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गडचिरोली में 3 लड़कियों की मौत के बाद सांप काटने को नोटिफाइएबल डिजीज का दर्जा, जानिए इससे क्या होगा फायदा

महाराष्ट्र सरकार ने सांप के काटने को सूचित करने योग्य बीमारी घोषित कर दिया है। यह निर्णय गडचिरोली में एक सरकारी स्कूल में तीन आदिवासी छात्राओं की मौत के कुछ ही दिन बाद लिया गया है।
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Aug 19, 2026
snake bite death
प्रतीकात्मक तस्वीर | Gemini AI

महाराष्ट्र सरकार ने सांप के काटने को सूचित करने योग्य बीमारी (नोटिफाइएबल डिजीज) घोषित कर दिया है। यह निर्णय गडचिरोली जिले के धानोरा तालुका स्थित एक आश्रमशाला में तीन आदिवासी छात्राओं की सोते समय सर्पदंश से मौत होने के कुछ ही दिनों बाद लिया गया है।

स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने मंगलवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि अब राज्य के सभी सरकारी, निजी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए हर संदिग्ध, संभावित या पुष्ट मामले और सर्पदंश से हुई मौत की जानकारी संबंधित जिला स्वास्थ्य अधिकारी या जिला शल्यचिकित्सक को देना अनिवार्य होगा।

देशभर में कितने राज्यों ने उठाया यह कदम

महाराष्ट्र अकेला राज्य नहीं है जिसने सांप के काटने को नोटिफाइएबल डिजीज घोषित किया है। अब तक देश के आठ राज्य यह दर्जा दे चुके हैं- कर्नाटक, तमिलनाडु, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा, केरल, ओडिशा और अब महाराष्ट्र

इनमें तमिलनाडु सबसे पहले इस दायरे में आने वाले राज्यों में गिना जाता है, जहां सर्पदंश लंबे समय से अधिसूचित बीमारियों की सूची में शामिल है। कर्नाटक ने फरवरी 2024 में कर्नाटक एपिडेमिक डिजीज एक्ट, 2020 की धारा 3 के तहत सांप के काटने को नोटिफाइएबल डिजीज घोषित किया था। इस फैसले का असर तुरंत आंकड़ों में दिखा—2023 में जहां राज्य में 6,596 मामले और 19 मौतें दर्ज हुई थीं, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 13,235 मामले और 100 मौतें हो गई, क्योंकि पहले बड़ी संख्या में मामले रिपोर्ट ही नहीं होते थे।

झारखंड में भी हाल ही में, मानसून के मौसम में बढ़ती घटनाओं को देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने सर्पदंश को अधिसूचित रोग घोषित करते हुए नेशनल स्नेकबाइट मैनेजमेंट प्रोटोकॉल के कड़ाई से पालन का निर्देश दिया।

केंद्र सरकार ने भी नवंबर 2024 में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखकर सांप के काटने को राज्य सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियम के तहत नोटिफाइएबल डिजीज घोषित करने की सलाह दी थी। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने इस पत्र में लिखा था कि सांप का काटना सार्वजनिक स्वास्थ्य की एक गंभीर चिंता है, जिससे मृत्यु, बीमारी और विकलांगता होती है, और किसान व आदिवासी आबादी इसके सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।

किन राज्यों में सबसे ज्यादा मामले

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान और गुजरात मिलाकर देश में सर्पदंश से होने वाली कुल मौतों का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं।

लोकसभा में हाल ही में दिए गए एक जवाब के अनुसार 2023 की तुलना में 2025 में सर्पदंश से होने वाली मौतों में 135 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई - 2023 में 183, 2024 में 370 और 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 431 तक पहुंच गया। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी वास्तविक घटनाओं से ज्यादा बेहतर रिपोर्टिंग का नतीजा भी हो सकती है।

नोटिफाइएबल डिजीज का दर्जा मिलने से क्या फायदा होगा

जब किसी बीमारी को नोटिफाइएबल डिजीज घोषित किया जाता है, तो हर अस्पताल - चाहे सरकारी हो या निजी - कानूनन उसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को देनी होती है। इसके कई ठोस फायदे गिनाए जा रहे हैं:

पहला, इससे सटीक और भरोसेमंद आंकड़े मिलेंगे। अभी तक बड़ी संख्या में मामले झाड़-फूंक या पारंपरिक इलाज की वजह से अस्पताल तक पहुंचते ही नहीं थे, जिससे असली तस्वीर सामने नहीं आती थी।

दूसरा, एंटी-स्नेक वेनम (ASV) की उपलब्धता बेहतर होगी। हर अस्पताल को अब वेनम के स्टॉक और इस्तेमाल का रिकॉर्ड रखना होगा, जिससे ज्यादा जोखिम वाले इलाकों में समय रहते वेनम भेजा जा सकेगा और कमी नहीं होगी।

तीसरा, समय पर इलाज सुनिश्चित होगा। मौसम, इलाके और परिस्थितियों के आंकड़ों के आधार पर स्वास्थ्य विभाग यह पहचान सकेगा कि किन क्षेत्रों में और किस मौसम में मामले ज्यादा आते हैं, जिससे वहां पहले से तैयारी की जा सकेगी।

चौथा, जागरूकता अभियान लक्षित तरीके से चलाए जा सकेंगे, खासकर आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में जहां झाड़-फूंक पर निर्भरता ज्यादा है।

पांचवां, नीति-निर्माण में मदद मिलेगी। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय कार्ययोजना (NAPSE), जो मार्च 2024 में शुरू हुई थी, का लक्ष्य 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों को आधा करना है और इसके लिए भरोसेमंद डेटा सबसे बुनियादी जरूरत है।

गडचिरोली की घटना ने बढ़ाई गंभीरता

9 अगस्त को गडचिरोली के जपतलाई गांव के एक आवासीय विद्यालय में सोते समय जहरीले सांप के काटने से तीन आदिवासी छात्राओं की मौत हो गई थी। इस घटना ने राज्य सरकार को तुरंत कार्रवाई के लिए प्रेरित किया। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अगर रिपोर्टिंग प्रणाली पहले से मजबूत होती, तो शायद समय रहते इलाज मिल पाता।

भारत में हर साल करीब 30-40 लाख लोगों को सांप काटता है, जिनमें से लगभग 50,000 लोगों की मौत हो जाती है - यह दुनिया भर की सर्पदंश मौतों का लगभग आधा हिस्सा है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सभी उच्च-जोखिम वाले राज्य सर्पदंश को नोटिफाइएबल डिजीज घोषित नहीं करते, तब तक इस समस्या से निपटने की राष्ट्रीय रणनीति अधूरी ही रहेगी।

Updated on:
19 Aug 2026 05:07 pm
Published on:
19 Aug 2026 05:06 pm