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खेतों में फसल के साथ अब उगेगी बिजली, किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद कर रही सौर ऊर्जा

PM-KUSUM Scheme : सौर ऊर्जा से किसान सिंचाई की लागत घटाने के साथ अतिरिक्त कमाई भी कर सकते हैं। जानें PM-KUSUM, सोलर पंप, एग्रीवोल्टाइक और सहकारी मॉडल से किसानों को कैसे फायदा मिल रहा है।
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Aug 30, 2026
Solar Plant
Solar Plant : सौर सिंचाई से बचत और आय का नया रास्ता, PC- Chatgpt

सूरज की रोशनी अब खेतों में सिर्फ फसल नहीं उगा रही, बल्कि किसानों की आमदनी में भी नई संभावनाएं पैदा कर रही है। सौर ऊर्जा के जरिए सिंचाई की लागत घटाने, बिजली बचाने और अतिरिक्त आय हासिल करने का मॉडल तेजी से चर्चा में है। सोलर पंप से लेकर खेतों के ऊपर लगाए जाने वाले सोलर पैनल और सामुदायिक सौर मॉडल तक, खेती और ऊर्जा का यह मेल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया रास्ता दिखा रहा है।

सौर सिंचाई से बचत और अतिरिक्त कमाई

गुजरात की सूर्य शक्ति किसान योजना (SKY) इसका एक उदाहरण है। इस योजना से जुड़े किसानों को बिजली की बिक्री और सिंचाई में बचत के जरिए सालाना करीब 21,917 रुपए तक की अतिरिक्त आय हुई, जो उनकी फसल आय का लगभग 43 प्रतिशत थी।

इस मॉडल की खास बात यह है कि सौर पंप किसान के लिए सिर्फ सिंचाई का साधन नहीं रहता। खेत की जरूरत पूरी करने के बाद अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर किसान आय का एक और स्रोत बना सकता है। इससे बिजली और डीजल पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकता है।

PM-KUSUM से खेती के साथ बिजली उत्पादन

केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) योजना भी इसी दिशा में बड़ा कदम है। 2019 में शुरू हुई इस योजना का लक्ष्य मार्च 2026 तक करीब 34,800 मेगावाट सौर क्षमता जोड़ना था।

योजना के तहत किसान सोलर पंप लगाकर सिंचाई कर सकते हैं और कुछ मॉडलों में अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई भी कर सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जिन किसानों ने अपनी जमीन सौर परियोजनाओं के लिए लीज पर दी, उन्हें औसतन करीब 30,000 रुपए प्रति एकड़ प्रति वर्ष की आय हुई।

सौर ऊर्जा से गांवों में नए कारोबार

सौर ऊर्जा का फायदा सिर्फ सिंचाई तक सीमित नहीं है। विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा (DRE) के जरिए सोलर ड्रायर, कोल्ड स्टोरेज और वर्टिकल फॉडर ग्रो यूनिट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रहा है।

इनसे फसल के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और किसानों को नए आय स्रोत उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर महिलाओं की भागीदारी वाले सामुदायिक मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नए अवसर पैदा कर रहे हैं।

एग्रीवोल्टाइक से एक ही जमीन पर खेती और बिजली

एग्रीवोल्टाइक (Agrivoltaics) खेती और सौर ऊर्जा के मेल का एक नया मॉडल है। इसमें खेत के ऊपर या खेत के हिस्से में सोलर पैनल लगाए जाते हैं और उनके नीचे या आसपास खेती जारी रहती है। यानी एक ही जमीन से फसल और बिजली, दोनों हासिल करने की कोशिश होती है।

कुछ अध्ययनों में इस मॉडल का Land Equivalent Ratio 1.5 से अधिक पाया गया है। अंगूर जैसे कुछ फसलों में इसके आर्थिक लाभ की संभावनाएं भी सामने आई हैं। हालांकि, इसका फायदा फसल, पैनल की डिजाइन, स्थानीय मौसम और नीति समर्थन पर निर्भर करता है।

सहकारी मॉडल से छोटे किसानों को फायदा

सौर ऊर्जा का लाभ छोटे किसानों तक पहुंचाने में सहकारी मॉडल भी अहम हो सकता है। गुजरात के SPICE मॉडल में किसान मिलकर सौर पंपों का इस्तेमाल करते हैं, अतिरिक्त बिजली बेचते हैं और आय साझा करते हैं।

इस तरह सामूहिक निवेश का बोझ और जोखिम कम किया जा सकता है। किसान समूह और FPOs भी ऐसे मॉडल को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सबसे बड़ी चुनौती है धीमा कार्यान्वयन

सौर ऊर्जा की संभावनाओं के बावजूद योजनाओं का जमीन पर तेजी से लागू होना चुनौती बना हुआ है। PM-KUSUM के Component A और Component C-FLS में अप्रैल 2026 तक क्रमशः करीब 7 प्रतिशत और 34 प्रतिशत लक्ष्य पूरा होने की बात सामने आई थी।

इसलिए राज्यों को केंद्र की योजनाओं के साथ अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन देना, आसान वित्तीय मॉडल तैयार करना और प्रतिस्पर्धात्मक बोली जैसी व्यवस्था अपनाना जरूरी है।

सौर ऊर्जा किसानों के लिए सिर्फ बिजली का विकल्प नहीं, बल्कि बचत और अतिरिक्त आमदनी का साधन बन सकती है। इसके लिए योजनाओं का सरल और तेज क्रियान्वयन, किसान समूहों को मजबूत करना और एग्रीवोल्टाइक जैसे नए मॉडल को स्थानीय जरूरत के अनुसार अपनाना जरूरी होगा।

जब किसान खेत में सिर्फ फसल ही नहीं, ऊर्जा भी पैदा करेंगे, तो आमदनी के नए रास्ते खुल सकते हैं। इससे खेती की लागत घटाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने और जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने में भी मदद मिल सकती है।

Updated on:
30 Aug 2026 09:26 pm
Published on:
30 Aug 2026 09:25 pm