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मानसून में प्यास कम लगे तो भी पानी न भूलें: जानिए हाइड्रेट रहने का सही तरीका

क्या आप जानते हैं कि मानसून में आपकी प्यास कम होने पर भी आपका शरीर पानी की उतनी ही मांग करता है? जानिए बारिश में कितना पानी पीना चाहिए.. और इससे जुड़ी काम की बातें समझिए।
3 min read
Aug 24, 2026
monsoon hydration rules
प्रतीकात्मक तस्वीर | Gemini AI

बारिश के मौसम में शरीर को पानी की जरूरत उतनी ही होती है, जितनी गर्मियों में। ठंडे और नम मौसम में प्यास का एहसास कम होता है, इसलिए अक्सर लोग पानी पीना भूल जाते हैं लेकिन यह शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। आइए जानते हैं मानसून में सही तरीके से हाइड्रेटेड रहने का तरीका।

प्यास नहीं फिर भी, नियमित पानी पीना जरूरी

ठंडे मौसम में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर की पानी की जरूरत कम नहीं होती। पर्याप्त पानी न पीने से पाचन संबंधी समस्याएं (जैसे कब्ज, एसिडिटी), थकावट, सिरदर्द और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो सकती है, और लंबे समय में गुर्दे के कार्य पर भी असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दिन में 2–3 लीटर तरल पदार्थ लें, और केवल प्यास लगने पर ही नहीं, बल्कि नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें। यह मात्रा उम्र, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

पानी की गुणवत्ता का रखें ध्यान

मानसून में पानी दूषित होने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे हैजा, टाइफाइड, पेचिश जैसी जलजनित बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। इसलिए इस मौसम में हमेशा उबला हुआ, फिल्टर किया हुआ या भरोसेमंद पैक्ड पानी ही पीना चाहिए। उबालना पानी को शुद्ध करने का एक भरोसेमंद और सिद्ध तरीका है, क्योंकि यह बैक्टीरिया और वायरस दोनों को प्रभावी रूप से खत्म कर देता है।

RO (रिवर्स ऑस्मोसिस) प्यूरीफायर आमतौर पर बैक्टीरिया, वायरस और हानिकारक रसायनों को अच्छी तरह हटा देते हैं, बशर्ते फिल्टर की ठीक से सर्विसिंग होती रहे। हालांकि RO प्रक्रिया में पानी से कुछ जरूरी मिनरल्स भी निकल सकते हैं, इसलिए लंबे समय तक सिर्फ RO पानी पर निर्भर रहने की बजाय संतुलित आहार से जरूरी पोषक तत्व (जैसे विटामिन B12, जो मुख्यतः मांस, अंडे, दूध जैसे खाद्य स्रोतों से मिलता है) पूरा करना बेहतर रहता है।

गर्म पेय और पानी से भरपूर खाद्य पदार्थ

ठंडे मौसम में हर्बल चाय, सूप और गर्म पानी जैसे पेय ज्यादा आकर्षक लगते हैं और शरीर में पानी की कमी पूरा करने में मदद करते हैं। इसके अलावा संतरा, तरबूज, खीरा, नारियल पानी, छाछ और नींबू पानी जैसे पानी से भरपूर फल और पेय भी हाइड्रेशन में योगदान देते हैं।

इलेक्ट्रोलाइट्स का महत्व

दस्त या उल्टी की स्थिति में शरीर से पानी के साथ इलेक्ट्रोलाइट्स भी निकल जाते हैं। ऐसे में ORS (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट) इस कमी को पूरा करने में मदद करता है। WHO-मानक वाला ORS चुनें, जिसमें इलेक्ट्रोलाइट्स और ग्लूकोज का संतुलन सही हो और शक्कर की मात्रा कम हो। नारियल पानी जैसे प्राकृतिक स्रोत भी इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति में मददगार हैं।

ठंडे पेय से बचें

बहुत ठंडे और फिजी ड्रिंक (जैसे सोडा) पाचन को धीमा कर सकते हैं। इनकी जगह गर्म या कमरे के तापमान का पानी, हर्बल चाय या नींबू पानी बेहतर विकल्प हैं।

पानी की कमी को कैसे पहचानें

सुबह के मूत्र का गहरा पीला रंग शरीर में पानी की कमी का एक आम संकेत हो सकता है—कोशिश करें कि यह हल्का पीला बना रहे। यह एक सामान्य संकेतक है, पर लगातार समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लें।

सारांश तालिका

स्थिति / विकल्पसुझाव और कारण
प्यास न लगनानियमित अंतराल पर पानी पीएं, प्यास पर निर्भर न रहें
पानी की गुणवत्ताउबला हुआ, फिल्टर किया हुआ या भरोसेमंद पैक्ड पानी ही पिएं
RO पानीबैक्टीरिया-वायरस हटाने में कारगर, पर मिनरल्स की पूर्ति आहार से करें
गर्म पेय और फलहर्बल चाय, सूप, नारियल पानी, तरबूज से हाइड्रेशन और पोषण दोनों मिलते हैं
इलेक्ट्रोलाइट्सORS या नारियल पानी से पूर्ति करें
ठंडे पेय से बचेंपाचन के लिए गर्म या कमरे के तापमान का पानी बेहतर
मात्रा और निगरानी2–3 लीटर तरल रोज, मूत्र का रंग हल्का पीला बनाए रखें

मानसून में पानी की सही पसंद और नियमित सेवन से न केवल निर्जलीकरण से बचा जा सकता है, बल्कि पाचन, गुर्दे, मानसिक सतर्कता और रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बनी रहती है। परिवार में बच्चों और बुजुर्गों को भी यह आदत अपनाने में मदद करें—एक गिलास गर्म पानी, जरूरत पड़ने पर ORS, और भरोसेमंद पानी का स्रोत इस मौसम में सेहत का सबसे बड़ा साथी है।

Updated on:
24 Aug 2026 05:53 pm
Published on:
24 Aug 2026 05:53 pm