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महिलाएं खुद को ना समझें असुरक्षित, जानिए किन डिजिटल ऐप की मदद से बना सकती हैं खुद को ताकतवर

महिलाओं के लिए मुफ्त कानूनी सहायता, परामर्श और आपातकालीन SOS सुरक्षा अब सिर्फ एक क्लिक की दूरी पर है। जानें 'न्यायसखी' और 'सखी' मोबाइल ऐप्स की मदद से कैसे मिल सकती है उन्हें सुरक्षा।
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Sep 02, 2026
Digital
महिला सुरक्षा (AI)

डिजिटल युग में जब स्मार्टफोन हर हाथ में पहुंच चुका है, तब तकनीकी नवाचार केवल मनोरंजन या संवाद तक सीमित नहीं रह गए हैं। तकनीक अब महिलाओं की सुरक्षा, कानूनी साक्षरता और त्वरित सहायता का सबसे सशक्त माध्यम बन रही है। देश में महिलाओं और कमजोर वर्गों को कानूनी मार्गदर्शन और आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 'न्यायसखी' (NyayaSakhi) और 'सखी' (Sakhi) जैसे मोबाइल ऐप्लिकेशन्स डिजिटल बदलाव की नई इबारत लिख रहे हैं।

न्यायसखी (NyayaSakhi): कानूनी जागरूकता और सलाह की डिजिटल साथी

'न्यायसखी' क्या है?

न्यायसखी ऐप मुख्य रूप से महिलाओं, हाशिए पर मौजूद वर्गों और आम नागरिकों को कानून के जटिल पचड़ों को सरल भाषा में समझाने और उन्हें समय पर सटीक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया है। अक्सर सामाजिक या आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं जानकारी और संसाधनों के अभाव में कानूनी मदद लेने से हिचकिचाती हैं। न्यायसखी इसी अंतर को पाटने का काम करता है।

प्रमुख खासियतें:

सरल भाषा में कानूनी जानकारी: इस ऐप पर भारतीय दंड संहिता, घरेलू हिंसा से जुड़े प्रावधान, भरण-पोषण कानून, कार्यस्थल पर उत्पीड़न (POSH Act) और संपत्ति अधिकारों से संबंधित कानूनी नियमों को बहुत ही सरल और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत किया गया है।

मुफ्त कानूनी सहायता (Legal Aid) का रास्ता: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों (SLSA) की मुफ्त कानूनी सहायता योजनाओं से यह ऐप सीधे नागरिकों को जोड़ता है।

टेली-लॉ (Tele-Law) और परामर्श: इसके जरिए उपयोगकर्ता घर बैठे पैनल वकीलों या पैरा-लीगल स्वयंसेवकों से वीडियो/ऑडियो कॉल पर प्राथमिक कानूनी राय ले सकते हैं।

दस्तावेज़ और शिकायत प्रक्रिया: पुलिस शिकायत दर्ज कराने, एफआईआर की प्रक्रिया समझने और विधिक सहायता के लिए आवेदन पत्र डाउनलोड करने जैसी सुविधाएं भी इसमें उपलब्ध हैं।

सखी (Sakhi): आपातकालीन सुरक्षा और वन-स्टॉप समाधान

'सखी' ऐप क्या है?

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित ‘सखी: वन स्टॉप सेंटर’ (One Stop Centre) व्यवस्था की तर्ज पर तैयार किया गया ‘सखी’ ऐप मुख्य रूप से संकटग्रस्त महिलाओं को आपातकालीन बचाव, मेडिकल, मनोवैज्ञानिक और आश्रय संबंधी सहायता तुरंत मुहैया कराने पर केंद्रित है। हिंसा या किसी भी प्रकार की असुरक्षा का सामना कर रही महिलाओं के लिए यह ऐप एक त्वरित लाइफलाइन की तरह काम करता है।

प्रमुख खासियतें:

एसओएस (SOS) पैनिक बटन: किसी भी आपात स्थिति में केवल एक क्लिक या फोन को खास तरीके से हिलाने पर यह ऐप उपयोगकर्ता की लाइव जीपीएस लोकेशन नजदीकी पुलिस स्टेशन, कंट्रोल रूम और दर्ज किए गए आपातकालीन संपर्कों को भेज देता है।

वन स्टॉप सेंटर (OSC) से सीधा जुड़ाव: ऐप के माध्यम से पीड़ित महिला नजदीकी 'सखी वन स्टॉप सेंटर' की जानकारी पा सकती है, जहां एक ही छत के नीचे अस्थायी आश्रय, प्राथमिक उपचार, कानूनी परामर्श और मनोवैज्ञानिक सहयोग मिलता है।

महिला हेल्पलाइन 181 का एकीकरण: ऐप में 181 विमेन हेल्पलाइन और 112 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ERSS) का त्वरित डायलर इनबिल्ट है।

सुरक्षित रूट और जीपीएस ट्रैकिंग: कई सुरक्षा ऐप्स की तरह यह यात्रा के दौरान लाइव लोकेशन साझा करने और सुरक्षित रास्तों (Safe Routes) की जानकारी देने में भी मददगार है।

दोनों ऐप्स में मुख्य अंतर: कौन किस काम के लिए?

आधारन्यायसखी (NyayaSakhi)सखी (Sakhi)
मूल उद्देश्यकानूनी साक्षरता, विधिक सलाह और अधिकारों की समझ।आपातकालीन सुरक्षा, त्वरित बचाव और समग्र पुनर्वास।
कार्यप्रणालीयह सूचनात्मक और परामर्श आधारित समाधान प्रदान करता है।यह आपात स्थिति में तुरंत हरकत में आने (Action-oriented) वाला टूल है।
नेटवर्क जुड़ावNALSA, लोक अदालत, पैनल अधिवक्ता और विधिक सेवा सेल।स्थानीय पुलिस, 112 कंट्रोल रूम, वन स्टॉप सेंटर और अस्पताल।
उपयोग की स्थितिजब कानूनी प्रक्रिया, अधिकार या कोर्ट-कचहरी की सलाह चाहिए हो।जब शारीरिक खतरे, हिंसा या असुरक्षित स्थिति से तुरंत निपटना हो।

डिजिटल इंडिया और महिला सशक्तिकरण

डिजिटल माध्यमों ने सरकारी योजनाओं और कानूनी प्रक्रियाओं की पहुंच को हर घर तक आसान बना दिया है। पहले जहां किसी घरेलू हिंसा या उत्पीड़न की शिकार महिला को थाने या कोर्ट जाने में सामाजिक संकोच और भय महसूस होता था, वहीं अब वह अपने स्मार्टफोन से अपनी पहचान गोपनीय रखते हुए भी शिकायत या परामर्श दर्ज करा सकती है।

गोपनीयता की सुरक्षा: दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर डेटा एन्क्रिप्शन और उपयोगकर्ता की पहचान गुप्त रखने की व्यवस्था की जाती है, ताकि पीड़िता बिना किसी सामाजिक दबाव के खुलकर अपनी बात रख सके।

क्षेत्रीय भाषाओं का समर्थन: देश के भाषाई वैविध्य को ध्यान में रखते हुए ये प्लेटफॉर्म्स हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि ग्रामीण अंचल की महिलाएं भी इनका लाभ उठा सकें।

स्मार्टफोन का सही उपयोग तब सार्थक होता है जब वह संकट के समय रक्षा कवच बने। 'सखी' और 'न्यायसखी' जैसे टूल्स हर महिला और परिवार के स्मार्टफोन में होने चाहिए, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति या कानूनी उलझन के समय सही मदद सही समय पर केवल एक टैप की दूरी पर उपलब्ध रहे।

Updated on:
02 Sept 2026 12:13 pm
Published on:
02 Sept 2026 12:10 pm