Patrika+

नवरात्रि का 7वां दिन: आज करें सत्य, धर्म और विजय की प्रतीक मां कालरात्रि की पूजा, जानें पूजा विधि और नियम

नवरात्रि के पावन पर्व में मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की आराधना शक्ति, साहस और बुराई पर विजय के संकल्प के साथ की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय, संकट और नकारात्मकता से मुक्ति दिलाने वाली देवी हैं।
3 min read
• •
Oct 17, 2026
worship maa kaalratri
नवरात्रि के 7वें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा (सोर्स- Chatgpt)

नवरात्रि के पावन पर्व में मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की आराधना शक्ति, साहस और बुराई पर विजय के संकल्प के साथ की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय, संकट और नकारात्मकता से मुक्ति दिलाने वाली देवी हैं। उनका स्वरूप भले ही अत्यंत उग्र और भयावह दिखाई देता हो, लेकिन वे अपने भक्तों के लिए ममतामयी, कल्याणकारी और शुभ फल प्रदान करने वाली हैं। इसी कारण उन्हें ‘शुभंकरी’ नाम से भी जाना जाता है। मां कालरात्रि की उपासना का संदेश है कि जीवन में अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, सत्य, साहस और सकारात्मकता के बल पर उस पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

नवरात्रि के 7वें दिन होती है मां कालरात्रि की पूजा

मां कालरात्रि का सातवां स्वरूप नवरात्रि की आध्यात्मिक यात्रा में विशेष महत्व रखता है। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में सातवें स्थान पर पूजित कालरात्रि को भय, अज्ञान और बुराई का नाश करने वाली देवी माना जाता है। जहां देवी के अन्य स्वरूप मातृत्व, ज्ञान, सृजन, तपस्या और समृद्धि जैसे गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं मां कालरात्रि का स्वरूप विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने के साहस का प्रतीक है।

उग्र स्वरूप में समाहित है कल्याण का संदेश

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि का रंग घने अंधकार के समान है और उनके केश बिखरे हुए हैं। उनके गले में विद्युत के समान चमकने वाली माला सुशोभित होती है। उनकी तीन आंखों को शक्ति और दिव्य दृष्टि का प्रतीक माना जाता है। मां का यह स्वरूप बुराई के विनाश और धर्म की रक्षा के संकल्प को दर्शाता है। उनका उग्र रूप भक्तों को यह संदेश देता है कि अन्याय और नकारात्मकता के सामने भयभीत होने के बजाय साहस के साथ उनका सामना करना चाहिए।

भय और संकट से मुक्ति की कामना के साथ आराधना

नवरात्रि के सातवें दिन श्रद्धालु मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना कर अपने जीवन से भय, संकट और नकारात्मकता दूर होने की कामना करते हैं। धार्मिक विश्वास है कि मां की कृपा से भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस, धैर्य और आत्मविश्वास प्राप्त होता है। उनकी आराधना के दौरान श्रद्धालु अपने विचारों को सकारात्मक बनाने और सत्य एवं धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।

अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है मां का स्वरूप

मां कालरात्रि की उपासना का आध्यात्मिक संदेश जीवन के अंधकार को दूर करने से जुड़ा है। यहां अंधकार केवल रात या प्रकाश की अनुपस्थिति का प्रतीक नहीं, बल्कि भय, अज्ञान, निराशा और नकारात्मक विचारों का भी संकेत है। मां का स्वरूप भक्तों को प्रेरित करता है कि वे कठिनाइयों से घबराने के बजाय अपने भीतर साहस और विश्वास को मजबूत करें। सकारात्मक सोच, धैर्य और दृढ़ इच्छाशक्ति के माध्यम से विपरीत परिस्थितियों का सामना किया जा सकता है।

सत्य, धर्म और आत्मविश्वास के मार्ग पर चलने की प्रेरणा

मां कालरात्रि की आराधना भक्तों को सत्य, धर्म और न्याय के प्रति प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा देती है। उनका स्वरूप यह सिखाता है कि शक्ति का वास्तविक उद्देश्य दूसरों को भयभीत करना नहीं, बल्कि कमजोरों की रक्षा करना, अन्याय का विरोध करना और समाज में कल्याण की भावना को मजबूत करना है। मां कालरात्रि का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना के साथ श्रद्धालु अपने जीवन में साहस, संयम और सदाचार अपनाने का संकल्प लेते हैं।

मां कालरात्रि की पूजा विधि

  1. स्नान और संकल्प: सप्तमी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करें और साफ व स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो नीले, लाल या गहरे रंग के) धारण करें। इसके बाद व्रत व पूजा का संकल्प लें।
  2. स्थान शुद्धि: पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करें और उसे गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।
  3. घट और माता का पूजन: सबसे पहले कलश देवता और स्थापित अन्य देवी-देवताओं की पूजा करें। इसके बाद चौकी पर मां कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें।
  4. सामग्री अर्पण: माता को रोली, कुमकुम, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें। मां कालरात्रि को रातराणी के फूल या लाल फूल (जैसे गुड़हल) अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  5. दीपक: माता की पूजा में सरसों के तेल या घी का दीपक जलाना बेहद फलदायी माना जाता है।
  6. मंत्र जाप और पाठ: दीपक के सामने बैठकर मां कालरात्रि के सिद्ध मंत्रों और दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
  7. आरती और क्षमा याचना: पूजा के अंत में कपूर या दीपक से मां की आरती उतारें और अंजाने में हुई भूलचूक के लिए क्षमा मांगें।
  8. 8- मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी चीजें (जैसे मालपुआ) का भोग लगाया जाता है। सप्तमी के दिन माता को गुड़ अर्पित करने से भक्तों के सभी रोग-शोक दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
Updated on:
17 Oct 2026 02:38 pm
Published on:
17 Oct 2026 02:38 pm