत्रालय को दी। बैठक के बाद मंत्रालय ने साफ निर्देश दिया कि आगामी सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित आयोजन के लिए हर जरूरी सुरक्षा ढांचा और आधुनिक संसाधन तुरंत उपलब्ध कराए जाएं। इसी के तहत प्रश्नपत्र तैयार करने और उन्हें अंतिम रूप देने की पूरी प्रक्रिया को अब 4 अलग-अलग स्तरों पर परखा जाएगा, ताकि तथ्यात्मक गलतियां, टाइपिंग की चूक, सवालों की पुनरावृत्ति जैसी खामियां परीक्षा से पहले ही पकड़ी जा सकें।
पारदर्शिता बढ़ाने के इरादे से NTA ने प्रश्नपत्र बनाने वाले करीब 600 पुराने विशेषज्ञों को पैनल से हटाकर उनकी जगह नए विशेषज्ञों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे पहले एजेंसी ने अपने 50 से अधिक कर्मचारियों को भी हटाया था। इसके साथ ही मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTO), मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO), मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी (CISO), जनरल मैनेजर (परीक्षा सुरक्षा) और जनरल मैनेजर (शोध व साइकोमेट्रिक्स) समेत दस नए प्रमुख पदों के लिए विज्ञापन जारी किए गए हैं। इससे पहले भी चार नए जनरल मैनेजर और 16 युवा पेशेवरों की भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला जा चुका है। मंत्रालय के मुताबिक साइबर सुरक्षा, साइकोमेट्रिक्स और प्रश्नपत्र-निर्माण जैसे क्षेत्रों में निजी क्षेत्र से भी विशेषज्ञों को जोड़ा जा रहा है, और अगले दो-तीन हफ्तों में 20-25 नए अधिकारी एजेंसी से जुड़ेंगे।
भौतिक सुरक्षा के मोर्चे पर भी बड़ा बदलाव किया जा रहा है। NTA के कार्यालयों को युद्धस्तर पर नए परिसरों में स्थानांतरित किया जाएगा और वहां केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की तैनाती होगी। 1969 में गठित CISF देश का प्रमुख औद्योगिक व अधोसंरचना सुरक्षा बल है, जो गृह मंत्रालय के अधीन काम करता है। संवेदनशील दस्तावेजों, प्रश्नपत्रों के भंडारण और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा अब इसी बल के जिम्मे होगी, जिससे लीक जैसी घटनाओं की आशंका को कम करने की कोशिश की जा रही है।
सवाल यह है कि क्या ये प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी कदम वाकई परीक्षा प्रणाली की उन खामियों को दूर कर पाएंगे, जिन्होंने बीते वर्षों में नीट, जेईई और यूजीसी-नेट जैसी बड़ी परीक्षाओं की साख को नुकसान पहुंचाया। विश्लेषकों का मानना है कि चार-स्तरीय जांच और विशेषज्ञों की नई नियुक्ति से प्रश्नपत्र निर्माण की गुणवत्ता में सुधार जरूर आ सकता है, लेकिन असली चुनौती इन सुधारों को लगातार और पारदर्शी तरीके से लागू करते रहने की होगी।
विपक्ष और छात्र संगठनों ने पहले ही आरोप लगाया है कि केवल विशेषज्ञ बदलने या सुरक्षा बल तैनात करने भर से जवाबदेही तय नहीं होती, जब तक कि रद्द हुई परीक्षाओं और अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच पूरी होकर दोषियों पर कार्रवाई न हो। मंत्रालय ने NTA को अपनी पूरी परीक्षा प्रक्रियाओं का ऑडिट करने और सुधारात्मक कदमों पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश भी दिया है, जिससे आने वाले महीनों में इन बदलावों की वास्तविक जमीनी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
सरकार का जोर लाखों छात्रों के भरोसे को फिर से बहाल करने पर है, जो हर साल नीट-यूजी, जेईई और सीयूईटी जैसी परीक्षाओं के जरिए अपने भविष्य का फैसला करते हैं। चार-स्तरीय जांच व्यवस्था, नई विशेषज्ञ टीम और CISF की सुरक्षा, ये तीनों कदम मिलकर यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि सरकार परीक्षा प्रणाली की खामियों को गंभीरता से ले रही है। इसका असली इम्तिहान आने वाले सत्रों में होने वाली बड़ी परीक्षाओं के दौरान ही होगा।