धर्म और अध्यात्म

लंका विजय से पहले भगवान राम ने किया था पार्थिव शिवलिंग का पूजन, पंडित से जानिए इसका महत्व

Sawan Parthiv Shivling: क्या आप जानते हैं कि भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पहले पार्थिव शिवलिंग का पूजन क्यों किया था? सावन में इस पूजा का क्या महत्व है और इसे कैसे करें, जानिए पंडित से।
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Aug 03, 2026
sawan parthiv shivling puja significance
Sawan Parthiv Shivling Puja: लंका विजय से पहले भगवान राम ने किया था पार्थिव शिवलिंग का पूजन (फोटो सोर्स- chatgpt)

Sawan 2026:श्रावण मास में पवित्र नगरी अमरकंटक पूरी तरह शिवमय हो गई है। मां नर्मदा उद्गम मंदिर परिसर में स्थापित 11 रुद्र महादेव के दर्शन, पूजन और रुद्राभिषेक के लिए प्रदेश सहित देशभर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर हर-हर महादेव और नर्मदे हर के जयघोष, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से भक्तिमय बना हुआ है।

मां नर्मदा के उद्गम स्थल पर 11 रुद्र महादेव के रुद्राभिषेक का महत्व

सनातन परंपरा में अमरकंटक को भगवान शिव की तपोभूमि और मां नर्मदा की जन्मस्थली माना गया है। मान्यता है कि श्रावण मास में मां नर्मदा उद्गम पर स्नान तथा उद्गम कुंड के पवित्र जल से 11 रुद्र महादेव का रुद्राभिषेक करने से सुख, समृद्धि, आरोग्य और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। स्कंद पुराण के रेवा खंड और नर्मदा पुराण में भी अमरकंटक और मां नर्मदा के आध्यात्मिक महत्व का उल्लेख मिलता है। श्रद्धालु पहले मां नर्मदा उद्गम के दर्शन कर परिक्रमा करते हैं, फिर 11 रुद्र महादेव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

पार्थिव शिवलिंग पूजन का विशेष महत्व

श्रावण मास भगवान शिव की आराधना, जप, तप और अभिषेक का सर्वश्रेष्ठ काल माना जाता है। इस पूरे माह में श्रद्धालु विभिन्न प्रकार से भगवान भोलेनाथ की उपासना करते हैं, लेकिन शास्त्रों में पार्थिव शिवलिंग पूजन को अत्यंत फलदायी और मनोकामना पूर्ण करने वाला बताया गया है। विद्वानों के अनुसार श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए पार्थिव शिवलिंग (Parthiv Shivling) पूजन से भक्त को सांसारिक सुखों के साथ साथ मोक्ष की प्राप्ति का भी मार्ग प्रशस्त होता है। भगवान श्रीराम ने लंका विजय के लिए प्रस्थान करने से पूर्व भगवान शिव की पार्थिव शिवलिंग बनाकर विधिवत पूजा अर्चना की थी। तभी से पार्थिव शिवलिंग पूजन की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित मानी जाती है।

इस तरह करें पूजन

पंडित संदीप ज्योतिषी बताते हैं कि पार्थिव शिवलिंग बनाते समय शुद्ध मिट्टी और भस्म का उपयोग करना चाहिए तथा शिवलिंग की ऊंचाई 12 अंगुल से अधिक नहीं होनी चाहिए। शास्त्रों में इससे अधिक ऊंचाई होने पर पूजन का पूर्ण फल नहीं मिलने का उल्लेख मिलता है। यह पूजन किसी शिवालय, नदी, तालाब, तीर्थ स्थल अथवा अन्य पवित्र स्थान पर किया जा सकता है। पार्थिव शिवलिंग निर्माण के लिए किसी नदी, तालाब या तीर्थ की शुद्ध मिट्टी लेकर उसमें नर्मदा जल अथवा गंगाजल एवं भस्म मिलाकर शिवलिंग तैयार करें। निर्माण के समय उत्तर दिशा की ओर मुख रखते हुए ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।

Updated on:
03 Aug 2026 04:31 pm
Published on:
03 Aug 2026 04:31 pm