
डाइटिंग, एक्सरसाइज और वॉकिंग से जब वजन घटता है, तो सवाल उठता है कि शरीर की चर्बी आखिर जाती कहां है? कई लोग मानते हैं कि वह पसीने या मल-मूत्र के रास्ते निकलती है। लेकिन विज्ञान का जवाब इससे अलग है। आइए जानते हैं, वजन घटता है तो हमारे शरीर में क्या होता है?
यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम के जॉनी क्विनलान और आर्ची बेलफील्ड ने 'द कन्वरसेशन' में लिखा है कि वजन घटाते समय हम जो चर्बी खोते हैं, उसका बड़ा हिस्सा सांस के रूप में बाहर निकलता है, जबकि कम हिस्सा पसीने के जरिए पानी बनकर निकलता है। इसी लेख में बताया गया कि डाइटीशियन और डॉक्टरों में भी इस बारे में भ्रम है।
यह आंकड़ा ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (UNSW) के रूबेन मीरमैन और प्रोफेसर एंड्रयू ब्राउन की 2014 की रिसर्च पर आधारित है, जो मेडिकल जर्नल BMJ में छपी थी। इस शोध में पाया गया कि अनेक स्वास्थ्य पेशेवर भी यह सवाल सही नहीं बता पाते। लाइवसाइंस की रिपोर्ट के अनुसार शोधकर्ताओं ने गणना में पाया कि खोई हुई चर्बी का 84 प्रतिशत हिस्सा कार्बन डाइऑक्साइड बनकर फेफड़ों से निकलता है, जबकि बाकी 16 प्रतिशत पानी बन जाता है। इसका उदाहरण देते हुए बताया गया कि 10 किलो चर्बी घटने पर 8.4 किलो हिस्सा फेफड़ों से और 1.6 किलो पानी के रूप में निकलता है। यह पानी पेशाब, पसीने और दूसरे शारीरिक तरल पदार्थों से बाहर आता है।
भोजन में मौजूद फैट पाचन के दौरान फैटी एसिड में टूटता है। शरीर इनका उपयोग कोशिकाएं बनाने, हार्मोन के काम और अंगों की सुरक्षा में करता है। जरूरत से ज्यादा ऊर्जा मिलने पर उसे ट्राइग्लिसराइड्स के रूप में फैट सेल्स में जमा कर लेता है। चर्बी मुख्यतः त्वचा के नीचे (सबक्यूटेनियस) और अंगों के आसपास (विसरल) जमा होती है।
जब शरीर को भोजन से मिली ऊर्जा से ज्यादा की जरूरत होती है, तब वह इस जमा चर्बी का इस्तेमाल शुरू करता है। हार्मोन और तंत्रिका तंत्र के संकेत लिपोलाइसिस की प्रक्रिया शुरू करते हैं। इसके बाद फैटी एसिड कोशिकाओं के माइटोकॉन्ड्रिया में पहुंचकर बीटा-ऑक्सीडेशन से ऊर्जा बनाते हैं। इसी प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड और पानी बनते हैं।
मीरमैन के अनुसार कार्बन डाइऑक्साइड गैस अदृश्य होती है, इसलिए यह बात लोगों को आसानी से समझ नहीं आती। UNSW की रिपोर्ट के मुताबिक 100 ग्राम फैट के चयापचय में 290 ग्राम ऑक्सीजन खर्च होती है और 280 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड तथा 110 ग्राम पानी बनता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सांस छोड़ना फैट जलने का नतीजा बाहर निकालने का रास्ता है, फैट जलाने की शुरुआत करने वाली प्रक्रिया नहीं। UNSW के लेख में भी कहा गया कि कार्बन डाइऑक्साइड का उत्पादन सचेत रूप से बढ़ाने का एकमात्र तरीका मांसपेशियों को चलाना है।
यानी वजन घटाने के लिए शरीर को भोजन से मिली ऊर्जा से ज्यादा ऊर्जा खर्च करनी होगी। BMJ शोध के लेखकों ने कहा कि फैट कोशिकाओं में जमा कार्बन को खोलना पड़ता है, इसलिए 'कम खाओ, ज्यादा चलो' का पुराना सूत्र ही सही है।
ये आंकड़े गणना और अनुमान पर आधारित हैं। इस गणना में कीटोन बॉडी के रूप में निकलने वाली थोड़ी चर्बी और मांसपेशियों से यूरिया के रूप में निकलने वाले नाइट्रोजन की मात्रा शामिल नहीं है। इसलिए यह एक सामान्य सिद्धांत है, किसी व्यक्ति का सटीक हिसाब नहीं। वजन घटाने की योजना हमेशा डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन की सलाह से बनाएं।