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कोलकाता में गिरी थीं देवी सती के दाहिने पैर की 4 अंगुलियां, जानिए कालीघाट शक्तिपीठ से जुड़ी धार्मिक मान्यता

शारदीय नवरात्रि का आज 5वां दिन है। नवरात्रि में मां दुर्गा के अलग-अलग 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। मां दुर्गा के इन्ही रूपों में 'माता काली शक्ति' का स्वरूप भी शामिल हैं। आइए जानते हैं 'माता काली शक्ति' से जुड़ी धार्मिक मान्यता।
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Oct 15, 2026
Religious belief Kalighat Shaktipeeth
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

शारदीय नवरात्रि का आज 5वां दिन है। नवरात्रि में मां दुर्गा के अलग-अलग 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। माता के इन सभी 9 स्वरूपों में मां काली की आराधना भी विशेष फलदायी मानी जाती है। मां काली शक्ति, साहस और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक हैं। कालीघाट में विराजीं मां काली का मंदिर देश के प्रमुख 51 शक्तिपीठों में शामिल है।

कालीघाट शक्तिपीठ से जुड़ी धार्मिक मान्यता

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के कालीघाट में विराजीं मां काली का मंदिर देश के प्रमुख 51 शक्तिपीठों में शामिल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां देवी सती के दाहिने पैर की 4 अंगुलियां गिरी थीं। इसी वजह से यह स्थान शक्ति उपासना के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित है। शारदीय नवरात्र के दौरान मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

मां काली के जयकारों और भक्ति भाव से मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय हो जाता है। आदि गंगा के तट पर स्थित यह मंदिर बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां विराजमान मां काली की प्रतिमा अपने विशिष्ट स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है। देवी की लंबी लाल जिह्वा और स्वर्णाभूषणों से सुसज्जित प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।

भक्त मां के दर्शन कर सुख, समृद्धि, आरोग्य और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं। कालीघाट मंदिर में भक्त मां को पुष्प, मिठाई और पूजा सामग्री अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। बंगाल में दुर्गापूजा के दौरान मां काली की उपासना की परंपरा भी गहरी है। पर्व के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और आरती होती है। श्रद्धालु मां से संकटों से रक्षा और जीवन में सुख-शांति का आशीर्वाद मांगते हैं।

नवरात्र में मां काली की आराधना का विशेष महत्व

नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के साथ मां काली की आराधना भी विशेष फलदायी मानी जाती है। मां काली शक्ति, साहस और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक हैं। कालीघाट मंदिर में भक्त मां को पुष्प, मिठाई और पूजा सामग्री अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। बंगाल में दुर्गापूजा के दौरान मां काली की उपासना की परंपरा भी गहरी है। पर्व के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और आरती होती है। श्रद्धालु मां से संकटों से रक्षा और जीवन में सुख-शांति का आशीर्वाद मांगते हैं।

तीन शताब्दियों से जुड़ी धार्मिक परंपरा

कालीघाट मंदिर का धार्मिक महत्व प्राचीन माना जाता है, जबकि इसकी वर्तमान वास्तुकला 19वीं शताब्दी से जुड़ी है। मंदिर के निर्माण और विकास में सावर्णी राय चौधरी परिवार तथा अन्य स्थानीय जमींदारों की भूमिका मानी जाती है। समय के साथ यह मंदिर बंगाल में मां काली की उपासना के सबसे प्रतिष्ठित स्थलों में शामिल हो गया। यहां देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा विदेशों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

Updated on:
15 Oct 2026 03:36 pm
Published on:
15 Oct 2026 03:36 pm