
जब उम्र बढ़ती है, तो दिल की देखभाल और भी जरूरी हो जाती है। योग एक ऐसा सरल और प्रभावी तरीका है, जो उम्रदराज लोगों के लिए सुरक्षित, सुलभ और लाभकारी हो सकता है। खासकर 50 वर्ष से ऊपर के लोगों के लिए, सही योगासन और सावधानियों के साथ अभ्यास दिल की सेहत को बेहतर बनाए रख सकता है।
50 वर्ष से अधिक उम्र में योग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या योग चिकित्सक से सलाह लेना आवश्यक है, विशेषकर यदि उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हों। Fit India मिशन की गाइडलाइन बताती है कि योगाभ्यास खाली या हल्के पेट पर, स्वच्छ और शांत वातावरण में, धीरे-धीरे और सहज गति से करना चाहिए। सांस को जबरदस्ती रोकना नहीं चाहिए और प्रत्येक आसन को आरामदायक स्थिति में, बिना तनाव के करना चाहिए।
नागपुर मेडिकल कॉलेज के एक अध्ययन में पाया गया कि 40 वर्ष से ऊपर योग करने वालों में दिल की धड़कन (पल्स रेट) कम होती है और सिस्टोलिक और डायस्टोलिक रक्तचाप में भी महत्वपूर्ण कमी आती है। साथ ही, वल्साल्वा अनुपात (जो दिल के आत्मनिर्णय का संकेत है) भी बेहतर पाया गया।
पांडिचेरी के “सिल्वर योग” कार्यक्रम में 67 वर्ष की औसत आयु वाले 124 वरिष्ठ नागरिकों पर एक सत्र के बाद दिल की धड़कन, रक्तचाप और अन्य कार्डियोवैस्कुलर संकेतकों में स्पष्ट सुधार देखा गया।
एक व्यापक समीक्षा (सिस्टेमैटिक रिव्यू, 2016) में पाया गया कि वृद्ध लोगों में योग से रक्तचाप, शरीर की संरचना, ग्लूकोज और लिपिड प्रोफाइल में सकारात्मक बदलाव आते हैं। योग सुरक्षित और व्यवहार्य अभ्यास है, लेकिन और शोध की आवश्यकता है।
दिल के लिए लाभकारी योगासनों में निम्नलिखित शामिल हैं:
ताड़ासन (Mountain Pose): यह मुद्रा शरीर की स्थिति सुधारती है, गहरी सांस लेने में मदद करती है और रक्त संचार को बेहतर बनाती है।
वृक्षासन (Tree Pose): संतुलन, एकाग्रता और रक्त संचार को बढ़ाता है।
भुजंगासन (Cobra Pose): छाती खोलता है, पीठ को मजबूत करता है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है।
सेतु बंधासन (Bridge Pose): रक्त संचार को बढ़ाता है और दिल पर दबाव कम करता है।
त्रिकोणासन (Triangle Pose) और मत्स्यासन (Fish Pose): छाती और फेफड़ों को खोलते हैं, ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाते हैं।
साथ ही, सुखासन (Easy Pose) में धीमी, गहरी सांस लेना (प्राणायाम) दिल को शांत करने में मदद करता है।
लेकिन कुछ आसनों से बचना चाहिए, विशेषकर यदि दिल कमजोर हो:
वीरभद्रासन (Warrior Pose): यह आसन छाती पर दबाव डालता है और उच्च रक्तचाप या कमजोर दिल वाले लोगों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
अधोमुख श्वानासन (Downward Dog): यह उल्टा आसन है, जो कुछ मामलों में रक्त प्रवाह को बदल सकता है; इसलिए इसे सावधानीपूर्वक और डॉक्टर की अनुमति के बाद ही करें।
सीटेड या चेयर योग (Chair Yoga) भी 50 वर्ष से अधिक उम्र वालों के लिए बहुत उपयोगी है। इसमें कुर्सी पर बैठकर आसन किए जाते हैं, जैसे सुखासन, पश्चिमोत्तानासन (सीटेड फॉरवर्ड फोल्ड), वक्रासन (सीटेड ट्विस्ट) और अंत में शवासन (आराम मुद्रा)। ये आसन लचीलेपन, संतुलन और मानसिक शांति में मदद करते हैं।
| दिन | अभ्यास |
|---|---|
| सोमवार, बुधवार, शुक्रवार | ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, सुखासन + धीमा प्राणायाम |
| मंगलवार, गुरुवार | सेतु बंधासन, त्रिकोणासन, मत्स्यासन, शवासन |
| शनिवार | चेयर योग: सुखासन, पश्चिमोत्तानासन, वक्रासन, शवासन |
| रविवार | विश्राम या हल्की सैर |
हर आसन को आराम से, 10–30 सेकंड तक या 3–5 सांसों तक बनाए रखें। अभ्यास के बाद 20–30 मिनट तक विश्राम करें और फिर हल्का भोजन करें।
यदि योग के दौरान या बाद में छाती में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, चक्कर आना, अत्यधिक थकावट या असामान्य धड़कन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
यह लेख डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है; किसी भी नई गतिविधि को शुरू करने से पहले चिकित्सकीय मार्गदर्शन लेना आवश्यक है।