
पूर्वोत्तर भारत के त्रिपुरा में एक ऐसी जगह है, जहां पहाड़ ही मानो एक विशाल मंदिर की दीवार बन गए हैं। जंगलों से घिरी चट्टानों पर भगवान शिव, गणेश, दुर्गा और कई अन्य देवी-देवताओं की विशाल आकृतियां दिखाई देती हैं। इस जगह का नाम है उनाकोटी। नाम सुनते ही सबसे बड़ा सवाल सामने आता है कि आखिर उनाकोटी का मतलब क्या है और यहां 99,99,999 मूर्तियों की बात क्यों कही जाती है?
दरअसल, उनाकोटी का अर्थ है एक करोड़ से एक कम। धार्मिक और स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां एक करोड़ से सिर्फ एक कम देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं। हालांकि यह संख्या आस्था और लोककथा से जुड़ी है। पुरातात्विक दस्तावेजों में यहां असंख्य शैल आकृतियों और मूर्तियों का उल्लेख मिलता है, लेकिन 99,99,999 की संख्या को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित मूर्तियों की गिनती नहीं माना जाता।
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| स्थान | त्रिपुरा, उनाकोटी जिला |
| निकटतम प्रमुख शहर | कैलाशहर |
| नाम का अर्थ | एक करोड़ से एक कम |
| प्रमुख आराध्य | भगवान शिव |
| प्रमुख शिल्प | विशाल चट्टानी उकेरन और पत्थर की मूर्तियां |
| काल | मुख्य शिल्प 8वीं-9वीं शताब्दी ईस्वी से जोड़े जाते हैं |
| प्रमुख मेला | अशोकाष्टमी मेला |
| विरासत स्थिति | ASI का संरक्षित स्थल, UNESCO की Tentative List में शामिल |
उनाकोटी से जुड़ी सबसे लोकप्रिय कथा भगवान शिव और उनके साथ चल रहे देवी-देवताओं की है। मान्यता है कि भगवान शिव एक करोड़ देवी-देवताओं के साथ काशी की ओर जा रहे थे। रास्ते में रघुनंदन पहाड़ियों के पास रात में सभी ने विश्राम किया।
शिव ने सभी से कहा कि सूर्योदय से पहले उठकर काशी के लिए निकलना होगा। लेकिन सुबह भगवान शिव के अलावा कोई भी नहीं उठा। इसके बाद शिव अकेले काशी की ओर चले गए और मान्यता के अनुसार बाकी सभी देवी-देवता पत्थर की आकृतियों में बदल गए। इसी वजह से इस जगह का नाम उनाकोटी पड़ा।
उनाकोटी की एक दूसरी प्रसिद्ध लोककथा कल्लू कुम्हार से जुड़ी है। मान्यता है कि कल्लू कुम्हार भगवान शिव और माता पार्वती के भक्त थे और उनके साथ कैलाश जाना चाहते थे।
कथा के अनुसार माता पार्वती ने उनके सामने शर्त रखी कि अगर वह एक रात में एक करोड़ देवी-देवताओं की मूर्तियां बना देंगे तो उन्हें साथ ले जाया जाएगा। कल्लू ने पूरी रात मूर्तियां बनाईं, लेकिन सुबह तक एक मूर्ति कम रह गई। इस तरह संख्या एक करोड़ से एक कम रह गई और जगह का नाम उनाकोटी पड़ा। यह कथा भी स्थानीय लोकविश्वास का हिस्सा है।
यही उनाकोटी का सबसे बड़ा रहस्य है। धार्मिक कथा संख्या को 99,99,999 से जोड़ती है, लेकिन पुरातात्विक अध्ययन इसे मूर्तियों की वास्तविक गिनती नहीं बताते।
UNESCO की Tentative List में शामिल विवरण के अनुसार उनाकोटी में चट्टानों पर विशाल शैल उकेरन के साथ अलग-अलग आकार की पत्थर की मूर्तियां भी मौजूद हैं। यहां शिव, गणेश, उमा-महेश्वर, दुर्गा सहित कई देवी-देवताओं के रूप मिलते हैं। इसलिए 99,99,999 का आंकड़ा मुख्य रूप से उनाकोटी के नाम और उससे जुड़ी लोककथा का हिस्सा है।
उनाकोटी की सबसे खास आकृतियों में उनाकोटिश्वर काल भैरव का विशाल शैल चित्र शामिल है। UNESCO के विवरण के अनुसार यह शिव की आकृति करीब 30 फीट ऊंची है। इसके आसपास नंदी और महिला आकृतियां भी दिखाई देती हैं। एक महिला आकृति को देवी दुर्गा के रूप में पहचाना गया है।
यहां शिव के एक अन्य रूप, गंगाधर की विशाल आकृति भी मौजूद है। इन शिल्पों की खासियत यह है कि इन्हें पहाड़ की प्राकृतिक चट्टान को काटकर बनाया गया है।
उनाकोटी की सभी मूर्तियां एक ही समय की हैं, ऐसा नहीं माना जाता। मुख्य शैल उकेरनों को पुरातात्विक और शैलीगत आधार पर 8वीं-9वीं शताब्दी ईस्वी से जोड़ा जाता है। UNESCO के अनुसार यह स्थल पूर्वोत्तर भारत में प्राचीन शैव उपासना के महत्वपूर्ण प्रमाण देता है।
इसके अलावा यहां मिली कुछ ढीली पत्थर की मूर्तियां 11वीं-12वीं शताब्दी की भी मानी गई हैं। यानी उनाकोटी कई दौर की कला और धार्मिक परंपराओं को अपने भीतर समेटे हुए है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की केंद्रीय संरक्षित स्मारकों की सूची में उनाकोटितीर्थ की मूर्तियां और शैल उकेरन शामिल हैं। वहीं भारत की UNESCO Tentative List में भी उनाकोटी को 2022 में शामिल किया गया था। इसका अर्थ यह नहीं है कि इसे UNESCO World Heritage Site का अंतिम दर्जा मिल चुका है। यह अभी Tentative List (अस्थायी सूची) में है।
यहां हर साल अशोकाष्टमी मेला भी लगता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्राकृतिक जंगल, पहाड़, जलधारा और विशाल शैल आकृतियां इस जगह को धार्मिक अनुभव के साथ एक अनोखा विरासत स्थल भी बनाती हैं।
उनाकोटी की खासियत यही है कि यहां आस्था और इतिहास दोनों साथ चलते हैं। 99,99,999 मूर्तियों की कहानी धार्मिक लोकविश्वास है, जबकि चट्टानों पर मौजूद विशाल शिल्प प्राचीन कलाकारों की तकनीक और कल्पना का वास्तविक प्रमाण हैं।
यही वजह है कि उनाकोटी को सिर्फ एक करोड़ से एक कम मूर्तियों वाली जगह कहना इसकी पूरी कहानी नहीं बताता। यह वह स्थान है जहां पहाड़ों को कैनवास बनाकर सदियों पहले शिव और दूसरे देवी-देवताओं के विशाल रूप उकेरे गए। धार्मिक मान्यता ने इसे रहस्य दिया और पुरातात्विक विरासत ने इसे इतिहास में खास जगह।