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पेट भरा, लेकिन पोषण अधूरा: भारत में हर तीसरे बच्चे का वजन कम, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में चौंकाने वाला खुलासा

दुनिया के सबसे बड़े खाद्यान्न उत्पादक देशों में शामिल भारत में अनाज की कमी नहीं है। इसके बावजूद सवाल है कि क्या देश में हर मां और बच्चे की थाली पोषण से भरपूर है? आइए जानते हैं क्या है सच्चाई?
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Sep 02, 2026
underweight child in india
सांकेतिक इमेज (सोर्स-Chatgpt)

दुनिया के सबसे बड़े खाद्यान्न उत्पादक देशों में शामिल भारत में अनाज की कमी नहीं, लेकिन सवाल अब भी बना हुआ है कि क्या हर मां और बच्चे की थाली पोषण से भरपूर है? स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 29 मई 2026 को जारी नवीनतम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के आंकड़े इसी विरोधाभास की तस्वीर पेश करते हैं। साल 2023-24 के दौरान हुआ यह सर्वे 6.79 लाख से अधिक परिवारों और 715 जिलों को कवर करता है, जिसमें 7.16 लाख से ज्यादा महिलाओं का डेटा शामिल है। कुपोषण के कई संकेतकों में सुधार हुआ है, लेकिन देश उस स्थिति से अब भी दूर है जहां हर बच्चे को पर्याप्त, संतुलित पोषण मिल रहा हो।

वजन-लंबाई: सुधार पर संतुलन गड़बड़

पांच साल से कम उम्र के बच्चों में उम्र के हिसाब से कम लंबाई यानी स्टंटिंग 35.5% से घटकर 29.3% हो गई और गंभीर रूप से दुबले यानी सीवियर वेस्टिंग वाले बच्चों का आंकड़ा 7.7% से घटकर 5.2% हुआ है। लेकिन उम्र के हिसाब से कम वजन यानी अंडरवेट बच्चों का प्रतिशत 32.1% से घटकर सिर्फ 31.8% रह गया। यानी आज भी करीब हर 3 में से एक बच्चा अपनी उम्र के हिसाब से पर्याप्त वजन का नहीं है। कुल वेस्टिंग भी 19.3% से घटकर लगभग 19% पर ही अटकी रही। यानी दीर्घकालिक वृद्धि में सुधार तो है, लेकिन बार-बार होने वाली बीमारी या अपर्याप्त आहार से जुड़ी अल्पकालिक कमजोरी अब भी बनी हुई है।

स्तनपान के आंकड़े में फर्क


पोषण की शुरुआत जन्म के साथ होती है। मंत्रालय के बयान के मुताबिक, 6 माह से कम उम्र के 95.6% बच्चों को सर्वे अवधि के दौरान स्तनपान कराया जाना दर्ज हुआ। जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करने वाले बच्चों का अनुपात 41.8% से बढ़कर 50.1% हो गया। यह आंकड़े सुनने में उत्साहजनक लगते हैं, लेकिन इसमें एक जरूरी बारीकी छूट जाती है। WHO के मानक के अनुसार, बच्चे को पहले 6 महीने केवल स्तनपान (एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग) मिलना चाहिए।

द प्रिंट के स्वतंत्र विश्लेषण के अनुसार, 6 माह से कम उम्र के जिन शिशुओं को विशेष रूप से केवल स्तनपान कराया गया, उनका अनुपात 4 साल में करीब 8 प्रतिशत अंक घटकर 63.7% से 55.8% पर आ गया है। हालांकि, अस्पताल में प्रसव की दर 88.6% से बढ़कर 90.6% हो गई हो। यानी 95.6% बच्चे स्तनपान करा दिए गए और सिर्फ 55.8% को अनन्य रूप से स्तनपान मिला। ये दो अलग-अलग संकेतक हैं, और असली WHO-अनुशंसित पैमाने पर स्थिति सुधरने की बजाय बिगड़ी है। 6 से 8 महीने के बच्चों में स्तनपान के साथ ठोस या अर्ध-ठोस आहार पाने वालों की हिस्सेदारी 45.9% से बढ़कर 59.5% हुई। फिर भी करीब 40% बच्चे इस अहम उम्र में जरूरी पूरक आहार से दूर हैं।

मात्रा नहीं, विविधता की चुनौती

भारत की असली चुनौती अब केवल भूख मिटाने की नहीं है। बढ़ते बच्चे को प्रोटीन, दालें, दूध-अंडे, फल-सब्जियां, आयरन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व भी चाहिए। इसकी सबसे साफ झलक 6-23 महीने के बच्चों के "न्यूनतम पर्याप्त आहार" संकेतक में मिलती है। फैक्ट-चेक प्लेटफॉर्म फैक्टली के विश्लेषण के अनुसार, यह आंकड़ा NFHS-5 के 11% से बढ़कर NFHS-6 रिपोर्ट में केवल 15.3% पहुंचा है। यानी 36% की सापेक्ष बढ़त के बावजूद हर छह में से करीब 5 भारतीय बच्चों को अब भी स्वस्थ वृद्धि के लिए जरूरी न्यूनतम आहार नहीं मिल पाता। विकास-अर्थशास्त्री गर्भधारण से बच्चे के दूसरे जन्मदिन तक की अवधि को "पहला हजार दिन" कहते हैं, जिसमें हुआ नुकसान अक्सर स्थायी होता है।

एनीमिया के आंकड़े गायब

कुपोषण की तस्वीर सिर्फ लंबाई-वजन तक सीमित नहीं। मौजूदा सबसे ताजा राष्ट्रीय आंकड़े NFHS-5 रिपोर्ट के हैं, जिसके अनुसार 6-59 महीने के 67.1% बच्चे एनीमिया से प्रभावित थे और 15-49 वर्ष की महिलाओं में एनीमिया का स्तर 57% था। NFHS-6 में यह आंकड़े महज लंबित नहीं, बल्कि जानबूझकर बाहर रखे गए हैं। सरकार ने पिछले दौर में इस्तेमाल हुई कैपिलरी (उंगली से खून की बूंद) जांच पद्धति को लेकर आ रही आपत्तियों के चलते हीमोग्लोबिन टेस्टिंग इस बार नहीं कराई। अब एनीमिया के आंकड़े ICMR के डाइट एंड बायोमार्कर्स सर्वे से लिए जाएंगे, जो नस से लिए गए रक्त नमूनों पर आधारित है। जिसे ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है। यह अकेला संकेतक नहीं है जो छूटा है। NFHS-6 में कुल संकेतकों की संख्या NFHS-5 के 131 से घटकर 101 रह गई और शिशु-मातृ मृत्यु दर तथा स्वच्छ ईंधन जैसे लंबे समय से ट्रैक होते आ रहे कई पैमाने भी सूची से बाहर हैं।

Updated on:
02 Sept 2026 07:32 pm
Published on:
02 Sept 2026 07:32 pm