
अक्सर लोग डॉक्टर के पास तभी जाते हैं जब शरीर में कोई दर्द, बुखार या गंभीर लक्षण नजर आने लगते हैं। मेडिकल साइंस में इसे ‘रिएक्टिव हेल्थकेयर’ कहा जाता है। हालांकि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, गलत खानपान और खराब स्लीप साइकिल के दौर में सबसे ज्यादा जरूरत ‘प्रिवेंटिव हेल्थकेयर’ यानी बीमारी होने से पहले ही सतर्क रहने की है।
डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर, हार्ट ब्लॉकेज और कैंसर जैसी बीमारियां शरीर में रातोंरात नहीं पनपतीं। ये सालों तक ‘साइलेंट किलर’ की तरह अंदर ही अंदर बढ़ती रहती हैं। अगर सही उम्र में सही मेडिकल टेस्ट करवा लिए जाएं, तो गंभीर बीमारियों को समय रहते पकड़ा और पूरी तरह रोका जा सकता है।
मेडिकल रिर्पोट्स के अनुसार, 25 से लेकर 50+ की उम्र के बीच शरीर का मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल संतुलन कई चरणों से गुजरता है। यहां समझें कि उम्र के किस पड़ाव पर आपको कौन से टेस्ट जरूर करवाने चाहिए।
20 से 25 साल की उम्र में लोग खुद को सबसे ज्यादा फिट और ऊर्जावान महसूस करते हैं। इसी वजह से ज्यादातर युवा इस उम्र में मेडिकल चेकअप को फिजूल मानते हैं। मेडिकल साइंस के मुताबिक, 25 की उम्र में शरीर का एक ‘हेल्थ बेसलाइन’ तैयार होना बेहद जरूरी है, जिससे आने वाले सालों में स्वास्थ्य की तुलना की जा सके।
क्यों जरूरी है जांच: आजकल युवाओं में डेस्क जॉब, देर रात तक जागना और जंक फूड का सेवन आम है। इसके चलते कम उम्र में ही विटामिन की कमी, शुरुआती इंसुलिन रेजिस्टेंस और कोलेस्ट्रॉल की समस्या देखने को मिल रही है।
जरूरी टेस्ट की लिस्ट:
35 की उम्र शरीर के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट मानी जाती है। इस उम्र के बाद मेटाबॉलिक रेट धीमा होने लगता है, शारीरिक सक्रियता कम हो जाती है और पारिवारिक व करियर की जिम्मेदारियों के चलते मानसिक तनाव बढ़ता है।
क्यों जरूरी है जांच: इस उम्र में लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के शुरुआती लक्षण उभरने लगते हैं। फैटी लिवर और बॉर्डरलाइन हाइपरटेंशन जैसी दिक्कतें इसी दौरान सबसे ज्यादा डिटेक्ट होती हैं।
जरूरी टेस्ट की लिस्ट:
45 की उम्र पार करते ही दिल की बीमारियों और कुछ खास प्रकार के कैंसर का जोखिम काफी बढ़ जाता है। इस उम्र में सिर्फ रूटीन ब्लड टेस्ट काफी नहीं होते, बल्कि ऑर्गन-स्पेसिफिक एडवांस्ड स्क्रीनिंग जरूरी हो जाती है।
क्यों जरूरी है जांच: धमनियों में प्लाक जमने (हार्ट ब्लॉकेज) और कोशिकाओं में असामान्य बदलावों का खतरा इस उम्र में तेजी से बढ़ता है। महिलाओं में यह दौर पेरीमेनोपॉज (मेनोपॉज के शुरुआती लक्षण) का भी होता है।
जरूरी टेस्ट की लिस्ट:
TMT (ट्रेडमिल टेस्ट) या 2D इकोकार्डियोग्राफी: फिजिकल स्ट्रेस के दौरान दिल की पंपिंग क्षमता और ब्लड फ्लो की जांच के लिए।
मैमोग्राफी (Mammography): 40-45 की उम्र के बाद महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए हर 1 से 2 साल में मैमोग्राम जरूर करवाना चाहिए।
कोलोरेक्टल कैंसर स्क्रीनिंग (FOBT / कोलोनोस्कोपी): आंतों में किसी भी तरह के पॉलीप्स या ट्यूमर की पहचान के लिए अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइंस 45 वर्ष से इसकी सलाह देती हैं।
प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन (PSA): पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने या प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती जोखिम को जांचने के लिए।
यूरिन माइक्रोएल्ब्यूमिन: डायबिटीज या बीपी की वजह से किडनी पर कोई शुरुआती दबाव तो नहीं आ रहा, यह जानने के लिए।
50 की उम्र के बाद शरीर में उम्र से जुड़े बदलाव तेजी से होते हैं। इस उम्र में हड्डियों का घनत्व कम होना, धमनियों का सख्त होना और विजन व हियरिंग से जुड़ी समस्याएं आम हो जाती हैं।
क्यों जरूरी है जांच: मेनोपॉज के बाद महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने से हड्डियां तेजी से कमजोर (ऑस्टियोपोरोसिस) होती हैं। वहीं पुरुषों में कार्डियोवैस्कुलर और प्रोस्टेट से जुड़ी परेशानियां बढ़ जाती हैं।
जरूरी टेस्ट की लिस्ट:
डेक्सा स्कैन (DEXA Scan - Bone Mineral Density): हड्डियों की मजबूती और ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे की जांच।
हाई-सेंसिटिविटी सीआरपी (hs-CRP) व होमोसिस्टीन: रक्त नलिकाओं में सूजन और हार्ट अटैक या स्ट्रोक के छिपे खतरे का मूल्यांकन।
नियमित कोलोनोस्कोपी: आंतों के स्वास्थ्य और पाचन तंत्र की गहरी जांच।
PSA टेस्ट (सालाना): पुरुषों के लिए प्रोस्टेट स्वास्थ्य की लगातार निगरानी।
आंखों और कानों की जांच (Glaucoma & Audiometry): आंखों के प्रेशर (काला मोतिया) और सुनने की क्षमता का परीक्षण।
| आयु वर्ग | मुख्य फोकस | अनिवार्य टेस्ट |
| 25 वर्ष | न्यूट्रिशन और बेसलाइन | CBC, Fasting Sugar, लिपिड प्रोफाइल, विट D3/B12, थायराइड |
| 35 वर्ष | मेटाबॉलिज्म और ऑर्गन हेल्थ | HbA1c, LFT, KFT, ECG, अल्ट्रासाउंड, पैप स्मीयर (महिलाएं) |
| 45 वर्ष | कार्डियक और कैंसर स्क्रीनिंग | TMT/Echo, मैमोग्राफी (महिलाएं), PSA (पुरुष), कोलोरेक्टल स्क्रीनिंग |
| 50+ वर्ष | बोन हेल्थ और क्रॉनिक केयर | DEXA स्कैन, hs-CRP, कोलोनोस्कोपी, ग्लूकोमा जांच, हियरिंग टेस्ट |
यदि आपके परिवार में माता-पिता या भाई-बहन को 40 से 50 की उम्र से पहले हार्ट अटैक, स्ट्रोक, कम उम्र में डायबिटीज, कोलन कैंसर या ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास रहा है, तो आपको ऊपर बताए गए टेस्ट्स के लिए 45 या 50 की उम्र का इंतजार नहीं करना चाहिए। फैमिली हिस्ट्री होने पर डॉक्टर की सलाह लेकर ये स्क्रीनिंग 5 से 10 साल पहले ही शुरू कर देनी चाहिए।
बीमार होने के बाद इलाज कराने से कहीं बेहतर है कि समय रहते बीमारी को पनपने ही न दिया जाए। साल में एक बार अपनी उम्र के मुताबिक ये बुनियादी टेस्ट जरूर करवाएं और रिपोर्ट के आधार पर अपनी डाइट, वर्कआउट और लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव करें।