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यात्रा का नया ट्रेंड: लंबी छुट्टी का इंतजार नहीं, मन किया तो घूमने निकल पड़े 58% भारतीय

भारतीयों के लिए यात्रा का अनुभव, अब खास मौकों से निकलकर रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रहा है। भारतीयों का कहना है कि वे पिछले एक साल में सिर्फ इसलिए घूमने गए, क्योंकि उनका मन था।
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Updated: 17 Sep 2026, 6:15 PM IST
travel is becoming a part of everyday life
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

भारतीयों के लिए यात्रा अब किसी खास मौके, त्योहार या लंबी छुट्टी का इंतजार नहीं रह गई है। यह अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनती जा रही है, जहां मुश्किल हफ्ता निकालना या बुरा मौसम भी ट्रिप बुक करने की वजह बन जाता है। बुकिंग डॉट कॉम द्वारा करवाए गए और यूगोव पहल के एक नए शोध के अनुसार, भारत के 10 शहरों के करीब 1,000 यात्रियों पर हुए इस सर्वे में 58% भारतीय यात्रियों ने कहा कि वे पिछले एक साल में सिर्फ इसलिए घूमने गए क्योंकि उनका मन था, जबकि 57% ने ऐसी दो-तीन यात्राएं कीं जिनके पीछे कोई बड़ा मौका या उपलब्धि नहीं थी।

छोटी जीत का भी बड़ा जश्न

सर्वे के अनुसार 61% भारतीय यात्रियों ने किसी छोटी उपलब्धि, जैसे- फिटनेस लक्ष्य हासिल करना या मुश्किल कामकाजी हफ्ता पूरा करना जैसे छोटे लक्ष्य प्राप्त के बाद भी जश्न मनाने के लिए ट्रिप बुक की। 55% भारतीयों ने सिर्फ होटल की सुविधाओं- रूम सर्विस, आरामदायक बिस्तर और सोकिंग टब का आनंद लेने के लिए स्टेकेशन बुक किया। वहीं, 48% बेहतर फोटो-वीडियो बैकग्राउंड की तलाश में निकल पड़े।

शादी और घर के झंझटों से बचने के लिए भी सफर

यात्रा के बहाने सिर्फ खुशी से नहीं जुड़े। सर्वे के मुताबिक, आधे यानी 50% उत्तरदाताओं ने किसी सामाजिक जिम्मेदारी, जैसे दूर के रिश्तेदार के डिनर या पारिवारिक शादी से बचने के लिए ट्रिप बुक की। 46% लोगों ने घर में ड्रिलिंग, मरम्मत या पड़ोस के शोर से राहत पाने के लिए यात्रा की, जबकि 30% ने मेड, नैनी या ड्राइवर की छुट्टी के दौरान और 28% ने ससुराल वालों के लंबे प्रवास के दौरान ट्रिप की योजना बनाई। इसके अलावा 35% पार्टनर से झगड़े या ब्रेकअप के बाद घूमने निकल गए।

ज्योतिषी और पालतू जानवर तक बहाना

ट्रैवल प्लानिंग में ऑफिस भी बाधा नहीं बना। सर्वे के अनुसार 48% लोगों ने जरूरी वर्क मीटिंग या कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान ही छुट्टी बुक कर ली, जबकि 45% ने काम करने का दिखावा करते हुए डेस्टिनेशन की तस्वीरें ब्राउज कीं। 51% का मानना था कि वे या उनका परिवार एक ब्रेक के हकदार थे, तो 32% ने ट्रिप को "थेरेपी से सस्ता" बताया। 24% ने डॉक्टर की विटामिन-डी की सलाह को गंभीरता से लेते हुए बीच हॉलीडे चुनी, 22% ने ज्योतिषी के बताए शुभ समय को यात्रा की वजह बताया। वहीं, 10% ने कहा कि उनके पालतू जानवर को भी ब्रेक चाहिए था।

माइक्रो-हॉलीडे का उभरता ट्रेंड

यह ट्रेंड सिर्फ इसी सर्वे तक सीमित नहीं है। इसी साल की एयरबीएनबी-यूगोव की एक अलग रिसर्च के अनुसार, भारत की जेन-जी में हर 10 में से 7 युवा एक लंबी सालाना छुट्टी की बजाय तीन छोटी ट्रिप लेना पसंद करते हैं, जबकि 95% चाहते हैं कि उनकी यात्रा व्यक्तिगत और अनोखी महसूस हो।

वहीं स्कैपिया के 2026 के ट्रैवल डेटा के अनुसार, घरेलू यात्रा की औसत अवधि अब घटकर सिर्फ 1.7 रातें रह गई है और एक-तिहाई से ज्यादा घरेलू फ्लाइट बुकिंग यात्रा से तीन दिन के भीतर ही की जा रही हैं। प्राइसलाइन की 2026 ट्रेंड रिपोर्ट ने इसे "लिटिल ट्रीट ट्रैवल" नाम दिया है, जिसके अनुसार 65% यात्रियों ने खुद को खुश करने के लिए छोटी ट्रिप बुक की।

बुकिंग डॉट कॉम में साउथ एशिया के रीजनल हेड संतोष कुमार ने इस बदलाव को कैलेंडर-आधारित यात्रा से हटकर कुछ ज्यादा निजी होने की ओर बताया, जो पल-पल के मूड और रोजमर्रा के ट्रिगर्स से प्रेरित है। कुल मिलाकर यह साफ है कि भारतीय यात्रियों के लिए अब यात्रा को सही ठहराने के लिए किसी बड़ी वजह की जरूरत नहीं रही। बस, उनका मन किया, तो वह निकल पड़े, बाकी बहाने बाद में मिल जाते हैं।

Updated on:
17 Sep 2026, 6:15 PM IST
Published on: