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ऑफिस में एक्टिव रहने के 5 आसान तरीके, जानिए टेबल टॉक्स और हॉट स्टेप्स के फायदे

छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना आपकी सेहत को बेहतर बना सकता है। ऑफिस में टेबल टॉक्स और हॉट स्टेप्स जैसे आसान तरीकों से न आपकी ऊर्जा बढ़ सकती है और आपकी कार्यक्षमता भी निखर सकती है। इस लेख में जानिए ऑफिस में एक्टिव कैसे रहें...
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Aug 17, 2026
Active Working Guide
ऑफिस में एक्टिव कैसे रहें? (फोटोः एआई)

आजकल ऑफिस में लंबे समय तक बैठे रहने की आदत से कई लोग परेशान हैं। इसी बीच दो नए तरीके, ‘टेबल टॉक्स’ (Table Talks) और ‘हॉट स्टेप्स’ (Hot Steps) आपके काम आ सकते हैं, जो काम के बीच हल्की-फुल्की गतिविधि जोड़कर सेहत और कार्यक्षमता दोनों में सुधार लाते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं, इन तरीकों के बारे में।

टेबल टॉक्स: काम के बीच खड़े होकर बातचीत

टेबल टॉक्स का अर्थ है, बैठने की बजाय खड़े होकर बातचीत या मीटिंग करना। Active Working (सक्रिय काम) नामक अंतरराष्ट्रीय पहल में यह सुझाव शामिल है कि बैठने की जगह खड़े होकर बातचीत करने से रक्त प्रवाह बेहतर होता है, ऊर्जा मिलती है और लंबे समय तक बैठने के नुकसान कम होते हैं।

यह तरीका विशेष रूप से तब कारगर होता है, जब स्क्रीन शेयर या नोट्स की आवश्यकता न हो, जैसे छोटी बातचीत, विचार-विमर्श या फोन कॉल। इससे औपचारिक माहौल टूटता है, बातचीत खुलकर होती है और दिमाग को भी राहत मिलती है।

हॉट स्टेप्स: काम के बीच चलते-फिरते कदम बढ़ाना

हॉट स्टेप्स का अर्थ है, काम के दौरान छोटे-छोटे ब्रेक लेकर चलना, जैसे कॉरिडोर में घूमना, कॉल के दौरान टहलना या मीटिंग के बीच थोड़ा पैदल चलना। एक्टिव वर्किंग गाइड में सुझाव है कि हर 30 मिनट बैठने के बाद कम से कम 2 मिनट चलना चाहिए।

रिशेप ऐप की रिपोर्ट बताती है कि कैलेंडर में 5‑मिनट के ब्रेक डालकर चलने से प्रति ब्रेक लगभग 500–600 कदम बढ़ जाते हैं और दिन में 8–10 हजार कदम तक पहुंचना आसान हो जाता है। इससे ऊर्जा बनी रहती है, ध्यान केंद्रित रहता है और स्वास्थ्य बेहतर होता है।

वैज्ञानिक आधार: क्या सच में असर होता है?

ट्रेडमिल डेस्क (चलते हुए काम करने वाली मेज) पर हुए मेटा‑विश्लेषण में पाया गया कि लैब में धीमी चाल से चलने पर ऊर्जा खर्च में प्रति घंटे लगभग 105 कैलोरी की बढ़ोतरी होती है और ऑक्सीजन की खपत भी बढ़ती है। ऑफिस सेटिंग में ट्रेडमिल डेस्क का उपयोग करने से पूरे दिन में प्रति घंटे लगभग 1.7 मिनट कम बैठने का समय मिलता है।

सिट‑स्टैंड डेस्क (बैठने और खड़े होने वाली मेज) से तीन महीने में काम के दौरान बैठने का समय प्रति दिन लगभग 100 मिनट तक कम हुआ।
एक्टिव वर्क-स्टेशन्स (जैसे ट्रेडमिल, साइकिल, स्टैंडिंग डेस्क) पर आधारित अध्ययन बताते हैं कि इनसे ऊर्जा खर्च बढ़ता है, शारीरिक गतिविधि बढ़ती है और वजन नियंत्रण में मदद मिलती है, विशेषकर अधिक वजन या मोटापे वाले लोगों में।

(Image: AI)

भारत में क्या असर दिखा

मणिपाल विश्वविद्यालय के अध्ययन में एक स्मार्टफोन ऐप (SmPh-app) के जरिए काम के दौरान चलने की याद दिलाने पर, चार हफ्ते में फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज (FBG) में 8 mmol/dL की कमी, VO2 max (शारीरिक क्षमता) में 2.23 ml/kg/min का सुधार और हार्ट रेट वेरिएबिलिटी में भी सुधार देखा गया।

स्मार्ट-स्टेप ट्रायल में, स्मार्टफोन ऐप और पेडोमीटर से लैस समूह में तीन और छह महीने में बैठने का समय दिन में लगभग 6 मिनट कम हुआ, जबकि केवल शिक्षा सामग्री वाले समूह में सुधार टिकाऊ नहीं रहा।

टेबल टॉक्स और हॉट स्टेप्स का प्रभाव

टेबल टॉक्स और हॉट स्टेप्स, दोनों ही एक्टिव वर्किंग के सिद्धांत पर आधारित हैं और लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रहने से बचने की सलाह देते हैं। खड़े होकर बातचीत और छोटे-छोटे चलने से शरीर में रक्त प्रवाह बेहतर होता है, ऊर्जा बनी रहती है और मानसिक थकान कम होती है।
ये तरीके महंगे उपकरण या बड़े बदलाव नहीं मांगते, बस थोड़ी आदत और ऑफिस में थोड़ी जागरूकता चाहिए। एक्टिव वर्किंग गाइड में सुझाव है कि दिन में कम से कम दो घंटे खड़े रहने या हल्की गतिविधि में बिताना चाहिए और लगातार बैठे रहने से बचने के लिए हर 30 मिनट में 5 मिनट खड़े रहने या 2 मिनट चलने की आदत डालनी चाहिए।

उम्र और स्थिति के अनुसार सुझाव

बच्चों और युवा वर्किंग प्रोफेशनल्स: यदि लंबे समय तक बैठना पड़ता है, तो हर घंटे में 2‑5 मिनट टहलें या खड़े होकर बातचीत करें।
मध्यम आयु वर्ग: ट्रेडमिल डेस्क या सिट‑स्टैंड डेस्क का उपयोग करें, लेकिन खड़े रहने और चलने में संतुलन बनाए रखें।
सीनियर या स्वास्थ्य संबंधी समस्या वाले लोग: खड़े रहने और चलने से पहले डॉक्टर से सलाह लें, विशेषकर यदि पैरों, हृदय या रक्त संचार में समस्या हो।

इसके अलावा, ICMR-NIN (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च - नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन) के पोषण अभियान के तहत ई-लर्निंग मॉड्यूल उपलब्ध हैं, जिनमें बेसिक्स ऑफ न्यूट्रिशन, चाइल्ड फीडिंग, फिजिकल एक्टिविटी आदि विषय शामिल हैं। ये रोजमर्रा की जीवनशैली में पोषण संबंधी ज्ञान बढ़ाने में मदद करते हैं।

कब डॉक्टर से सलाह लें

यदि बच्चे का वजन बहुत कम या बहुत अधिक हो, नींद या व्यवहार में अचानक बदलाव हो, या पोषण संबंधी कोई विशेष चिंता हो, तो पेडियाट्रिशियन या पोषण विशेषज्ञ से मिलना चाहिए। यह लेख डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है; किसी भी गंभीर चिंता पर विशेषज्ञ से संपर्क करें।

Updated on:
17 Aug 2026 06:11 pm
Published on:
17 Aug 2026 06:11 pm