
नेपाल और तिब्बत की सीमा पर हाल ही में आई भयंकर बाढ़ ने पूरे हिमालयी क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। अचानक ग्लेशियर के टूटने से आई इस फ्लैश फ्लड ने न केवल जान-माल का भारी नुकसान किया है, बल्कि कई यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, नेपाल में अब तक 165 लोगों की मौत हो चुकी है और 826 लोग लापता हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी इस आपदा का असर रहा, जहां कम से कम 3 लोगों की मौत हुई है।
नेपाल पुलिस ने मृतकों की संख्या 157 बताई है, जबकि तिब्बत में कम्युनिस्ट मीडिया ने 3 मौतों की पुष्टि की है। कुल मिलाकर, नेपाल और तिब्बत में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 160 से 165 के बीच बताई जा रही है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के एक प्रवक्ता के अनुसार, कुल 844 लोग लापता हैं, जिनमें 133 भारतीय शामिल हैं। अन्य स्रोतों में यह संख्या 900 से अधिक बताई गई है, जिसमें 341 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। इनमें भारतीयों की संख्या 133 बताई गई है।
इस प्रकार, लापता लोगों में भारतीय नागरिकों की संख्या विशेष रूप से उल्लेखनीय है - 133 भारतीय अभी तक संपर्क में नहीं आए हैं।
नेपाल में पिछले दशकों में कई बार विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन हुए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख घटनाएं निम्नलिखित हैं:
इन घटनाओं से स्पष्ट है कि खासकर मानसून के दौरान नेपाल में बाढ़ की आवृत्ति और विनाशकारी क्षमता समय-समय पर बढ़ी है।
यह बाढ़ ग्लेशियर के अचानक टूटने (glacial collapse) से आई फ्लैश फ्लड थी, जो हिमालयी क्षेत्र में तेजी से बढ़ते तापमान और ग्लेशियर अस्थिरता की ओर इशारा करती है।इसने न केवल स्थानीय बस्तियों और बाजारों को तबाह किया, बल्कि सड़कें, पुल और हाइड्रोपावर परियोजनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी हैं।
नेपाली सेना ने हेलीकॉप्टर से 100 से अधिक लोगों को बचाया है, और आठ विदेशी नागरिकों को काठमांडू ले जाया गया है। भारत, चीन और संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों और संगठनों ने मदद की पेशकश की है।
हालिया आंकड़ों के अनुसार, 1993 की बाढ़ (1,300 से अधिक मृतक/लापता) अब भी सबसे विनाशकारी मानी जाती है। वर्तमान आपदा में मरने वालों की संख्या 160–165 है, जो 1993 की तुलना में कम है। फिर भी, यह बाढ़ ग्लेशियर अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को उजागर करती है, जो भविष्य में और भी खतरनाक घटनाओं का संकेत हो सकता है।
नेपाल में हालिया बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को एक बार फिर उजागर किया है। 160–165 लोगों की मौत, 826–900 से अधिक लापता, और उनमें 133 भारतीय नागरिकों की स्थिति चिंताजनक है। इतिहास में 1993 की बाढ़ सबसे भयंकर रही, लेकिन वर्तमान घटना ग्लेशियर टूटने और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को सामने लाती है। अब राहत, बचाव और पुनर्निर्माण का कार्य सबसे जरूरी है। साथ ही, भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचने के लिए ग्लेशियर निगरानी, आपदा तैयारी और क्षेत्रीय सहयोग पर ध्यान देना अनिवार्य है।